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  • वास्तु चेतावनी इन पेड़ों की छाया से दूर रखें अपना घर वरना सुख शांति हो सकती है खत्म

    वास्तु चेतावनी इन पेड़ों की छाया से दूर रखें अपना घर वरना सुख शांति हो सकती है खत्म


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में प्रकृति को दिव्य शक्ति का स्वरूप माना गया है और पेड़ पौधों को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि घर में तुलसी और शमी जैसे पौधों को शुभ माना जाता है और उन्हें लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पेड़ पौधे केवल वातावरण को ही नहीं बल्कि जीवन की दिशा को भी प्रभावित करते हैं। जहां कुछ वृक्ष घर में सुख समृद्धि और शांति लाते हैं वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी छाया तक को अशुभ माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि कुछ विशेष पेड़ों की छाया घर पर पड़ती है तो इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और परिवार में तनाव आर्थिक परेशानी तथा मानसिक अशांति जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इन पेड़ों को घर से उचित दूरी पर लगाना ही बेहतर माना जाता है।

    सबसे पहले बात करें पीपल के पेड़ की तो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है और इसमें देवताओं का वास बताया गया है। पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों में इसका विशेष महत्व है लेकिन वास्तु के अनुसार इसकी छाया घर पर पड़ना अनुकूल नहीं माना जाता। इसकी ऊर्जा बहुत अधिक शक्तिशाली और आध्यात्मिक होती है जो गृहस्थ जीवन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। यदि इसकी परछाई घर पर पड़ती है तो परिवार के सदस्यों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

    दूसरा पेड़ है इमली जिसका स्वाद भले ही लोगों को पसंद आता हो लेकिन वास्तु में इसकी छाया को नकारात्मक माना गया है। मान्यता है कि इमली के पेड़ की छाया जिस घर पर पड़ती है वहां रहने वाले लोगों के बीच मतभेद बढ़ने लगते हैं। खासतौर पर पति पत्नी के रिश्तों में तनाव और तकरार की स्थिति पैदा हो सकती है। धीरे धीरे यह स्थिति परिवार के अन्य संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है और घर का माहौल अशांत हो जाता है।

    तीसरी श्रेणी में आते हैं कांटेदार और दूधिया रस वाले पेड़ जैसे बबूल या कैक्टस। इन पेड़ों की प्रकृति ही कठोर और रक्षात्मक होती है इसलिए वास्तु में इन्हें घर के पास रखना उचित नहीं माना गया है। इनकी छाया घर पर पड़ने से नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच कटुता पैदा हो सकती है। इससे आपसी विश्वास कमजोर होता है और जीवन में असंतुलन की स्थिति बन सकती है।

    यदि आपके घर के आसपास पहले से ऐसे पेड़ मौजूद हैं और उनकी छाया घर पर पड़ रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ सरल उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। सप्ताह में एक बार घर में गंगाजल का छिड़काव करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। इसके साथ ही रोज शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और घर सुरक्षित रहता है।

    इसके अलावा घर में तुलसी का पौधा लगाना बेहद लाभकारी माना गया है। ध्यान रखें कि तुलसी पर इन अशुभ पेड़ों की सीधी छाया न पड़े। तुलसी का पौधा घर के वातावरण को संतुलित करता है और वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होता है। इस तरह थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से आप अपने घर को नकारात्मक प्रभावों से बचाकर सुख शांति और समृद्धि बनाए रख सकते हैं।

  • र्भावस्था में क्या न खाएं: एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट का हेल्दी डाइट गाइड

    र्भावस्था में क्या न खाएं: एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट का हेल्दी डाइट गाइड


