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  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग शुरू, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी की एक्सेल यूटिलिटीज

    असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग शुरू, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी की एक्सेल यूटिलिटीज


    नई दिल्ली । देश में टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है, क्योंकि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इनकम टैक्स विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म के लिए एक्सेल आधारित यूटिलिटीज जारी कर दी हैं, जिससे करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने में सुविधा मिलेगी। यह कदम टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

    विभाग के अनुसार, करदाता अब आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए न केवल ऑनलाइन फाइलिंग विकल्प का उपयोग कर सकते हैं, बल्कि ऑफलाइन यूटिलिटी के माध्यम से भी अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया में उपयोगकर्ता डेटा भरकर JSON फाइल जनरेट कर सकते हैं, जिसे बाद में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो सीधे ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं या जिन्हें तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है।

    आईटीआर-1, जिसे सहज के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय वेतन, एक घर संपत्ति और अन्य स्रोतों से आती है। वहीं आईटीआर-4, जिसे सुगम कहा जाता है, उन व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों और कुछ छोटे व्यवसायों के लिए लागू होता है जिनकी आय 50 लाख रुपये तक होती है और जो अनुमानित कराधान योजना के अंतर्गत आते हैं।

    इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सात अलग-अलग प्रकार के आईटीआर फॉर्म उपलब्ध हैं, जिन्हें करदाता अपनी आय के प्रकार और श्रेणी के अनुसार चुन सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग आय वर्गों के लिए टैक्स फाइलिंग को अधिक व्यवस्थित और आसान बनाना है, ताकि हर वर्ग का करदाता बिना किसी जटिलता के अपना रिटर्न दाखिल कर सके।

    इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन भी किए थे। इन संशोधनों में पूंजीगत लाभ की विस्तृत रिपोर्टिंग, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान की जानकारी और कुछ विशेष व्यापारिक लेन-देन से जुड़े नए प्रकटीकरण नियम शामिल किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत रिपोर्टिंग को कम करना बताया गया है।

    सरकार लगातार टैक्स सिस्टम को डिजिटल और सरल बनाने पर जोर दे रही है, जिससे करदाता बिना किसी कठिनाई के समय पर अपना रिटर्न दाखिल कर सकें। ई-फाइलिंग सिस्टम के विस्तार और नई यूटिलिटीज के आने से उम्मीद है कि इस वर्ष टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पहले से अधिक सुचारु और तेज होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रिटर्न फाइलिंग न केवल करदाताओं के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे देश की वित्तीय व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है, ऐसे में टैक्सपेयर्स को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते अपने दस्तावेज तैयार कर फाइलिंग प्रक्रिया पूरी कर लें।

  • भोपाल: मिलन स्वीट्स पर इनकम टैक्स की रेड, टैक्स चोरी के शक में दस्तावेज खंगाले, संचालक से पूछताछ जारी

    भोपाल: मिलन स्वीट्स पर इनकम टैक्स की रेड, टैक्स चोरी के शक में दस्तावेज खंगाले, संचालक से पूछताछ जारी


     

    भोपाल भोपाल के एमपी नगर स्थित प्रतिष्ठित मिलन स्वीट्स और रेस्टोरेंट पर रविवार सुबह इनकम टैक्स विभाग की टीम ने अचानक सर्वे कार्रवाई की, जिससे रेस्टोरेंट में हड़कंप मच गया। टीम ने टैक्स चोरी की आशंका को लेकर रेस्टोरेंट में मौजूद दस्तावेजों और रिटर्न से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले और संचालक से पूछताछ की। जानकारी के मुताबिक, टीम इस जांच में कर चोरी के सबूत जुटाने में जुटी है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, आईटी विभाग की टीम के आने के बाद रेस्टोरेंट में अफरातफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। इनकम टैक्स विभाग का उद्देश्य इस कार्रवाई के माध्यम से कर से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की आर्थिक गड़बड़ी पर नज़र रखना है।

    गौरतलब है कि जून 2024 में भी मिलन स्वीट्स में भीषण आग लगी थी। आग पर काबू पाने के लिए एक दर्जन से अधिक दमकल की गाड़ियां मौके पर आई थीं और लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। इस घटना में रेस्टोरेंट को बड़ा नुकसान हुआ था, जिसमें मिठाइयां, अन्य खाद्य सामग्री और कई दस्तावेज जलकर खाक हो गए थे।

