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  • सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर

    सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर


    नई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लैटिनम खरीदने वालों के लिए कीमती धातुओं के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को आयात के समय मिलने वाली अग्रिम IGST छूट समाप्त कर दी है। अब कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का भुगतान करना होगा। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही इस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बदलाव की जानकारी दी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी सीधे 3% महंगा हो जाएगा। कीमतों पर वास्तविक असर आयात लागत और कारोबारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    पहले क्या था नियम, अब क्या बदला?

    साल 2017 में सरकार ने सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम IGST भुगतान से छूट दी थी। बाद में इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल किया गया। इसके तहत बैंक और अधिकृत एजेंसियां आयात के समय IGST का अग्रिम भुगतान किए बिना सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगा सकती थीं।

    अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद आयात करने वाले बैंकों और संबंधित एजेंसियों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% IGST का भुगतान करना होगा। यानी आयात के वक्त ही टैक्स चुकाने के लिए पर्याप्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

    राजस्व सचिव के अनुसार, बैंक 1 अप्रैल 2026 से इस व्यवस्था के तहत टैक्स चुका रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इसकी जानकारी दी।

    सरकार ने क्यों खत्म की टैक्स छूट?

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से होने वाले कीमती धातुओं के आयात में टैक्स व्यवस्था को समान बनाना है। पहले बैंकों के माध्यम से आयात करने वालों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में विशेष सुविधा मिलती थी। अब इस अंतर को समाप्त करने की कोशिश की गई है।

    गुजरात की GIFT सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार चाहती है कि टैक्स नियमों के कारण किसी एक आयात माध्यम को अनुचित लाभ न मिले और सभी माध्यमों के लिए व्यवस्था अधिक समान हो।

    बैंकों और आयातकों पर क्या पड़ेगा असर?

    इस बदलाव का सबसे प्रत्यक्ष असर बैंकों और आयातकों की नकदी व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले अग्रिम IGST भुगतान से मिलने वाली राहत के कारण आयात के समय उतनी रकम की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। अब टैक्स का भुगतान कस्टम्स क्लीयरेंस के दौरान करना होगा।

    हालांकि, पात्र कारोबारियों को लागू नियमों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से चुकाए गए टैक्स का लाभ मिल सकता है। लेकिन टैक्स पहले जमा करना होगा और उसका समायोजन बाद में हो सकता है। इससे कारोबारियों की कुछ रकम अस्थायी रूप से फंस सकती है।

    बड़े पैमाने पर सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। यदि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ता है, तो उनकी वित्तीय लागत भी बढ़ सकती है। इस लागत का कितना हिस्सा आगे ग्राहकों तक पहुंचेगा, यह कारोबारियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

    क्या ग्राहकों को सोना-चांदी 3% महंगा मिलेगा?

    नहीं, केवल अग्रिम IGST छूट खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सोना-चांदी की खुदरा कीमत सीधे 3% बढ़ जाएगी। यह बदलाव आयात के समय टैक्स भुगतान की व्यवस्था से जुड़ा है। अंतिम कीमत कई दूसरे कारकों से भी तय होती है।

    सोने-चांदी के दाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात पर लागू अन्य शुल्कों और घरेलू मांग का असर पड़ता है। यदि आयातकों की लागत या वित्तीय खर्च बढ़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा बाजार की कीमतों में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यह अपने आप में तय नहीं है कि पूरी अतिरिक्त लागत ग्राहकों से ही वसूली जाएगी।

    इसलिए खरीदारों को कीमतों में संभावित बदलाव का आकलन करते समय केवल इस टैक्स संबंधी फैसले को आधार नहीं बनाना चाहिए।

    त्योहार और शादी के सीजन में क्यों अहम है बदलाव?

    भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के दौरान सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत में होने वाला बदलाव घरेलू बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

    कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा खर्च और व्यापार घाटे से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात के अलग-अलग माध्यमों पर समान टैक्स व्यवस्था लागू करने का कदम कारोबारियों की लागत और बाजार की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है।

    आम खरीदार क्या ध्यान रखें?

