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  • मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के तीव्र होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में अगले तीन से चार दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में 20 से 25 अगस्त के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक न होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज टूटकर गिर जाने से चीन सीमा से सटे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भूस्खलन और मलबे के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

    हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। गांदरबल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई। वहीं कालका-शिमला रेलखंड पर मलबा आने से रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी मानसून की गतिविधियां बेहद सक्रिय बनी हुई हैं। राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आगामी दिनों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है, जिससे नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य शासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

    पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, बिहार और ओडिशा में भी भारी बारिश और बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश

    जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई तेज बारिश के बावजूद जून में हुई कमी की भरपाई नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सबसे बड़ा असर जलाशयों और बांधों पर दिखाई दे रहा है, जहां अधिकांश बड़े डैम आधे भी नहीं भर पाए हैं। यदि अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के कई हिस्सों में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.7 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य वर्षा 18.1 इंच होनी चाहिए थी। यानी करीब 2.4 इंच की कमी बनी हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि पांच जिलों में तो 10 इंच से भी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सबसे कम बारिश मुरैना में केवल 6.3 इंच दर्ज हुई है।

    कम बारिश का असर प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। कोलार, बाणसागर, बरना, कुंडालिया, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर और तिघरा जैसे बड़े बांध अभी तक आधे भी नहीं भर पाए हैं। पिछले वर्ष जुलाई के अंत तक अधिकांश जलाशय लगभग भर चुके थे और कई डैमों के गेट भी खोलने पड़े थे, लेकिन इस बार केवल बैतूल स्थित सतपुड़ा डैम के सात गेट ही खोले गए हैं। जलाशयों में पानी कम होने के कारण कई शहरों में नियमित जलापूर्ति भी प्रभावित होने लगी है।

    कृषि क्षेत्र पर भी मानसून की स्थिति का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। शाजापुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ के अनुसार वर्तमान मौसम सोयाबीन की फसल के लिए अनुकूल है क्योंकि अभी हल्की और मध्यम बारिश फसल के विकास में मददगार है। हालांकि दाना बनने के समय अधिक पानी की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव हुआ है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं धान की खेती के लिए अब भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है।

    इस वर्ष मानसून भी प्रदेश में सामान्य से नौ दिन देरी से पहुंचा था। 24 जून को इसकी एंट्री हुई और अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश को कवर किया। शुरुआती देरी के कारण जून में वर्षा 30 प्रतिशत तक कम रही। जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति सुधरी और औसत वर्षा सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक हो गई थी, लेकिन दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया। तीसरे और चौथे सप्ताह में तेज बारिश जरूर हुई, फिर भी शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी।

    प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा बालाघाट जिले में करीब 24 इंच दर्ज की गई है, जबकि वर्षा प्रतिशत के लिहाज से बुरहानपुर सबसे आगे है, जहां सामान्य कोटे का लगभग 77 प्रतिशत पानी बरस चुका है। सीहोर, देवास, डिंडौरी और सिवनी जैसे जिलों में भी 20 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई है। दूसरी ओर मुरैना, दतिया, श्योपुर, रीवा और अलीराजपुर जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा 10 इंच से भी नीचे बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर कुछ समय के लिए थमा है, लेकिन अगले सप्ताह से प्रदेश में फिर सक्रिय मानसून की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो जलाशयों में पानी बढ़ने के साथ किसानों और आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल प्रदेश की नजरें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही आने वाले महीनों में पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और खरीफ फसलों की स्थिति तय करेगी।

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

  • चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार के लिए उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 से 30 जुलाई के बीच कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन सक्रिय है जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी जल्द प्रभाव दिखाएगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई और अब इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

    भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच यानी 334.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच यानी 395.2 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है जबकि 41 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निवाड़ी पूर्वी मध्य प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां औसत से अधिक वर्षा हुई है। दूसरी ओर भोपाल इंदौर सीहोर राजगढ़ देवास हरदा बुरहानपुर नीमच मंदसौर दमोह सिवनी आगर मालवा और भिंड जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहतर रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जून महीने में कमजोर मानसून के कारण बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रह गया था। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी लेकिन पिछले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने से प्रदेश फिर औसत से नीचे पहुंच गया। अब सक्रिय मानसूनी सिस्टम से उम्मीद है कि बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश वाला महीना होता है क्योंकि पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा इसी महीने में होती है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक बारिश 37.3 इंच मानी जाती है जबकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा 38 से 39 इंच के बीच रहती है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 4.2 इंच वर्षा नर्मदापुरम में रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल सहित कई शहरों में पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले 24 से 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम के अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच तथा खरगोन में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर सहित कई जिलों में भी तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला।

    लगातार बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद एक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में खेत पानी से लबालब भर गए हैं। कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर मजबूत हो गया है। प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र, लगातार बादलों की मौजूदगी और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी बारिश को लगातार बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी वर्षा हो रही है।

    बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। सुबह और रात के समय मौसम काफी सुहावना हो गया है तथा लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वातावरण में सापेक्षिक आर्द्रता 75 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है और वर्षा की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यही हवाएं समुद्र से नमी लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंच रही हैं और मानसून को लगातार मजबूत बनाए हुए हैं।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल तथा आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

  • जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे अधिक असर राजौरी जिले में देखने को मिला, जहां अचानक आई बाढ़ और तेज बहाव ने भारी तबाही मचा दी। लगातार वर्षा के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया और बड़ी संख्या में लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के प्रयास जारी हैं।

