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  • जब कीमतें आसमान थी,,, सोने ने तोड़ डाले आयात के सभी रिकॉर्ड, व्यापार घाटा भी बढ़ा

    जब कीमतें आसमान थी,,, सोने ने तोड़ डाले आयात के सभी रिकॉर्ड, व्यापार घाटा भी बढ़ा


    नई दिल्ली।
    जनवरी में जब सोने-चांदी की कीमतें (Gold and Silver Prices) आसमान पर थी सोने के आयात (Gold Import) ने तो सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जो पिछले साल जनवरी के 2.66 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार 350 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, इसने भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficits) पर बड़ा इंपैक्ट डाला। भारत का व्यापार घाटा जनवरी 2026 में बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया है। यह आंकड़ा दिसंबर में दर्ज 24 अरब डॉलर से कहीं अधिक है।


    सोने की चमक ने बढ़ाई व्यापार घाटे की टेंशन

    सोने का आयात भारत के व्यापार घाटे में उतार-चढ़ाव की एक अहम वजह बनकर उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से साफ होता है कि बढ़ती सोने की कीमतों ने आयात बिल को काफी प्रभावित किया है। पिछले छह वर्षों में सोने के आयात मूल्य में 76 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 32.9 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 58.0 अरब डॉलर हो गया।


    आयात की मात्रा घटी, बिल बढ़ा

    हैरानी की बात यह है कि इस दौरान आयात की मात्रा में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 982.7 टन से घटकर 757.1 टन रह गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहां कीमतों में बढ़ोतरी आयात बिल बढ़ाने की मुख्य वजह है, न कि ज्यादा खपत।

    चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान ही सोने का आयात बिल 49.39 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि इस दौरान सिर्फ 474.99 टन सोना आयात किया गया। अप्रैल-जनवरी की अवधि में यह आंकड़ा 61.46 अरब डॉलर हो गया। नवंबर में सोने के आयात के आंकड़ों में भी भारी संशोधन देखने को मिला था, जो शुरुआती 14.8 अरब डॉलर से घटाकर 9.84 अरब डॉलर कर दिया गया था, जो इसकी अस्थिरता को रेखांकित करता है।


    चांदी के आयात में भी जोरदार उछाल

    सोने के साथ-साथ चांदी के आयात ने भी रफ्तार पकड़ी है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान चांदी के आयात मूल्य में 128.95 प्रतिशत का उछाल आया है। यह 3.39 अरब डॉलर से बढ़कर 7.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसकी वजह आयात की मात्रा में 56.07 प्रतिशत और कीमतों में 46.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है।


    अमेरिका और चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते

    टैरिफ के दबाव के बावजूद, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात स्थल बना हुआ है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान अमेरिका को निर्यात लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 72.46 अरब डॉलर रहा। हालांकि, दिसंबर की तुलना में जनवरी में अमेरिका को निर्यात में 4.5 प्रतिशत की गिरावट जरूर आई है। वहीं, चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। अप्रैल-जनवरी के दौरान चीन से आयात 13 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। सकारात्मक पहलू यह है कि इसी अवधि में चीन को निर्यात में भी 38 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 15.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

  • अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी

    अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी


    वाशिंगटन।
    गौतम अडानी समूह (Gautam Adani Group) की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) (Adani Enterprises Limited (AEL) ने मंगलवार को कहा कि एक अमेरिकी एजेंसी (American agency) ने प्रतिबंधित इकाइयों के साथ लेनदेन की गैर-आपराधिक जांच के तहत ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कथित आयात को लेकर कंपनी से जानकारी मांगी है।


    क्या कहा अडानी एंटरप्राइजेज ने?

    अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को बताया कि उसे चार फरवरी को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से सूचना का अनुरोध मिला है। यह अनुरोध जून, 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के संबंध में हुई स्वैच्छिक चर्चा के बाद आया है। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अडानी से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए शिपिंग मार्गों का उपयोग करके भारत में ईरानी तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया था। अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा-कंपनी स्वेच्छा से विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के साथ सहयोग कर रही है और मांगी गई जानकारी देगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्राधिकरण से प्राप्त संचार में ‘किसी भी प्रकार के उल्लंघन या गैर-अनुपालन का कोई निष्कर्ष शामिल नहीं है।


    पिछले साल आई थी रिपोर्ट

    पिछले साल जून में आई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अडानी समूह की कंपनियों ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात किया था। अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि नीतिगत रूप से अडानी समूह अपने किसी भी बंदरगाह पर ईरान के किसी भी माल का प्रबंधन नहीं करता है। इसमें ईरान से आने वाली कोई भी खेप या ईरानी ध्वज के तहत चलने वाले जहाज शामिल हैं। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी जहाज का प्रबंधन या सुविधा प्रदान नहीं करता है, जिनके मालिक ईरानी हों।