    इस बार की सर्वे कार्रवाई में आईटी टीम ने वही दस्तावेज और रिटर्न रिकॉर्ड खंगाले, जो पहले आग में नष्ट हो चुके थे, ताकि वित्तीय जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और सटीक हो सके। टीम रेस्टोरेंट संचालक से विस्तृत पूछताछ कर रही है और कर चोरी या किसी भी नियम उल्लंघन की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है ताकि किसी तरह की अफरातफरी या सुरक्षा संबंधी समस्या न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रतिष्ठित रेस्टोरेंटों में भी अगर टैक्स नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो विभाग कठोर कार्रवाई करेगा।

    इस मामले में कर विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार इन्वेस्टिगेशन और दस्तावेज़ जांच से न केवल कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि अन्य व्यापारियों के लिए भी नैतिक और कानूनी उदाहरण स्थापित होगा।

    यदि जांच में सबूत मिलते हैं, तो मिलन स्वीट्स संचालक के खिलाफ विभाग आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल, आईटी टीम पूरे रेस्टोरेंट में दस्तावेजों की पड़ताल और पूछताछ जारी रखे हुए है, ताकि सभी वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन हो सके और कर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • एक अप्रैल से लागू होंगे इनकम टैक्स के नए रूल्स… विभाग ने जारी किया ड्राफ्ट

    एक अप्रैल से लागू होंगे इनकम टैक्स के नए रूल्स… विभाग ने जारी किया ड्राफ्ट


    नई दिल्ली।
    इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने इनकम-टैक्स नियम, 2026 (Income-tax Rules, 2026) का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ये ड्राफ्ट नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने का प्रस्ताव है। इन ड्राफ्ट नियमों में कई दूसरी पहलों के साथ-साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग फॉर्म को आसान बनाया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक बयान में कहा कि ड्राफ्ट नियम और फॉर्म करीब 15 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन में रहेंगे। सभी स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से अनुरोध है कि वे इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म को देखें और उन पर सोच-समझकर फीडबैक दें ताकि और बेहतर किया जा सके । आपको बता दें कि 15 दिन की अवधि 22 फरवरी, 2026 को पूरी हो रही है।


    CBDT चेयरमैन ने क्या कहा था?

    CBDT का कहना है कि ड्राफ्ट नियमों का हिस्सा नए फॉर्म को भी टैक्स देने वालों की आसानी के लिए काफी हद तक आसान बनाया गया है। बीते दिनों CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बताया था कि इसके अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची भी जारी की जाएगी। अग्रवाल ने कहा था कि CBDT नए कानून पर ‘बार-बार पूछे जाने वाले सवाल’ (एफएक्यू) और एक प्रस्तुति तैयार करने पर भी काम कर रहा है।

    यह नए अधिनियम के लागू होने के साथ जनता के लिए उपलब्ध होगी ताकि उन्हें चीजों को समझने में आसानी हो। सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि पिछले साल पूरा जोर (आयकर अधिनियम की) भाषा को सरल बनाने पर था और नए कानून को इस तरह से लाने पर था कि करदाता इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट

    नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा- इनकम टैक्स फॉर्म्स को आसान बनाया गया है। फॉर्म को ज्यादा साफ, आसानी से समझ में आने वाली भाषा में तैयार किया गया है ताकि ऑपरेशनल, एडमिनिस्ट्रेटिव या कानूनी अनिश्चितता से बचा जा सके और उनसे जुड़े नोट्स को भी उसी हिसाब से आसान बनाया गया है। खास बात यह है कि ड्राफ्ट फॉर्म नंबर 26, ऑडिट रिपोर्ट और इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 63 के तहत दी जाने वाली जानकारियों का स्टेटमेंट, ICDS एडजस्टमेंट का प्रावधान करता है।

  • बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर

    बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान करीब 300 अंक गिरकर 82950 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 25450 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs की लगातार बिकवाली के कारण आया।

    बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में से 24 शेयर नुकसान में रहे जबकि केवल 6 शेयरों में हल्की तेजी दर्ज हुई। कंज्यूमर टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। जोमैटो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट आई जिसने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    एशियाई बाजारों से भी अनुकूल संकेत नहीं मिले। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.22% गिरकर 52931 पर बंद हुआ हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.075% टूटकर 26543 पर रहा जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.30% गिरकर 4101 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 4905 पर बना रहा लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।

    अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। 16 जनवरी को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.17% गिरकर 49359 पर बंद हुआ। नैस्डेक और एसएंडपी-500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह नरमी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर रही है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 19 जनवरी को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3262 करोड़ की बिकवाली की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने ₹4234 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने ₹34350 करोड़ की बिकवाली की थी जबकि DIIs ने ₹79620 करोड़ का निवेश किया था जिसने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।