    सोना या चांदी खरीदने से पहले ग्राहक इन बातों पर ध्यान दें:

    बाजार भाव: खरीदारी के दिन सोने या चांदी का ताजा भाव जांचें।
    मेकिंग चार्ज: आभूषणों पर लगने वाले मेकिंग चार्ज की जानकारी लें।
    लागू टैक्स: बिल में दर्ज टैक्स और अन्य शुल्कों की जांच करें।
    अंतिम कीमत: केवल 3% IGST से जुड़ी खबर के आधार पर कीमतों में समान अनुपात में बढ़ोतरी मानकर न चलें।

    कुल मिलाकर, अग्रिम IGST छूट समाप्त होने से बैंकों और आयातकों की नकदी जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन आम खरीदारों के लिए सोना-चांदी कितना महंगा होगा, यह बाजार की परिस्थितियों और कारोबारियों की प्रतिक्रिया से तय होगा।

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को कस्टम अधिकारियों की ओर से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़ा कारण बताओ नोटिस मिला है। यह नोटिस कुछ आयातित सामानों के मूल्यांकन योग्य मूल्य में रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं करने के आरोप से संबंधित है। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में साझा की है।

    मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी डीआरआई की जांच के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ आयातित सामानों का मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करते समय संबंधित रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं किया गया। इसी आधार पर कस्टम ड्यूटी की अतिरिक्त राशि की मांग की गई है।

    22 सितंबर की तारीख वाला यह नोटिस नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट स्थित कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से जारी किया गया था। कंपनी को यह नोटिस 24 सितंबर को प्राप्त हुआ। नोटिस में 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की वसूली से जुड़ा मामला उठाया गया है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात से संबंधित कस्टम मूल्यांकन को लेकर जांच की गई है। रॉयल्टी भुगतान को आयातित सामान के मूल्यांकन योग्य मूल्य में शामिल किए जाने के मुद्दे पर विभाग की ओर से आपत्ति दर्ज की गई है। इसी आधार पर कंपनी से जवाब मांगा गया है।

    इसके अलावा एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग से जुड़े ओएलईडी ग्लास स्क्रीन के आयात पर भी जांच चल रही है। यह जांच 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावे को लेकर की जा रही है। जांच का केंद्र यह है कि आयात किए गए ओएलईडी ग्लास स्क्रीन पर किस दर से कस्टम ड्यूटी लागू होनी चाहिए।

    डीआरआई अधिकारियों का मानना है कि 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी की दर सामान्य बाजार में बिकने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पुराने एलसीडी और एलईडी से संबंधित है। ओएलईडी पार्ट्स के मामले में विभाग की ओर से अलग कस्टम ड्यूटी दर लागू होने की बात कही गई है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने ओएलईडी आयात से जुड़े अधिकारियों के लिखित सवालों के जवाब दिए हैं। कंपनी ने अधिकारियों द्वारा आकलन किए गए कस्टम ड्यूटी अंतर की रकम भी स्वेच्छा से जमा कर दी है। हालांकि, कारण बताओ नोटिस अलग से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़े मामले में जारी किया गया है।

    कस्टम ड्यूटी से जुड़े इस मामले के बीच एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत बढ़कर 653 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 513 करोड़ रुपये था।

    अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान कंपनी की आय भी बढ़ी। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6,262 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार, गर्मियों के दौरान मजबूत मांग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी से वित्तीय प्रदर्शन को सहारा मिला।

  • सरकार ने एलपीजी सप्लाई पर दी अपडेट: 60% आयात, 90% होर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, पैनिक बुकिंग से बचें

    सरकार ने एलपीजी सप्लाई पर दी अपडेट: 60% आयात, 90% होर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, पैनिक बुकिंग से बचें



    नई दिल्ली। भारत सरकार ने गुरुवार को देश में गैस और कच्चे तेल की स्थिति को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि देश अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। मंत्रालयों ने जोर देकर कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन रोजाना करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है और पैनिक बुकिंग की वजह से सिलेंडर बुकिंग में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता संतोषजनक है। भारत रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल का उपयोग करता है और दुनिया के चौथे सबसे बड़े रिफाइनर होने के कारण ईंधन की आपूर्ति स्थिर है। 9 मार्च को जारी आदेश के तहत सभी रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है, घरेलू उत्पादन 25% से बढ़कर 28% हो गया है। देशभर में लगभग 1 लाख रिटेल आउटलेट काम कर रहे हैं, जहां कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है।

    शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के 28 जहाज मौजूद हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें से 677 पश्चिमी होर्मुज स्ट्रेट में और 101 पूर्वी हिस्से में तैनात हैं। हाल ही में विदेशी झंडे वाले कुछ जहाजों पर हादसे हुए, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई, चार घायल और एक लापता है। सरकार सभी जहाजों और क्रू की सुरक्षा पर निगरानी रख रही है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास सक्रिय है। भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। दूतावास वीजा सुविधा के साथ अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमा पार करने में भी मदद कर रहा है।

    सरकार ने सप्लाई संकट के दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असुरक्षित होना, जो 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है और ईरान-जंग के कारण बंद हो गया। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% इसी रूट से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से आयात करता है। दूसरा, कतर में LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रुका, जिससे भारत को गैस की सप्लाई घट गई। भारत अपनी जरूरत का करीब 40% LNG कतर से आयात करता है।

    इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने कहा कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार वैकल्पिक कार्गो आयात पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने की योजना बना रहे हैं। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

    सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की प्राथमिकता के आधार पर जरूरतमंदों को सप्लाई सुनिश्चित करें।

    मुख्य बातें:

    भारत अपनी जरूरत का 60% LPG आयात करता है, 90% होर्मुज स्ट्रेट से आता है।

    रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवरी, पैनिक बुकिंग से बचें।

    एलपीजी उत्पादन बढ़कर 28% हुआ।

    ईंधन सप्लाई सुरक्षित, देशभर के पेट्रोल पंप सामान्य काम कर रहे हैं।

    ईरान में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास मदद कर रहा है।

    सप्लाई संकट: होर्मुज स्ट्रेट असुरक्षित, कतर में LNG प्रोडक्शन रुका।

    वैकल्पिक आयात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संकट कम करने की कोशिशें।

  • Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं

    Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं


    नई दिल्ली।
    भारत (India) द्वारा रूस (Russia) से कच्चे तेल के आयात में कटौती (Reduction Imports Crude Oil) की खबरों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा नीति और इससे जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाते रहेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में विदेश सचिव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय, चाहे सरकार द्वारा हों या व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा, राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की वास्तविक खरीद का निर्णय तेल कंपनियाँ बाजार की परिस्थितियों के आधार पर करती हैं।

    विक्रम मिस्री ने कहा कि तेल कंपनियाँ उपलब्धता, जोखिम, लागत और लॉजिस्टिक्स जैसे कई कारकों का आकलन कर निर्णय लेती हैं और वे अपनी आंतरिक जवाबदेही तथा वित्तीय जिम्मेदारियों का पालन करती हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी समय ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों में वित्तीय और लॉजिस्टिक पहलुओं सहित कई जटिल कारक शामिल होते हैं।” विदेश सचिव ने दोहराया कि भारत एक विकासशील देश है और तेल एवं गैस क्षेत्र में शुद्ध आयातक (नेट इम्पोर्टर) है। देश की कुल जरूरतों का लगभग 80–85 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर होने के कारण महँगाई का जोखिम बना रहता है।

    उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
    उन्होंने कहा, “जब आप इतने बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर होते हैं, तो आयात लागत से उत्पन्न महँगाई की चिंता स्वाभाविक है। यही कारण है कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने रूस से कच्चे तेल का आयात कम करने के सवाल पर कहा कि ऊर्जा खरीद के लिए कई स्रोतों को बनाए रखना हमारी रणनीति रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हाल के वर्षों में आई अस्थिरता का उल्लेख करते हुए मिस्री ने कहा कि भारत, अन्य देशों की तरह, स्थिर कीमतों और भरोसेमंद आपूर्ति में साझा रुचि रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत न केवल ऊर्जा का बड़ा उपभोक्ता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में एक स्थिरता प्रदान करने वाला कारक भी है।

    भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं
    उन्होंने कहा कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है और कच्चे तेल का आयात दर्जनों देशों से करता है। बाज़ार की परिस्थितियों के अनुसार आयात स्रोतों का मिश्रण बदलना स्वाभाविक है। विदेश सचिव ने कहा, “हमारी ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार हैं- पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और आपूर्ति की विश्वसनीयता। जितने अधिक विविध हमारे आयात स्रोत होंगे, उतनी ही अधिक हमारी ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होगी।”

  • कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

    कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

    रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

    सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


    तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

    क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

    वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।