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  • MP में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर: पूर्वी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-ग्वालियर में भी बदलेगा मौसम

    MP में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर: पूर्वी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-ग्वालियर में भी बदलेगा मौसम


    भोपाल। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को प्रदेश के पूर्वी जिलों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जबकि भोपाल, ग्वालियर समेत कई शहरों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। बारिश और बादलों के कारण आज करवा चौथ पर चांद के दीदार में भी परेशानी हो सकती है।

    विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में ज्यादा असर
    बुधवार को प्रदेश के कई इलाकों में मौसम बदला रहा। सतना, कटनी और छतरपुर समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवाती सिस्टम का असर गुरुवार को भी पूर्वी मध्यप्रदेश में दिखाई दे सकता है।

    मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताए जाने के साथ सतना, रीवा, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में 24 घंटे के दौरान चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है।

    सिंगरौली में सुबह से बारिश, तेज हवाओं के साथ छाए बादल
    सिंगरौली में गुरुवार सुबह से मौसम बदला हुआ है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से जिले में मौसम के अस्थिर बने रहने की संभावना है।

    भोपाल-ग्वालियर समेत इन जिलों में गरज-चमक के आसार
    गुरुवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर में बादल छाने, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदल सकता है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश होने की आशंका है।

    मालवा के कई जिलों में खिल सकती है धूप
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। इन जिलों के लिए बारिश और आंधी का अलर्ट नहीं बताया गया है। हालांकि, मौसम की स्थिति में बदलाव संभव है। लोगों को अपने जिले के ताजा मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

    शाजापुर के गिरवर में 12.8 डिग्री तापमान
    बारिश और बादलों के बीच प्रदेश में रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। बीती रात शाजापुर जिले के गिरवर में न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 15.2 डिग्री, धार में 15.4 डिग्री और आगर-मालवा में 15.9 डिग्री तापमान रहा। नीमच के मरुखेड़ा और छतरपुर के नौगांव में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आंधी और बारिश के प्रभाव से दिन के तापमान में भी करीब एक डिग्री तक की गिरावट आई है। खजुराहो, खंडवा, रतलाम, खरगोन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 33.2 से 34.2 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

    मानसून की विदाई के बाद भी जारी है बारिश
    मध्यप्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी। एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया था, लेकिन अब चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से अक्टूबर के आखिरी दिनों में फिर बारिश का दौर बन गया है। इससे तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ मौसम में ठंडक बढ़ने के आसार हैं।

  • RBI का बड़ा फैसला…. 1 अक्‍टूबर से बदल जाएंगे FD के नियम, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर?

    RBI का बड़ा फैसला…. 1 अक्‍टूबर से बदल जाएंगे FD के नियम, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर?


    नई दिल्ली।
    हर महीने के शुरुआत की तरह अक्टूबर का महीना भी देश में कई बड़े बदलाव (Rule Change From 1st October) लेकर आ रहा है। ये चेंज बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) से जुड़े हुए हैं. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) एफडी के नियमों को बदलने (FD Rule Change) जा रहा है, जिसकी जगह पर नए फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट के नियम लागू होंगे. इनमें FD Interest Rates समेत कई अन्य अपडेट भी शामिल किए जा रहे हैं. फिक्स्ड डिपॉजिट के नए नियम 1 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे।


    3 करोड़ से ज्यादा FD पर ब्याज

    FD New Rules, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं, ये सबसे ज्यादा बल्क डिपॉजिट से जुड़े हुए हैं. यहां जान लीजिए कि थोक जमा या Bulk FD Deposit का मतलब होता है कि 3 करोड़ रुपये या उससे ज्‍यादा की FD. आरबीआई की ओर से तय किए गए बदलावों के मुताबिक, बैंकों को एलसीआर ढांचे के तहत जमा या असुरक्षित थोक जमा पर लागू डिफरेंशियल रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रखते हुए थोक जमा पर डिफरेंशियल इंटरेस्‍ट रेट्स देने की स्वतंत्रता होगी।


    हर दिन ब्याज पर अपडेट

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े ब्याज नियमों में जो बदलाव लागू किया जा रहा है, उसका उद्देश्‍य बैंकों को ब्‍याज दरें तय करने में ज्‍यादा लचीलापन देना है. अब अक्टूबर महीने की पहली तारीख से से बैंकों को अपनी वेबसाइट पर जमा राशि, जिसमें थोक जमा भी शामिल हैं, पर दी जा रहीं ब्याज दरें दिखानी होंगी. थोक जमा पर देय ब्याज दरें हर कार्य दिवस को सुबह 10:00 बजे बैंक की वेबसाइट पर अपडेट की जाएंगी, जिसमें 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, और यह घोषणा अधिकतम 10:10 बजे तक की जानी अनिवार्य है।


    सभी शाखाओं में एक जैसी दरें

    RBI की ओर से बैंकों को ये निर्देश भी दिया गया है कि वे एक ही तारीख को स्‍वीकार की गई फिक्स्ड डिपॉजिट रकम पर एक समान ब्‍याज दर प्रदान करें. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, किसी भी ब्रांच में एक ही तारीख को स्‍वीकार की गई समान अमाउंट की जमा राशियों पर दिए जाने वाले ब्‍याज के मामले में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।


    निवेशकों पर क्या होगा चेंज का असर?

