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  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन शनिवार को मॉक महाभियोग आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के करीब 21 राजनीतिक दलों के नेता शामिल होंगे। आयोजन दोपहर 3:30 बजे राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर किया जाएगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस कार्यक्रम को चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित किया जाना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे टालना पड़ा। अब इसे शनिवार दोपहर 3:30 बजे आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और विभिन्न वामपंथी दलों के नेता हिस्सा लेंगे। राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी दलों के प्रतिनिधि निर्धारित समय के भीतर अपनी बात रखेंगे। आयोजन में करीब 30 नेताओं के संबोधन की संभावना जताई गई है। कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी है। इसमें प्रस्ताव पेश करने, नेताओं के भाषण और चर्चा के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, यह पूरी कवायद प्रतीकात्मक होगी। इसे वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं माना जाएगा।

    इस आयोजन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को वोट चोरी के आरोपों पर संसद में बहस करने की चुनौती दी है। लखनऊ में भाजपा की राज्य कार्यसमिति की बैठक के दौरान शाह ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद अंपायर को दोष देने के बजाय मेहनत करनी चाहिए। शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

    मॉक महाभियोग के बाद INDIA गठबंधन अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी आयोजित करेगा। इस रैली में मुख्य रूप से वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का मुद्दा उठाया जाएगा। विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। मॉक महाभियोग और प्रस्तावित रैली को गठबंधन के साझा अभियान के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखने और इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद


    नई दिल्ली।
    कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची (Voter List) के SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर एकतरफा फैसला लेने के आरोपों के बाद राज्यसभा में उनके खिलाफ लंबित महाभियोग का मुद्दा फिर गरमा गया है। विपक्षी दलों ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। विपक्ष के 73 सदस्यों ने गत 24 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंपा था।

    कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष की कई अन्य पार्टियों की तरफ से दिए गए महाभियोग के नोटिस में सीईसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप शामिल हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना, चुनाव आचार संहिता के क्रियान्वयन में अनियमिता, दस्तावेजी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करना सहित नौ आरोप लगाए गए हैं।


    नोटिस लंबित, पर खारिज नहीं

    एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू (Sukhbir Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) के पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरों के बाद विपक्ष ने फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के पास 24 अप्रैल से यह नोटिस लंबित है, इसे खारिज नहीं किया गया है।

    माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे।


    SIR पर बड़ा विवाद

    SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के मीडिया दावे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका इस्तीफा मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और एसआईआर तुरंत रोकने की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा, आरएसएस, निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने इसे किया है, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है।

    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही अधिकारियों की तरफ से आपत्ति दर्ज की जा रही है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि आयोग किसके हित में काम कर रहा है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले चुनाव आयोग को चला रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को तत्काल रद्द किए जाने की मांग की।


    चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी

    चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों से जुड़े विवाद पर स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का हर अधिकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को अधिकृत है। आयोग ने एक बयान में कहा कि दस महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों, अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाता है।

    आयोग के मुताबिक ईसीआई नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डाटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे अधिकारी निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं।


    सीईसी-ईसी नियुक्ति का मुद्दा संविधान पीठ सुनेगी

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया। दो जजों की पीठ का बंटा फैसला आने पर यह कदम उठाया गया।

  • फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला

    फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला



    नई दिल्ली। फिलीपींस की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश की उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के खिलाफ प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने भारी बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब यह मामला सीनेट में जाएगा, जहां उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।

    क्या है पूरा मामला?
    सारा दुतेर्ते पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, संपत्ति के गलत स्रोत और राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस तथा उनके परिवार को कथित धमकी देने जैसे आरोप शामिल हैं। इन आरोपों ने फिलीपींस की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच टकराव गहरा गया है।

    प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान में 255 सांसदों ने महाभियोग के पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल 26 सांसदों ने विरोध किया। 9 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहे। यह स्पष्ट करता है कि निचले सदन में इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है।

    किन आरोपों में घिरी हैं उपराष्ट्रपति?
    सारा दुतेर्ते पर आरोप है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय के गोपनीय फंड (Confidential Funds) का गलत इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन पर वित्तीय पारदर्शिता न रखने और संदिग्ध संपत्ति अर्जित करने के भी आरोप हैं।

    सबसे गंभीर आरोपों में एक यह भी है कि उन्होंने एक सार्वजनिक बयान में कथित तौर पर राष्ट्रपति मार्कोस, उनकी पत्नी और संसद अध्यक्ष के खिलाफ हिंसक धमकी जैसी बात कही थी। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया था।

    अब आगे क्या होगा?
    महाभियोग प्रस्ताव अब सीनेट को भेजा जाएगा। सीनेट इस मामले में ट्रिब्यूनल के रूप में कार्य करेगी और आरोपों की गहराई से जांच करेगी। यदि सीनेट उन्हें दोषी ठहराती है, तो सारा दुतेर्ते को अपने पद से हटाया जा सकता है और राजनीतिक प्रतिबंध भी लग सकते हैं।

    सारा दुतेर्ते फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी हैं और देश की राजनीति में एक मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। उनके खिलाफ पहले भी महाभियोग लाने की कोशिश हुई थी, लेकिन संवैधानिक कारणों से वह मामला आगे नहीं बढ़ सका था।

    राजनीतिक तनाव क्यों बढ़ा?
    यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति मार्कोस और दुतेर्ते परिवार के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद रहे हैं। महाभियोग के बाद यह टकराव और तेज हो गया है, जिससे देश की राजनीति में अस्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
    सारा दुतेर्ते के खिलाफ महाभियोग फिलीपींस की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सीनेट ट्रायल पर हैं, जहां तय होगा कि वे पद पर बनी रहेंगी या उन्हें हटना पड़ेगा। यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।