स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सभी देशों के सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या भी घटी है। अक्टूबर 2025 में यह संख्या 12,83,240 थी, जो अक्टूबर 2026 में घटकर 11,92,572 रह गई। इस प्रकार कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में लगभग 7.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट इस समग्र कमी से अधिक रही है।
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दूसरे सबसे बड़े समूह चीन से आने वाले विद्यार्थियों का है। इस श्रेणी में भी एक साल के दौरान कमी दर्ज की गई। अक्टूबर 2025 में चीन के 2,45,038 सक्रिय छात्र अमेरिका में थे, जबकि अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,20,157 रह गई। इस तरह चीनी छात्रों की संख्या में लगभग 10.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के कुल आंकड़ों में भारत की हिस्सेदारी भी कम हुई है। अक्टूबर 2025 में अमेरिका में सक्रिय विदेशी छात्रों में भारतीय विद्यार्थियों की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत थी। अक्टूबर 2026 में यह घटकर करीब 26.6 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद भारत सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र भेजने वाला देश बना हुआ है।
भारतीय छात्रों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी मास्टर्स यानी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सामने आई है। अक्टूबर 2025 में अमेरिका के मास्टर्स प्रोग्राम में 2,92,929 भारतीय छात्र नामांकित थे। अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,34,034 रह गई। इस स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय विद्यार्थियों का बड़ा हिस्सा अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए मास्टर्स पाठ्यक्रमों को चुनता रहा है, इसलिए इस श्रेणी में आई कमी कुल आंकड़ों को भी प्रभावित कर रही है।
हालांकि, डॉक्टोरल यानी पीएचडी स्तर पर इसके विपरीत रुझान देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 में इस स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 28,609 थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर 41,729 हो गई। यानी पीएचडी में भारतीय विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। वहीं, स्नातक यानी बैचलर स्तर पर छात्रों की संख्या 38,522 से घटकर 36,011 रह गई।
आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अमेरिका में सक्रिय भारतीय छात्रों में 1,95,341 पुरुष और 1,21,552 महिला विद्यार्थी शामिल थे। एसईवीआईएस के आंकड़ों में उन विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है जिनका रिकॉर्ड संबंधित सिस्टम में सक्रिय रहता है। इसमें ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के तहत रहने वाले छात्र भी शामिल हैं। इसलिए ये आंकड़े किसी एक महीने की स्थिति बताते हैं, न कि पूरे वर्ष अमेरिका पहुंचे विद्यार्थियों की कुल संख्या।
छात्रों की संख्या में गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में छात्र वीजा से जुड़ी जांच प्रक्रिया सख्त हुई है। ओपीटी और एसटीईएम एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसके साथ ही कानूनी आव्रजन के विभिन्न रास्तों को लेकर नियमों और प्रक्रियाओं में सख्ती बढ़ाई जा रही है। इन परिस्थितियों के बीच भारतीय मूल के नेताओं के एक गैर-लाभकारी नेटवर्क ने 30 अक्टूबर को जारी बयान में अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या घटने की बात कही। संगठन ने इस रुझान को मौजूदा चुनावी माहौल में भारत-विरोधी बयानबाजी से भी जोड़ा है।
दक्षिण एशिया के अन्य देशों से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। नेपाल के सक्रिय छात्रों की संख्या अक्टूबर 2025 में 35,273 थी, जो अक्टूबर 2026 में घटकर 33,992 रह गई। इस तरह अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या घटने का रुझान कई देशों में दिखाई दे रहा है, जबकि भारतीय छात्रों के मामले में मास्टर्स स्तर की गिरावट सबसे प्रमुख बदलाव बनकर सामने आई है।