     नई दिल्ली /प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान केवल मां की नहीं बल्कि बच्चे की सेहत का भी खास ख्याल रखना पड़ता है। प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम पहले जैसा मजबूत नहीं रहता। ऐसे में मां का हेल्दी और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे की सही ग्रोथ और मां की सेहत दोनों बनी रहें। कई बार महिलाएं सोचती हैं कि प्रेग्नेंसी में उन्हें दो लोगों की डाइट लेनी है और अधिक मात्रा में खाना शुरू कर देती हैं। लेकिन यह सही नहीं है। हर फूड प्रेग्नेंसी में सुरक्षित नहीं होता। कुछ चीजें फूड पॉइजनिंग, इन्फेक्शन, हॉर्मोनल असंतुलन और बच्चे की विकास प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए।

    प्रेग्नेंसी में किन फूड्स से बचें:

    कच्चा या अधपका अंडा और मीट: इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं जो फूड पॉइजनिंग और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कच्चा या अधपका पपीता: इसमें लेटेक्स नामक पदार्थ होता है जो गर्भाशय में संकुचन कर सकता है। जंक फूड, अधिक मसालेदार और तेलीय भोजन: ये हॉर्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ने की समस्या पैदा कर सकते हैं। ज्यादा कैफीन: प्रतिदिन 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन लगभग एक कप कॉफी/चाय बच्चे की ग्रोथ और नींद पर असर डाल सकता है।

    क्या खाएं:

    बच्चे के सही विकास के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को पौष्टिक और संतुलित आहार लेना चाहिए। इसमें शामिल हैं: मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी ,दालें और काबुली ,चना, बीज और ड्राईफ्रूट्स जैसे पंपकिन, सनफ्लावर सीड्स  स्वस्थ तेल जैसे सरसों का तेल और घी  ताजे फल और हरी सब्जियां

    डेली डाइट प्लान:

    प्रेग्नेंसी में छोटे-छोटे खाने के हिस्से दिन में कई बार लेना बेहतर होता है। आहार में कार्ब्स, प्रोटीन, फैट और फाइबर का संतुलन होना चाहिए। हाइड्रेशन के लिए दिन भर में 2.5–3 लीटर पानी पीना जरूरी है। इसके अलावा नारियल पानी, सूप, लेमन वॉटर और छाछ भी पी सकते हैं।

    स्नैक्स:

    हल्के, सुपाच्य और न्यूट्रिएंट-रिच स्नैक्स लेना सुरक्षित है। जैसे- रोस्टेड नट्स  पका हुआ स्प्राउट्स चाट
    मूंग दाल या बेसन चीला  इडली और डोसा  होममेड वेजिटेबल सूप और सैंडविच  उबला अंडा और कॉर्न

    वजन बढ़ना:

    प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना सामान्य और जरूरी है। कुल वजन बढ़ने की सीमा आपकी पहले की बॉडी मास इंडेक्स BMI पर निर्भर करती है। आम तौर पर 10–12.5 किलो तक वजन बढ़ना सामान्य माना जाता है। अंडरवेट महिलाएं 12–18 किलो नॉर्मल वेट 11–16 किलो, ओवरवेट 7–11 किलो और ओबेसिटी वाली महिलाएं 5–9 किलो तक वजन बढ़ा सकती हैं।

    एक्सरसाइज और योगा:

    हल्की एक्सरसाइज और योगा पूरी तरह सुरक्षित हैं। नियमित हल्की वॉक, प्राणायाम, डीप ब्रीदिंग और स्ट्रेचिंग से शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और डिलीवरी में सहूलियत होती है। लेकिन भारी वजन उठाना, झटकेदार मूवमेंट या पेट के बल की एक्सरसाइज से बचें। किसी नई या कठिन योग पोज को बिना ट्रेनर के शुरू न करें। अगर चक्कर, सांस फूलना, पेट दर्द या ब्लीडिंग हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।  प्रेग्नेंसी का यह चरण बेहद खास होता है। संतुलित आहार, सही हाइड्रेशन, सुरक्षित स्नैक्स और हल्की एक्सरसाइज न केवल मां की सेहत बनाए रखती हैं बल्कि बच्चे के सही विकास और मजबूत इम्यून सिस्टम में भी मदद करती हैं।