    अब सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 1 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने वाले इन एफडी निवेश से जुड़े बदलावों का आम निवेशकों पर क्या और कितना असर होगा? तो बता दें कि ये बदले हुए नियम बड़ी जमा राशि (3 करोड़ रुपये और उससे अधिक) से संबंधित हैं, इसलिए सावधि जमा निवेशकों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है. हालांकि, ये दिशा-निर्देश बैंकों में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाएंगे।


    ‘Zero Risk’, जोरदार रिटर्न

    गौरतलब है कि सुरक्षित निवेश और जोरदार रिटर्न की बात होती है, तो बीते कुछ समय में एफडी स्कीम्स खासी पॉपुलर हुई हैं. खासतौर पर सीनियर सिटीजंस के लिए, क्योंकि एफडी में निवेश पर आम ग्राहकों की तुलना में बैंक इन निवेशकों को ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं, जो 8 से 9 फीसदी तक पहुंच जाता है. इसके अलावा तमाम बैंक अलग-अलग टैन्योर के लिए चलाई जा रहीं स्पेशल एफडी स्कीम पर एक्स्ट्रा ब्याज से साथ अन्य सुविधाएं भी ऑफर कर रहे हैं।

  • शुक्र 3 अक्टूबर से होंगे वक्री, 42 दिन बदलेंगे रिश्तों और आर्थिक फैसलों के समीकरण, जानें सभी 12 राशियों पर असर

    शुक्र 3 अक्टूबर से होंगे वक्री, 42 दिन बदलेंगे रिश्तों और आर्थिक फैसलों के समीकरण, जानें सभी 12 राशियों पर असर


    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सुख, समृद्धि, प्रेम और वैवाहिक जीवन से जुड़े ग्रह शुक्र 3 अक्टूबर 2026 को वक्री होने जा रहे हैं। पंचांग के मुताबिक दोपहर करीब 12:45 बजे शुरू होने वाली शुक्र की वक्री चाल 14 नवंबर 2026 की सुबह करीब 5:57 बजे तक रहेगी। यानी करीब 42 दिनों तक शुक्र की चाल उल्टी दिशा में रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस अवधि को प्रेम संबंधों, दांपत्य जीवन और आर्थिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शुक्र के वक्री होने के दौरान पुराने रिश्ते और पहले से चल रहे विवाद एक बार फिर चर्चा में आ सकते हैं। वहीं, पैसों से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं इस अवधि में किस राशि पर किस तरह का प्रभाव बताया गया है।

    प्रेम संबंधों में पुराने मामले फिर आ सकते हैं सामने

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शुक्र की वक्री चाल का असर प्रेम संबंधों पर विशेष रूप से देखा जाता है। लंबे समय से चल रही गलतफहमियों और दूरियों को बातचीत के जरिए कम करने का मौका मिल सकता है। वहीं, पुराने प्रेम संबंध या पूर्व साथी से दोबारा संपर्क होने की संभावना भी बताई जाती है।

    हालांकि इस दौरान नए रिश्ते की शुरुआत या पुराने संबंध को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने में जल्दबाजी न करने की सलाह दी जाती है। भावनाओं में लिया गया निर्णय बाद में उलझन बढ़ा सकता है।

    दांपत्य जीवन में बातचीत और संयम जरूरी

    विवाहित लोगों के लिए भी यह अवधि आत्ममंथन वाली मानी जा रही है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे अनसुलझे मुद्दे बातचीत के जरिए सामने आ सकते हैं। कुछ दंपती अपने रिश्ते को नए स्तर पर ले जाने का फैसला कर सकते हैं, जबकि कुछ को आपसी तालमेल बनाए रखने में चुनौती महसूस हो सकती है।

    ऐसे में भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य और संवाद बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    धन और खर्च के मामले में सावधानी

    शुक्र को ज्योतिष में धन, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इसकी वक्री चाल के दौरान आर्थिक फैसलों पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। महंगी वस्तुओं की खरीदारी, निवेश या बड़े खर्च से पहले अपनी आर्थिक स्थिति की समीक्षा करना बेहतर माना जाता है।

    बिना योजना के किया गया खर्च बजट बिगाड़ सकता है। इसलिए 42 दिनों की इस अवधि में फिजूलखर्ची से बचने और बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है।

    सभी 12 राशियों पर शुक्र वक्री का प्रभाव

    मेष: रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों में बदलाव आ सकते हैं। कारोबार या वैवाहिक जीवन के पुराने मुद्दों को सुलझाने का अवसर मिलेगा, लेकिन फैसले जल्दबाजी में न लेने की सलाह है।

