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  • जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    नई दिल्ली ।जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मसूद ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, अधिकारियों की नियुक्ति और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने से वह डरने वाले नहीं हैं और छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर के संदर्भ में मसूद ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों और परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालना होनी चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। मसूद ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी की नियुक्ति गैरकानूनी है और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान कोई विस्तृत दस्तावेजी जानकारी नहीं दी।

    विश्वविद्यालय परिसर में कश्मीर से संबंधित नारे लिखे जाने के मामले पर भी कांग्रेस सांसद ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर एक व्यक्ति को पकड़ा गया था और छात्रों ने उसे पकड़ा था। मसूद ने कहा कि परिसर में निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल किया कि जब विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो संबंधित घटना की फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। उनके बयान में सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जानकारी सामने लाने की मांग प्रमुख रही।

    मसूद ने प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति का जिक्र करते हुए प्रशासन के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर ध्यान देना जरूरी था। उनके अनुसार, छात्रों की शिकायतों के बीच प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई से विवाद बढ़ रहा है।

    विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश के लिए दीवार फांदने के सवाल पर भी मसूद ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रास्ते बंद कर दिए गए थे, जिसके कारण अंदर जाने के लिए दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने सवाल किया कि परिसर के चारों ओर रास्ते बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी और लोगों को अपने बच्चों से मिलने से क्यों रोका गया। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था और निर्णयों को लेकर जवाब मांगा।

    जामिया विवाद के अलावा मसूद ने लखनऊ में गठबंधन को लेकर लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ऐसे पोस्टर भाजपा के डर को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पोस्टर किसने लगवाए और उनके लिए धन किसने उपलब्ध कराया। मसूद ने कहा कि गठबंधन मजबूत है और पोस्टरों के जरिए उसमें दरार पैदा नहीं की जा सकती। सीटों के बंटवारे पर भी उचित समय पर फैसला हो जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर मसूद ने खड़गे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि खड़गे ने सही जवाब दिया है और आगे भी इसी तरह जवाब देते रहेंगे। मसूद ने सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने से वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दोहराया कि जामिया के छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए।

  • युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:

    युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रगीत, झंडा फहराने और राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने देशभक्ति से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ और महंगी होती ईएमआई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन पर चर्चा करने की मांग की है।

    कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अचानक इतना जोर देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। मसूद ने कहा कि देश में जब राष्ट्रगीत गाने को लेकर विरोध और कार्रवाई की स्थिति बनी थी, तब बीजेपी के लोग इस तरह सामने नहीं आए थे।

    उन्होंने आजादी के बाद के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लोगों ने लंबे समय तक राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और झंडा फहराने जैसे विषयों को लेकर वह भूमिका नहीं निभाई, जिसका दावा अब किया जा रहा है। मसूद ने कहा कि देश की जनता शिक्षित है और राजनीतिक दलों के पुराने रुख तथा उनके वर्तमान बयानों के बीच अंतर को समझती है।

    मसूद ने यह भी कहा कि आज सूचना तकनीक के दौर में लोगों के पास पुराने घटनाक्रमों और बयानों को जानने के कई साधन मौजूद हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी पुराने तथ्य की जानकारी हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार देशभक्ति से जुड़े इतिहास को किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक रहा है और इसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया था। इसलिए देशभक्ति पर किसी एक संगठन या राजनीतिक विचारधारा का अधिकार नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की मौजूदा राजनीतिक बहस को स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की।

    वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार और बीजेपी नेताओं से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने रोजगार की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने नौकरियों की चुनौती बनी हुई है। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक बहस को उन मुद्दों पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

    रेणुका चौधरी ने बढ़ती महंगाई, टैक्स के बोझ और ईएमआई महंगी होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये की स्थिति में गिरावट का असर लोगों की आर्थिक परिस्थितियों पर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़ी बहस के समानांतर आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई से राहत और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ जैसे विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

    दूसरी ओर, राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बहस केवल राष्ट्रगीत की स्वीकार्यता तक सीमित रहने के बजाय देशभक्ति की राजनीतिक व्याख्या और जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों तक भी फैल सकती है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक अलग से प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक शिकायत मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर लगाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसी की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिल रहे हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संस्था से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोगों का भरोसा न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कायम रहे। उनका कहना था कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए तथा किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने का प्रयास किया, वही अब आस्था की बात कर रहे हैं। इस पर मसूद ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रामलीला लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग सहभागिता करते आए हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परंपरा या आयोजन को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर समझा जाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी धार्मिक आयोजनों के प्रति सम्मान का भाव बना रहना चाहिए।

    इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके अनुसार, यदि किसी राजनीतिक गठबंधन की चर्चा हो रही है तो उसका प्रभाव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह राजनीतिक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी गठबंधन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है और इस पर आए राजनीतिक बयानों के बीच अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और संभावित निष्कर्षों पर बनी हुई है।