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  • अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज

    अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई राजस्व टीम पर खनन माफिया द्वारा खुलेआम धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है। बदरवास तहसील के सड़बूड़ गांव में हुई इस घटना में तहसीलदार सचिन भार्गव और उनकी टीम को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सिंध नदी के पास सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। इस पर तहसीलदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि भारी मशीनों की मदद से मिट्टी निकाली जा रही थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए उसका अवैध परिवहन किया जा रहा था। टीम ने मौके पर कार्रवाई शुरू की, तभी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने विरोध शुरू कर दिया और सरकारी अमले के साथ अभद्रता की। इसी दौरान मुख्य आरोपी जयमंडल यादव ने तहसीलदार को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह गोली चला देगा और जेल जाने के लिए भी तैयार है। इसके साथ ही उसने अपने बेटे को घर से हथियार लाने के लिए भी कहा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दहशत में आ गए।

    घटना के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और आरोपी पक्ष ने मौके से हाइड्रा मशीन और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगा दिया। हालांकि राजस्व टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर बदरवास थाने में खड़ा करा दिया। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर करीब 15-15 फीट गहरे गड्ढे बनाकर अवैध खनन किया गया था, जिससे बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन सामने आया है।

    कोटवार और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि जान से मारने की धमकी देकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में चिंता बढ़ गई है और अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

    यह मामला राज्य में अवैध खनन पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक टीमों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

  • खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस

    खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस


    कुशीनगर । कुशीनगर जिले में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अभियान को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा था उसी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन ने पूरे मामले को अचानक सुर्खियों में ला दिया है

    और इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से जिले में अवैध खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा था जिसमें नदी घाटों से लेकर खनन के संभावित और संदिग्ध क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी की जा रही थी।

    इस दौरान बिना वैध परमिट चल रहे वाहनों और ओवरलोड ट्रकों पर भी सख्त कार्रवाई की गई थी जिससे अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क में हड़कंप की स्थिति बन गई थी। खासकर बिहार सीमा से आने वाले ट्रकों पर निगरानी बढ़ाए जाने के बाद इस अवैध कारोबार पर प्रशासन का दबाव काफी बढ़ गया था और कई स्थानों पर जुर्माना जब्ती और कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।

    इन कार्रवाइयों के चलते यह संकेत मिल रहा था कि प्रशासन इस बार अवैध खनन के खिलाफ पूरी सख्ती के मूड में है। लेकिन इसी बीच अचानक अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन की कार्रवाई ने पूरे अभियान की दिशा और उसकी मंशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि जब अवैध खनन पर कार्रवाई का असर साफ तौर पर दिखाई देने लगा था

    और माफिया नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा था तो ऐसे समय में कार्रवाई करने वाले अधिकारी को ही क्यों हटाया गया। जनपद में यह भी माना जा रहा है कि अवैध खनन का यह पूरा कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक तंत्र और प्रभावशाली संरक्षण का नेटवर्क सक्रिय रहता है जो लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित और सुरक्षित करता आया है।

    ऐसे में जब किसी अधिकारी की सख्ती से करोड़ों के इस अवैध कारोबार पर सीधा असर पड़ता है तो कई बड़े हित प्रभावित होना स्वाभाविक माना जाता है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां एक ओर अवैध खनन से जुड़े तत्वों में राहत की भावना देखी जा रही है वहीं दूसरी ओर अभियान का नेतृत्व करने वाला अधिकारी खुद प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन और खनन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अवैध कारोबार पर सख्ती दिखाने की कोई कीमत भी चुकानी पड़ती है।

    अब पूरे मामले में शासन स्तर पर अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं बल्कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही पूरी मुहिम की विश्वसनीयता और उसके भविष्य से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।