    वृषभ: सेहत और रोजमर्रा की कार्यशैली पर ध्यान देना होगा। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें और मौसमी बीमारियों तथा विरोधियों से सतर्क रहें।

    मिथुन: प्रेम संबंधों और संतान पक्ष को लेकर सावधानी जरूरी रहेगी। पुरानी गलतफहमियां फिर उभर सकती हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ानी होगी।

    कर्क: घरेलू जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है। माता की सेहत चिंता का कारण बन सकती है। संपत्ति या वाहन खरीदने का फैसला फिलहाल टालना बेहतर माना गया है।

    सिंह: संवाद और पराक्रम से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिल सकता है। भाई-बहनों के साथ मतभेद से बचें। किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी पूरी जानकारी जांच लें।

    कन्या: धन और वाणी से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। परिवार में तीखी बहस से बचना बेहतर रहेगा।

    तुला: शुक्र के वक्री होने के कारण यह समय आत्मविश्लेषण का माना जा रहा है। व्यक्तित्व और रिश्तों में सुधार के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा।

    वृश्चिक: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। दूर की यात्राओं में बाधा आने की आशंका बताई गई है। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान को उपयोगी माना गया है।

    धनु: आय के स्रोतों और सामाजिक दायरे में बदलाव आ सकता है। पुराने मित्रों से दोबारा संपर्क हो सकता है। आर्थिक मामलों में किसी शॉर्टकट से बचने की सलाह है।

    मकर: करियर और कार्यक्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से वैचारिक मतभेद से बचें। नौकरी बदलने का फैसला सोच-समझकर करें।

    कुंभ: आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुझान बढ़ सकता है। लंबी यात्रा के योग बन सकते हैं, लेकिन सामान और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी होगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर अधिक फोकस करना होगा।

    मीन: स्वास्थ्य और अचानक होने वाले धन लाभ या हानि के लिहाज से यह अवधि महत्वपूर्ण मानी गई है। ससुराल पक्ष से मतभेद हो सकते हैं। जोखिम वाले निवेश से दूर रहने की सलाह है।

    रिश्तों और फैसलों में इन बातों का रखें ध्यान

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र की वक्री चाल के दौरान रिश्तों में अहंकार को हावी नहीं होने देना चाहिए। किसी विवाद पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर बातचीत करना बेहतर माना जाता है। आर्थिक मामलों में भी भावनाओं के बजाय अपनी वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    हर व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति अलग होती है। इसलिए शुक्र की वक्री चाल का प्रभाव भी व्यक्ति-विशेष की कुंडली के अनुसार अलग माना जाता है। बड़े व्यक्तिगत, वैवाहिक या आर्थिक निर्णय लेने से पहले योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

  • UPI चार्ज से पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कैश की मांग, ₹2 हजार से ज्यादा के ऑनलाइन भुगतान से बच रहे ग्राहक

    UPI चार्ज से पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कैश की मांग, ₹2 हजार से ज्यादा के ऑनलाइन भुगतान से बच रहे ग्राहक


    नई दिल्ली। UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने की घोषणा के बाद पेट्रोल पंपों पर इसका असर दिखाई देने लगा है। 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियम के तहत सामान्य मर्चेंट कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR तय किया गया है, जबकि पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल पेमेंट के लिए ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।

    राजस्थान के अलवर में आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कई पेट्रोल पंपों पर कैश पेमेंट से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं। यहां पेट्रोल-डीजल भरवाने पहुंच रहे ग्राहकों को ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान UPI से करने से बचने की सलाह दी जा रही है। इसके चलते कुछ जगहों पर ग्राहक भी ऑनलाइन भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे हैं।

    पेट्रोल पंपों पर लगे कैश पेमेंट के पोस्टर

    नए MDR नियम को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संचालकों का कहना है कि अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होनी है, इसलिए फिलहाल वे UPI से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, जैसे-जैसे ग्राहकों को MDR के बारे में जानकारी मिल रही है, बड़े UPI भुगतान को लेकर उनकी झिझक बढ़ रही है।

    अलवर में पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन पर कैश भुगतान के पोस्टर लगाए जाने की बात भी सामने आई है। संचालकों के मुताबिक, अभी तक नए शुल्क को लेकर सभी स्तरों पर स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से ग्राहकों को भी यह समझने में परेशानी हो रही है कि नए नियम का वास्तविक असर किस पर पड़ेगा।

    ग्राहक कर रहे भुगतान बांटने की कोशिश

    पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले कुछ ग्राहकों ने आजतक से बातचीत में बताया कि UPI MDR को लेकर लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कुछ लोग ₹2,000 से अधिक का एकमुश्त ऑनलाइन भुगतान करने से बच रहे हैं।