    पिछले कारोबारी सत्र में भी सेंसेक्स 324 अंक गिरकर 83246 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 108 अंक टूटकर 25585 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से अल्पकालिक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सरकारी अपडेट तथा राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • नई टैक्स व्यवस्था, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत टैक्स में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने अपडेट दी

    नई टैक्स व्यवस्था, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत टैक्स में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने अपडेट दी


    नई दिल्ली। बजट 2026-27 के पेश होने से ठीक पहले वित्त मंत्रालय ने पिछले बजट और वित्त अधिनियम 2025 के तहत किए गए अहम सुधारों का ब्योरा दिया। मंत्रालय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि न्यू टैक्स रिजीम एनटीआरके तहत व्यक्तिगत और कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव किए गए हैं।वित्त मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था का मकसद टैक्स देने के बाद लोगों के हाथ में अधिक पैसा बचाना है। यह बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं यानी आकलन वर्ष 2026-27 से इसका असर दिखेगा।

    इनकम टैक्स बिल 2025 को भी वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम बताया। छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने के लिए यह बिल लाया गया है। इसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स को राहत देना निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और टैक्स व्यवस्था को आसान बनाना है।कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव के तहत जो कंपनियां तय की गई छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं उनके लिए टैक्स दर 22 प्रतिशत रखी गई है। वहीं नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक निश्चित अवधि तक टैक्स दर 15 प्रतिशत तय की गई है।

    व्यक्तिगत आयकर के मामले में भी नए टैक्स सिस्टम में स्लैब आसान और टैक्स दर कम कर दी गई हैं। छूट बढ़ाई गई है जिसके तहत 12 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक बढ़ाई गई है क्योंकि उन्हें 75000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगी।फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 23एफई के फायदे भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकते हैं और उन्हें डिविडेंड ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ एलटीसीजीपर टैक्स से छूट मिलेगी।

    इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर आईएफएससीसे जुड़े नियमों और अतिरिक्त कामकाज की तारीख भी फाइनेंस एक्ट 2025 के जरिए लागू कर दी गई हैं जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हैं। इसके अलावा अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स एआईएफके लिए कराधान की स्पष्टता भी सुनिश्चित की गई है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स नियम स्पष्ट हैं जिससे निवेशकों को भरोसा मिलेगा।कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय ने यह संदेश दिया है कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में टैक्स सुधार निवेश प्रोत्साहन और सरल वित्तीय नियमों के जरिए आम नागरिक और निवेशकों दोनों को लाभ पहुंचाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। बजट 2026-27 के दौरान इन नीतियों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।

  • बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन

    बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन


    नई दिल्ली । जैसे-जैसे फरवरी का महीना नजदीक आता है, देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिक जाती हैं। 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार का तीसरा पूर्ण बजट पेश किया जाएगा, जो केवल आंकड़ों का हिसाब-किताब नहीं बल्कि आम आदमी की जेब और उसकी बचत का भविष्य तय करेगा।

    मौजूदा टैक्स सिस्टम का अंतिम बजट

    इस बार का यूनियन बजट 2026-27 खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा इनकम टैक्स कानून के तहत पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए ‘Income Tax Act 2025’ को लागू करने की तैयारी कर रही है, जो करीब 60 साल पुराने टैक्स कानूनों को बदलने वाला है। ऐसे में, यह बजट न केवल वर्तमान टैक्स व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम कदम होगा, बल्कि आने वाली टैक्स व्यवस्था की नींव भी रखेगा। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से टैक्सपेयर्स को किन प्रमुख राहतों की उम्मीद है

    पुराने टैक्स रिजीम का दर्द: क्या मिलेगा राहत

    पिछले साल, यानी बजट 2025 में, सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बना दिया था। इसमें 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बेसिक छूट सीमा को 4 लाख रुपये तक बढ़ाने जैसे फैसले किए गए थे। हालांकि, इसका फायदा उन लोगों को कम हुआ जिन्होंने ‘ओल्ड टैक्स रिजीम पुराना टैक्स सिस्टम अपनाया है। पुराने सिस्टम में टैक्स देने वाले लोग पीएफ होम लोन और इंश्योरेंस जैसी योजनाओं के जरिए अपनी बचत पर जोर देते हैं।

    इन लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि बेसिक छूट सीमा जो अभी 2.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है उसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जाए। इसके अलावा, धारा 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट अब महंगाई के दौर में नाकाफी हो चुकी है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपये किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य बीमा और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत मिल सके।