    राजौरी जिले में धरहाल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया। तेज बहाव की चपेट में आकर 200 से अधिक वाहन बह गए या मलबे में दब गए। कई स्थानों पर सड़कें कीचड़ और मलबे से भर गईं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन एक-दूसरे के ऊपर फंस गए, जबकि कुछ पूरी तरह पानी में समा गए। इससे स्थानीय लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

    भारी बारिश के कारण शहर का प्रमुख बस स्टैंड भी बाढ़ की चपेट में आ गया। पूरे परिसर में पानी और मलबा भर जाने से उसकी पहचान तक मुश्किल हो गई। बस स्टैंड के आसपास का निचला इलाका पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी पानी घुस गया, जिसके कारण सामान खराब हो गया और व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ा।

    रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का असर स्पष्ट दिखाई दिया। कई घरों में पानी भर जाने से घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी वस्तुएं खराब हो गईं। कुछ मकानों को संरचनात्मक क्षति पहुंची, जबकि दो मकान पूरी तरह ढह गए। लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा और कई परिवारों ने ऊंचे इलाकों में अस्थायी रूप से शरण ली। जलभराव और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो गईं।

    लगातार बारिश के चलते जिले के कई हिस्सों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। नदियों और नालों के उफान पर होने से कई मार्गों पर आवाजाही मुश्किल हो गई। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं और जहां आवश्यकता है वहां राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर जलनिकासी और मलबा हटाने का कार्य भी शुरू किया गया है ताकि सामान्य स्थिति जल्द बहाल की जा सके।

    मौसम विभाग ने क्षेत्र में अगले 48 घंटे तक भारी वर्षा की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके मद्देनजर लोगों को नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है। आपदा की इस स्थिति ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के दौरान सतर्कता, मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था और समय पर राहत कार्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

  • Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना

    Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना


    मध्यप्रदेश । 11 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र गुजरात कर्नाटक तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में जलभराव बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका भी जताई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और नदी नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिल सकती है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    दक्षिण भारत में कर्नाटक तमिलनाडु और केरल के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पश्चिमी तट के कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी तेज बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसून प्रणाली के कारण अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में 15 जुलाई के बाद वर्षा की तीव्रता में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने सुरक्षित स्थान पर शरण लेने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है।

  • बारिश से बेहाल मध्यप्रदेश अंडरब्रिज डूबे नदियां उफान पर कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

    बारिश से बेहाल मध्यप्रदेश अंडरब्रिज डूबे नदियां उफान पर कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी


    मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है और लगातार हो रही बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीते चौबीस घंटे के दौरान 40 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। धार में सबसे अधिक करीब 2.4 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जबकि राजगढ़ रतलाम शिवपुरी टीकमगढ़ खरगोन भोपाल और उज्जैन सहित कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर नदी नाले उफान पर आ गए हैं और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

    शाजापुर जिले में हालात ऐसे बन गए कि शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर उफनता नाला पार कर स्कूल पहुंचना पड़ा। वहीं रतलाम में सागोद रोड से ईश्वर नगर जाने वाले अंडरब्रिज में पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो गया। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और लोगों को लंबा रास्ता तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

    प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार सुबह से रिमझिम और तेज बारिश का दौर जारी है। कहीं पिछले 16 घंटे से लगातार मध्यम और तेज बारिश हो रही है तो कहीं सुबह से आसमान में बादल छाए रहने के साथ लगातार फुहारें पड़ रही हैं। इस बारिश से जहां उमस और गर्मी से राहत मिली है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में नदी नालों के उफान ने लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।

    भोपाल के जलस्रोतों पर भी बारिश का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। कुलांस नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे राजधानी के बड़े तालाब में पानी की आवक तेज हो गई है। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई छोटे बड़े नाले उफान पर हैं। कई गांवों का संपर्क अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है और प्रशासन लोगों से अनावश्यक रूप से नदी नाले पार नहीं करने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कई स्थानों पर चौबीस घंटे के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश हो सकती है। श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर सागर और टीकमगढ़ जिलों के लिए अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जहां लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
    इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी नालों से दूर रहें जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    नई दिल्ली । कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सोमवार शाम मौसम ने बड़ी राहत दी। अचानक तेज हवाएं चलने के बाद राजधानी और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। लंबे समय से गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की और शाम के समय मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

    दिनभर तेज धूप और उमस के बाद शाम होते-होते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद तेज हवा चलने लगी और कई स्थानों पर बारिश शुरू हो गई। मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी का असर काफी कम हो गया। बारिश के चलते सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और कई इलाकों में लोगों ने खुले मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के कारण यातायात की रफ्तार भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी राजधानी में राहत का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या रात के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

    मंगलवार को अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह पश्चिमी दिशा से हवाएं लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़ सकती हैं। शाम और रात के दौरान हवा की रफ्तार कुछ कम होने का अनुमान है, लेकिन मौसम में नमी बनी रहेगी।

    बुधवार, 1 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह रहने की संभावना जताई गई है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है और हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जिससे मौसम और अधिक सुहावना बना रहेगा।

    एक जुलाई को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चलेंगी, जबकि दोपहर और शाम के दौरान पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा के कारण तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राजधानी और एनसीआर के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे न केवल तापमान नियंत्रित रहेगा बल्कि लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।