    कुछ ग्राहक बड़े भुगतान को दो या तीन हिस्सों में करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, नए नियम के अनुसार शुल्क की गणना मर्चेंट कैटेगरी और लागू MDR व्यवस्था के आधार पर होगी, इसलिए केवल भुगतान को हिस्सों में बांटने से हर स्थिति में शुल्क से बचना संभव होगा, यह जरूरी नहीं है।

    लोगों की चिंता- असर आखिरकार जेब पर आएगा

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर UPI शुल्क का अतिरिक्त बोझ कारोबारियों पर बढ़ता है तो उसका असर आगे चलकर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कुछ ग्राहकों ने आशंका जताई कि खाने-पीने सहित दूसरी चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

    लोगों का कहना है कि सरकार को इस तरह की व्यवस्था लागू करने से पहले इसके असर पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि कारोबारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर अंततः आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है।

    पेट्रोल पंप पर ₹5 MDR, 0.4% नहीं

    UPI के नए MDR ढांचे में सभी कारोबारियों के लिए एक जैसी दर नहीं रखी गई है। सामान्य मर्चेंट कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है। वहीं फ्यूल, रेलवे, टेलीकॉम और इंश्योरेंस जैसी कुछ कैटेगरी के लिए अलग फ्लैट MDR तय किया गया है।

    पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान के लिए ₹5 का फ्लैट MDR लगेगा। यानी ग्राहक अगर पेट्रोल-डीजल के लिए ₹10,000 का भुगतान UPI से करता है, तो पेट्रोल पंप की कैटेगरी में MDR ₹5 ही रहेगा, 0.4% के हिसाब से ₹40 नहीं।

    यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के बजाय मर्चेंट पर लागू होने वाला MDR है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नए शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए।

    छोटे कारोबारियों को राहत

    नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए भी प्रावधान रखा गया है। UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। वहीं ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

    इस तरह 15 अक्टूबर से UPI की पूरी व्यवस्था बंद या सभी भुगतानों पर शुल्क वाली नहीं हो रही है। बदलाव मुख्य रूप से चुनिंदा P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को होने वाले बड़े डिजिटल भुगतान पर लागू होगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।

  • US में ब्याज दरें बढ़ने का भारत में भी दिखेगा असर… रुपया, सोना और शेयर बाजार होगा प्रभावित

    US में ब्याज दरें बढ़ने का भारत में भी दिखेगा असर… रुपया, सोना और शेयर बाजार होगा प्रभावित


    नई दिल्ली।
    करीब तीन साल के अंतराल के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (American Central bank Federal Reserve) ने ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे ब्याज दरें (Interest rates) 3.75 से 4% तक पहुंच गई हैं। फेडरल रिजर्व के इस रुख के बाद दुनियाभर के बाजारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसका सबसे तगड़ा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं, खासकर भारत (India) पर बिल्कुल साफ दिखेगा।

    अमेरिकी दरें बढ़ने से डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके दबाव में रुपया कमजोर होकर 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। रुपये की इस कमजोरी से आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा है।


    विदेशी निवेशकों की निकासी

    अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से वैश्विक निवेशक सुरक्षित अमेरिकी संपत्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और तेज हो सकती है। इस साल अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से 2.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। इस फैसले से सोने की चमक पर भी अल्पकालिक दबाव के आसार हैं। 


    आपकी जेब पर क्या होगा असर?

    बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसके चलते वे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे। जिन लोगों के लोन फ्लोटिंग रेट पर हैं, उनकी मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता के पास खर्च करने योग्य आय कम हो जाएगी। कर्ज लेने वालों के लिए जहां यह बुरी खबर होगी, वहीं बचत करने वाले सीनियर सिटीजन और निवेशकों को बैंक एफडी पर पहले से बेहतर ब्याज मिलना शुरू हो जाएगा।


    क्या आरबीआई बढ़ाएगा ब्याज दरें?

    जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी नीतिगत दरों में बदलाव करता है, तो आरबीआई ब्याज दर के अंतर, पूंजी प्रवाह और मुद्रा बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर करीब से नजर रखता है। हालांकि, आरबीआई के नीतिगत फैसले घरेलू महंगाई, विकास और अन्य आर्थिक स्थितियों से भी तय होते हैं। घरेलू मुद्रास्फीति का दबाव बना हुआ है, ऐसे में आरबीआई को पूंजी की निकासी और मुद्रा की स्थिरता को लेकर अतिरिक्त बातों पर विचार करना पड़ सकता है।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेस का मानना है कि देश में महंगाई के दबाव को देखते हुए अक्तूबर में होने वाली समीक्षा बैठक में आरबीआई 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। एचडीएफसी बैंक का मानना है कि आरबीआई दिसंबर तक इंतजार कर सकता है ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि महंगाई का दबाव कितना व्यापक और टिकाऊ है।

  • भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी

    भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी


    नई दिल्ली।
    अल नीनो (El Niño) ने दस्तक दे दी है। अब भारत (India) में भी इसका असर दिखने लगा है। यहां अल नीनो ने मौसम को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम ने फसलों पर असर डाला और फसलें अब आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। चीनी (Sugar) के बाद अंडे और चिकन के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस तरह गन्ने का उत्पादन गिरा है, अगर उसी तरह मक्के का उत्पादन भी घटा तो इन चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। चावल और सोयाबीन जैसी फसलें भी संकट के केंद्र में हैं।

    गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर और अनियमित रहता है। साथ ही ज्यादा गर्मी रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार घट सकती है। इस बार मौसम विज्ञानियों ने सदी के सबसे ताकतवर अल नीनो की दस्तक की चेतावनी दी है। भारत में इसका असर दिखना शुरू हो गया है और साल के अंत तक इसके पीक पर पहुंचने की संभावना है।


    चीनी हुई कड़वी

    हाल ही में चीनी की कीमतें सालाना आधार पर 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसकी वजह पिछले साल ज्यादा बारिश और फफूंद के कारण गन्ने की पैदावार घटना है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और निर्यात के कारण भी चीनी के दाम बढ़े हैं। त्योहार सीजन से पहले चीनी 49 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि अब दाम स्थिर हैं।


    मक्का बिगाड़ेगा बजट

    इस साल मक्का उत्पादन भी कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके दाम में पहले ही करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। अगर पैदावार कम हुई तो पशु आहार और महंगा होगा। इसके महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंडे और चिकन के दाम पर पड़ेगा। बारिश की कमी से 2026-27 में गन्ना उत्पादन कम रह सकता है। चीनी की मांग को देखते हुए अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन कम किया जाएगा। ऐसे में एथेनॉल मक्के से बनेगा। मगर इस साल मक्का उत्पादन भी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इसके दाम बढ़ेंगे।


    पशु आहार भी महंगा

    भारत में 2025 में पोल्ट्री उद्योग 2.6 लाख करोड़ रुपये का था। मक्का, सोयाबीन खली महंगे होने से पोल्ट्री की लागत बढ़ेगी, क्योंकि ये प्रमुख पशु-मुर्गी आहार हैं। दरअसल देश में 25 फीसदी एथेनॉल गन्ने से बनता है, बाकी अनाज खासकर मक्का से बनाया जाता है। बीती एक अप्रैल से ई-20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई। इससे चीनी उत्पादन घटने के बावजूद 2025-26 में 30 लाख टन से ज्यादा गन्ने से एथेनॉल बनाया गया।

  • अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा


    नई दिल्ली। सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कमोडिटी मार्केट से लेकर सर्राफा बाजार तक दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। MCX पर दो दिनों में चांदी 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है, जबकि सोना भी 2 हजार रुपए से अधिक सस्ता हो गया है। शुक्रवार को भी दोनों के भाव गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

    आज सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ?
    MCX पर शुक्रवार को सोने की कीमत करीब 1,200 रुपए गिरकर 1,50,695 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई। वहीं चांदी करीब 2,600 रुपए टूटकर 2,30,270 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी सोने-चांदी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत 2 हजार रुपए से ज्यादा और चांदी की कीमत 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी दबाव
    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दिया। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड 1.32% गिरकर 4,401.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत 5.45% की गिरावट के साथ 64.908 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों से बढ़ा दबाव
    सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका से आए महंगाई के मजबूत आंकड़ों को माना जा रहा है। इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दरों में बढ़ोतरी की संभावना 80% तक पहुंच गई है।

    ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद से सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा ऊंचे स्तरों से मुनाफावसूली ने भी कीमतों में गिरावट को तेज किया है।

    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी असर
    दूसरी ओर, जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसके चलते डॉलर भी मजबूत हो रहा है। Brent Crude Oil 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। मजबूत डॉलर और तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी सोने-चांदी के भाव पर देखने को मिल रहा है।

    नोट: सोने और चांदी में निवेश करने से पहले बाजार की मौजूदा स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।

  • दुनिया के 64 देशों में आबादी का ग्राफ नीचे, चीन-जापान से लेकर यूरोप तक असर, भारत के लिए भी बड़ा संकेत

    दुनिया के 64 देशों में आबादी का ग्राफ नीचे, चीन-जापान से लेकर यूरोप तक असर, भारत के लिए भी बड़ा संकेत


    नई दिल्ली। कभी बढ़ती आबादी को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था। आशंका थी कि लगातार बढ़ते इंसानों के दबाव में धरती के संसाधन कम पड़ जाएंगे। लेकिन अब जनसंख्या को लेकर तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया के 64 देश और क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आबादी अपने उच्चतम स्तर यानी ‘पीक पॉपुलेशन’ को पार कर चुकी है और अब लगातार घट रही है। यह बदलाव किसी महामारी, युद्ध या प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली, परिवार और बच्चों को लेकर बदलती सोच का परिणाम है।

    इन 64 देशों में केवल छोटे या संकटग्रस्त देश ही नहीं हैं। चीन जैसी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था भी इस बदलाव का सामना कर रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला चीन अपने जनसंख्या शिखर को पार कर चुका है और अब वहां आबादी हर साल कम हो रही है। दक्षिण कोरिया में फर्टिलिटी रेट करीब 0.72 रह गई है। मौजूदा रुझान जारी रहा तो इस सदी के अंत तक उसकी आबादी आधे से भी कम रह सकती है। जापान और थाईलैंड भी इसी दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।

    कौन-कौन से देश आबादी के शिखर से आगे निकल चुके?