    घर और इलाज पर राहत मिडिल क्लास की बड़ी जरूरत

    महंगाई के इस दौर में घर खरीदना और बीमारी का इलाज कराना मिडिल क्लास के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टैक्सपेयर्स का मानना है कि राहत केवल टैक्स स्लैब बदलने से नहीं मिलेगी बल्कि जरूरी खर्चों पर छूट देने से ही असली फायदा होगा। खासतौर पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट अब घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बहुत कम लगती है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार होम लोन ब्याज छूट को बढ़ाकर अधिक लाभकारी बनाएगी।इसके अलावा मिडिल क्लास की यह भी मांग है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम को भविष्य के लिए स्थायी बनाना चाहती है तो इसमें स्वास्थ्य बीमा और होम लोन पर टैक्स छूट की सुविधा भी शामिल की जाए। इससे बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मिडिल क्लास को राहत मिलेगी।

    आसान नियम और सरल टैक्स प्रक्रिया

    टैक्सपेयर्स केवल टैक्स कम करने की उम्मीद नहीं कर रहे, बल्कि वे जटिल प्रक्रियाओं से भी राहत चाहते हैं। कई बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर टीडीएस मैचिंग में समस्याएं आती हैं। नए से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए।इसके अलावा ईयर की जगह टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट लाने की चर्चा भी हो रही है जो प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। साथ ही टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को दूर किया जाएगा। फिलहाल शेयर बाजार म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हैं जिससे भ्रम पैदा होता है। लोग चाहते हैं कि सभी एसेट्स के लिए एक जैसी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू हो।

    टैक्स स्लैब में बदलाव: क्या मिलेगा राहत

    मिडिल क्लास उम्मीद कर रहा है कि टैक्स स्लैब में भी कुछ बदलाव किए जाएं ताकि उनकी टैक्स भार को हल्का किया जा सके। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयकर स्लैब की सीमा को बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा होगा। खासकर उन लोगों को जिनकी आय 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच है उन्हें राहत की जरूरत है। इस स्लैब को बढ़ाकर टैक्स रेट को कम किया जा सकता है।

    भविष्य की टैक्स व्यवस्था क्या है नई उम्मीदें

    वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2026 में सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि नए टैक्स कानूनों का खाका तैयार किया जाएगा ताकि टैक्सपेयर्स को आने वाले समय में सटीक और सही जानकारी मिल सके। नए टैक्स कानूनों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और अधिक पारदर्शी सटीक और आसान बनाना होगा ताकि आम नागरिक को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बजट 2026 के जरिए मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद है कि सरकार उनके लिए टैक्स राहत, आसान नियम, और आवश्यक खर्चों पर छूट की सुविधाएं प्रदान करेगी। इस बजट का असर सीधे-सीधे लाखों लोगों की जेब और जीवनशैली पर पड़ेगा, इसलिए इस बार के बजट में टैक्सपेयर्स को खास राहत मिलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

  • एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश

    एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश


    मुम्बई।
    बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Bollywood actress Shilpa Shetty) के मुंबई वाले घर पर इनकम टैक्स अधिकारियों (Income Tax Officials) ने रेड (Raid) मारी है। ये मामला उनकी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी कंपनी (Bastian Hospitality Company) से जुड़ा है। वह इस कंपनी की को-ओनर हैं। इस कंपनी के मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और गोवा में ‘बेस्टियन’ नाम से क्लब्स और रेस्टोरेंट्स हैं। आयकर विभाग को संदेह है कि होटल व्यवसाय में निवेश, आय और टैक्स भुगतान को लेकर गड़बड़ियां। ऐसे में वह बैस्टियन रेस्टोरेंट (Bastian) से संबंधित वित्तीय लेन-देन और कथित टैक्स अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं।


    इन जगहों पर मारे छापे

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग, कंपनी के आउटलेट और इसके प्रमोटरों के घर पर रेड मार रही है। ये छापेमारी बुधवार को शुरू हुई थी और अब जांच शिल्पा शेट्टी के घर तक पहुंच गई है।


    शिल्पा शेट्टी के साथ ये हैं को-ओनर

    बस्टियन पब की शुरुआत बिजनेसमैन रंजीत बिंद्रा की कंपनी बस्टियन हॉस्पिटैलिटी ने की थी। शिल्पा शेट्टी ने साल 2019 में इस वेंचर में 50% की हिस्सेदारी खरीदी और इसकी को-ओनर बन गईं।