    महाद्वीपों के हिसाब से देखें तो पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में चीन, हांगकांग, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड इस चरण में पहुंच चुके हैं।

    यूरोप में इटली, जर्मनी, स्पेन, पोलैंड, यूक्रेन, रूस और ऑस्ट्रिया की आबादी अपने उच्चतम स्तर को पार कर चुकी है। कैरिबियन और लैटिन अमेरिका में क्यूबा, प्यूर्टो रिको, जमैका, उरुग्वे, डोमिनिका, मार्टिनिक, गुआदेलूप, कुराकाओ, मोंटसेराट, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट मार्टिन, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडींस, यूएस वर्जिन आइलैंड्स और फॉकलैंड आइलैंड्स जैसे क्षेत्र भी इस सूची में शामिल हैं।

    यूरोप और जापान इस बदलाव को काफी पहले महसूस करना शुरू कर चुके थे। जापान में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या का असर बाजार तक में दिखाई देता है। वहां बच्चों के खिलौनों और डायपर की तुलना में बुजुर्गों के डायपर की बिक्री अधिक हो गई है। बच्चों की संख्या घटने से हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं। पोलैंड, रोमानिया और बुल्गारिया जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों में कम जन्मदर के साथ युवाओं का दूसरे देशों की ओर पलायन भी आबादी घटने की बड़ी वजह है।

    2.1 बच्चे भी नहीं हो रहे पैदा

    किसी देश की आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों की जरूरत मानी जाती है। इसे ‘रिप्लेसमेंट रेट’ कहा जाता है। लेकिन दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी ऐसे देशों में रह रही है, जहां प्रजनन दर इस स्तर से काफी नीचे जा चुकी है।

    इसके पीछे आर्थिक और सामाजिक दोनों कारण हैं। महानगरों में घर, बच्चों की परवरिश, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ता खर्च परिवारों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है। कई दंपती एक से ज्यादा बच्चे की जिम्मेदारी उठाने से बच रहे हैं। दूसरी ओर महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। करियर को प्राथमिकता देना, देर से शादी करना या बच्चे न पैदा करने का फैसला अब पहले की तुलना में अधिक स्वीकार्य हो रहा है। इन सामाजिक बदलावों का सीधा असर जनसंख्या के आंकड़ों पर पड़ रहा है।

    बाकी दुनिया के लिए खतरे की घंटी

    आज जिन देशों में आबादी बढ़ रही है, उनके लिए यह बदलाव भविष्य का संकेत है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2050 का दशक आते-आते ब्राजील, मैक्सिको और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देश भी अपने जनसंख्या शिखर के करीब पहुंच जाएंगे।

    भारत के लिए यह मोड़ 2060 के दशक में आने का अनुमान है। वर्तमान में दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत उस दशक में करीब 170 करोड़ की आबादी के साथ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है। इसके बाद यहां भी आबादी घटने का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूरी दुनिया के स्तर पर जनसंख्या का शिखर करीब 2084 में दिखाई दे सकता है। तब वैश्विक आबादी लगभग 10.3 अरब तक पहुंचकर अपने उच्चतम स्तर पर होगी और इसके बाद मानव इतिहास में पहली बार दुनिया की कुल आबादी का ग्राफ लगातार नीचे जाने लगेगा।

    अमेरिका की आबादी क्यों नहीं घट रही?

    कम जन्मदर के बावजूद अमेरिका फिलहाल इस संकट से उसी तरह प्रभावित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक इस सदी के अंत तक भी अमेरिका अपनी आबादी के शिखर पर नहीं पहुंचेगा। इसकी बड़ी वजह इमिग्रेशन है। अमेरिका में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी युवा पहुंचते हैं और वहां बसते हैं। इससे कम जन्मदर के कारण पैदा हुई आबादी की कमी काफी हद तक पूरी हो जाती है।

    कम लोग, लेकिन ज्यादा बुजुर्ग

    आबादी घटने का सबसे बड़ा असर रोजगार बाजार पर पड़ेगा। कामकाजी उम्र की आबादी कम होने पर कंपनियों को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।

    दूसरी चुनौती पेंशन और हेल्थकेयर की होगी। टैक्स देने वाले युवा कम होंगे, जबकि पेंशन और इलाज पर निर्भर बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी। इसका मतलब सरकारों के राजस्व पर दबाव और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता खर्च होगा।

    इमिग्रेशन बनेगा आर्थिक ताकत का आधार

    भविष्य में वे देश ज्यादा मजबूत स्थिति में रह सकते हैं, जो विदेशी युवाओं और कुशल कामगारों को अपने यहां आने और बसने के अवसर देंगे। इसके उलट जिन देशों की सीमाएं प्रवासियों के लिए बंद रहेंगी, उन्हें कामकाजी आबादी की कमी और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

    भारत के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड का सीमित समय

    भारत और अफ्रीकी देशों के लिए यह बदलाव खास संदेश लेकर आया है। युवा आबादी इन देशों की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इस ताकत का फायदा हमेशा नहीं रहेगा। अगले 20-30 साल डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने के लिहाज से बेहद अहम हैं।

    अगर इस अवधि में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जरूरी स्किल और पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाया, तो आबादी घटने का दौर शुरू होने से पहले देश अपेक्षित आर्थिक समृद्धि हासिल नहीं कर पाएंगे।

    दुनिया के 64 देशों में खाली होते स्कूल, बुजुर्ग होती आबादी और बदलती शहरों की तस्वीर बता रही है कि 21वीं सदी की चुनौती अब केवल जनसंख्या को नियंत्रित करना नहीं है। असली चुनौती ऐसी दुनिया के लिए तैयारी करना है, जहां इंसान कम और उम्रदराज आबादी ज्यादा होगी। जिन देशों की नीतियां इस बदलाव के मुताबिक समय रहते बदल जाएंगी, उनके लिए घटती आबादी संकट के बजाय नई आर्थिक ताकत बन सकती है।

  • साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?

    साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?


    नई दिल्ली।
    आज 28 अगस्त को साल का आखिरी व दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लग चुका है. जिस चंद्र ग्रहण की हम बात कर रहे हैं, वह सामान्य या पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है. यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse) है, जिसे मालिन्य चंद्र ग्रहण भी कहा जाता है. भारतीय समय के अनुसार, इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह उपछाया चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, जबकि कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं. ऐसे में ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण में शनि और राहु का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    मेष राशि

    मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल माना जा रहा है. करियर में बड़ा अवसर मिल सकता है और लंबे समय से सफलता के लिए प्रयास कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं और यह बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है. हालांकि अगले 15 दिन से एक महीने के दौरान यात्राओं में सावधानी रखें. किसी भी यात्रा में लापरवाही न करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें. ऐसा करना आपके लिए शुभ माना जाता है.


    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के लोगों के रुके हुए काम इस दौरान पूरे होने की संभावना है. लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान मिल सकता है. अगर कोई विवाद, झगड़ा या कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें भी राहत मिलने की संभावना है. करियर के मामले में स्थिति सामान्य से बेहतर रह सकती है, लेकिन कोई बड़ा जोखिम लेने से बचें. अपने महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करें.

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों को अगले 15 दिन से एक महीने तक विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है. स्वास्थ्य का ध्यान रखें और बेवजह के विवाद या कानूनी मामलों से बचने का प्रयास करें. संतान को लेकर चिंता बढ़ सकती है. संतान के स्वास्थ्य या करियर को लेकर परेशानियां सामने आ सकती हैं. ऐसे में उनसे बातचीत करें और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें. यात्राओं में विशेष सावधानी रखें. अगर बहुत जरूरी न हो तो लंबी यात्राओं से बचना बेहतर होगा.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    कर्क राशि

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. करियर में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है. नौकरी और व्यापार को लेकर सतर्क रहें और किसी तरह की लापरवाही न करें. स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. चोट, दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचने के लिए सावधानी जरूरी है. परिवार की महिलाओं, विशेष रूप से माता, पत्नी, बेटी या बहन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें. अगले एक महीने तक काम का उतना ही दबाव लें, जितना आप आसानी से संभाल सकें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों को स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. पाचन और हड्डियों से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें. चोट या फ्रैक्चर जैसी स्थिति से बचने के लिए सावधानी रखें. करियर में किसी तरह का जोखिम न लें. नौकरीपेशा लोग विशेष रूप से अपने काम में लापरवाही से बचें. पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में भी तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.


    कन्या राशि

    कन्या राशि वालों को स्वास्थ्य के मामले में सावधानी रखनी चाहिए. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्क रहें. कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों का ध्यान रखें. लिखापढ़ी, दस्तावेजों और पैसे के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतें. किसी भी कागज पर बिना जांचे हस्ताक्षर न करें. पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में भी सोच-समझकर व्यवहार करें, क्योंकि छोटी गलतफहमी विवाद का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    तुला राशि

    तुला राशि वालों को धन के मामले में सावधान रहने की जरूरत है. अचानक खर्च या आर्थिक नुकसान की स्थिति बन सकती है. पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी न करें. स्वास्थ्य के मामले में भी सावधान रहें. पाचन और पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है. करियर में कोई लापरवाही न करें और नौकरीपेशा लोग अपने काम को गंभीरता से लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के लोगों के पारिवारिक जीवन में कुछ परेशानियां आ सकती हैं. माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य करीबी लोगों के साथ मतभेद हो सकते हैं. बेवजह का तनाव और विवाद बढ़ने की संभावना है. धन और संपत्ति के मामले में अगले एक महीने तक सावधानी रखें. प्रॉपर्टी खरीदने, बेचने या बड़ा निवेश करने में जल्दबाजी न करें. रिश्तों और मित्रता में भी धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल परिणाम दे सकता है. करियर में लंबे समय से चली आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं. रुका हुआ काम पूरा होने और करियर में सफलता मिलने की संभावना है. आर्थिक मामलों में भी सुधार देखने को मिल सकता है. फंसा हुआ या लंबे समय से रुका पैसा मिलने की संभावना है. हालांकि भाई-बहन के साथ संबंधों का ध्यान रखें और उनके स्वास्थ्य को लेकर भी सजग रहें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें.


    मकर राशि

    मकर राशि वालों को स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आंख, कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों से सावधान रहें. नौकरी या व्यापार जैसा चल रहा है, उसे फिलहाल स्थिरता से चलने दें. करियर में कोई बड़ा जोखिम न लें. नई नौकरी, स्थान परिवर्तन, प्रॉपर्टी खरीदने या अन्य बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.

    कुंभ राशि

    यह ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है, इसलिए कुंभ राशि वालों को विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत बताई जा रही है. स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें. रिश्तों और संबंधों में भी सतर्क रहें. गुस्से या विवाद की वजह से कोई करीबी रिश्ता प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखें. महत्वपूर्ण कामों को टालने से बचें, क्योंकि देरी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    मीन राशि

    मीन राशि वालों के मन पर इस ग्रहण का असर पड़ने की बात कही जा रही है. मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी बढ़ सकती है. बेवजह की बातों को लेकर ज्यादा सोचने से बचें. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं. ऐसे में जीवन या करियर से जुड़े बदलाव सामने आ सकते हैं. भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत रखें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. यात्रा और दुर्घटना के मामलों में भी सावधानी बरतें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East tensions) के बाद तेल कंपनियों ने मई में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे. जून के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में जब कमी आई तो फ्यूल प्राइस कम होने का भरोसा बढ़ गया था. लेकिन खाड़ी में तनाव फिर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद टूटने लगी है. दरअसल, इस वक्त दुनियाभर में चल रहे तनाव का असर भारत के ईंधन और खाने-पीने के सामानों पर सबसे ज्यादा नजर आ रहा है.


    कच्चा तेल में फिर तेजी
    अमेरिका-ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ने से कच्चे तेल में तेजी आ रही है. इससे ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब और WTI क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. आशंका है कि क्रूड जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच सकता है. तेल की कीमतों में ये तेजी ऐसे समय आई है, जब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद लगाई जा रही थी. लेकिन हालात फिलहाल राहत वाले नहीं दिख रहे क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी दूरी ने एनर्जी मार्केट की बेचैनी बढ़ा दी है।


    भारत पर ज्यादा असर

    भारत के लिए हालात ज्यादा गंभीर हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है. लंबे समय तक ऊंचे दाम रहने पर ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    तेल के साथ-साथ खाने की थाली से जुड़ी एक और चिंता भी सिर उठाने लगी है. गेहूं की कीमतों में तेजी ने आटा और ब्रेड जैसे जरूरी सामान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव ने काला सागर क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मंडियों तक दिखाई देने लगा है. वैश्विक बाजार में गेहूं करीब 6.7 डॉलर प्रति बुशेल के स्तर पर पहुंच गया है. देश की प्रमुख मंडियों में एक महीने में गेहूं के भाव करीब 4 फीसदी तक बढ़ गए हैं. जाहिर है कि गेहूं की बढ़ती कीमतें आटा, ब्रेड और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ा सकती हैं।


    प्याज भी महंगा
    रसोई की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, प्याज भी लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगा है. प्याज का औसत खुदरा भाव 37 रुपये 20 पैसे प्रति किलो पर पहुंच गया है जबकि एक महीने पहले कीमत 34 रुपये 53 पैसे प्रति किलो थी. एक साल पहले प्याज का भाव 26 रुपये 86 पैसे प्रति किलो था. इस तेजी की वजह खरीफ प्याज की आवक में देरी है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

    तेल से लेकर गेहूं और प्याज तक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पैदा हुआ तनाव भारतीय ग्राहकों की जेब तक पहुंच रहा है. ऐसे में सबकी नजर दो मोर्चों पर टिकी हैं. पहला है कि मिडिल ईस्ट में तेल की दिशा क्या रहती है और दूसरा ये कि काला सागर क्षेत्र में सप्लाई का संकट कितना गहराता है क्योंकि इन दोनों का असर सीधे आपकी गाड़ी के खर्च और रसोई के बजट पर पड़ सकता है।