    आरोपों पर शिल्पा का बयान

    शिल्पा शेट्टी ने आयकर विभाग की रेड से पहले इन आरोपों से इनकार किया था और इन्हें बेबुनियाद था। उन्होंने कहा था, “जांच में पूरा सहयोग करने के बाद, हमें पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हमें अपने देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हम मीडिया से सम्मानपूर्वक आग्रह करते हैं कि इस मामले में संयम बरतें क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।”

  • MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…

    MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के कटनी (Katni) में आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीम ने बुधवार सुबह बड़ी छापामार कार्रवाई (Guerrilla Action) की। भोपाल,जबलपुर,कटनी के आयकर विभाग के अधिकारियों ने मारा छापा मारा है। लगभग 25 सदस्यों ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में महिलाएं भी शामिल थीं। जबलपुर में सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा (Mining businessman Rajiv Chadha) और नितिन शर्मा के घर आयकर विभाग की टीम अचानक से पहुंची और सर्चिग शुरू कर दी।

    इसके साथ ही कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा (BJP leader Ashok Vishwakarma) तथा उनके तीन भाईयों के ठिकानों पर भी एक साथ छापे मारे गए। तीनों ही स्थानों पर इंदौर और भोपाल से आई आयकर विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के अनुसार आय से अधिक संपत्ति टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्यवाही हुई है। फिलहाल अभी टीम को क्या मिला है इसकी जानकारी सामने नही आई है,कार्रवाई पूरी होते ही आयकर टीम बताएगी।

    जबलपुर जिले में सिविल लाइन रसल चौक स्थित खनन कारोबारियों पर राजीव चड्ढा ओर नितिन शर्मा के घर आयकर की टीम ने छापा मारा है। चड्डा माइन्स के ऑफिस राजीव चड्ढा के बाद नितिन शर्मा के घर से भी टीम को कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है।

    आयकर विभाग की टीम ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025’ का पोस्टर लगी हुई कार से सिविल लाइन स्थित कारोबारी के घर पहुंची थी, कारोबारी के चौकीदार को पहले लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई के लिए आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सर्चिग के दौरान क्या-क्या सामने आता है, इसको लेकर फिलहाल आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार खनन कारोबारी राजीव चड्डा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ आयकर विभाग को शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जबलपुर, कटनी में एक साथ कार्रवाई की गई है। आयकर विभाग की टीमें फिलहाल कारोबारियों के घर और कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

    कटनी जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के भाई शंकर लाल विश्वकर्मा के यहां तड़के 4 बजे से आयकर विभाग की टीम ने अशोक विश्वकर्मा के निवास, फर्म और बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। विश्वकर्मा माइनिंग कारोबारी हैं और उनकी फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस के नाम से संचालित है। विश्वकर्मा और उनके अन्य तीन भाइयों के जलपा वार्ड स्थित घर फर्म ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी में खदान है। यह कार्यवाही भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग की ओर घर और ऑफिस में दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

  • Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 मिडिल क्लास के लिए कई मामलों में शानदार साबित हुआ। इस साल सरकार ने टैक्स और जीएसटी में बड़े सुधार किए, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ा और वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हुआ। सबसे ज्यादा राहत इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और जीएसटी 2.0 रिफॉर्म से मिली।

    इनकम टैक्स में बड़ी राहत
    केंद्र सरकार ने आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इस साल कई फैसले लिए। बजट 2025 में सरकार ने इनकम टैक्स छूट की लिमिट 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली 75,000 रुपये की छूट को मिला दिया जाए तो यह बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो जाती है। इसका मतलब है कि कोई भी सैलरीड क्लास 12.75 लाख रुपये तक की आमदनी पर इनकम टैक्स छूट का दावा कर सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की छूट केवल सैलरीड क्लास को ही मिलेगी।

    जीएसटी 2.0 से मिडिल क्लास को बड़ा फायदा
    सरकार ने 2025 में जीएसटी स्लैब्स में भी बड़ा बदलाव किया। पुराने चार स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% को घटाकर अब केवल दो स्लैब 5% और 18% रह गए हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर जीएसटी की दर 40% कर दी गई।

    453 चीजों पर GST रेट में बदलाव
    नए जीएसटी रेट लागू होने के बाद 453 चीजों की दरों में बदलाव हुआ, जिनमें से 413 चीजों की दर में कमी हुई। करीब 295 जरूरी चीजों पर जीएसटी रेट 12% से घटाकर 5% या जीरो कर दिया गया। 1,200 सीसी या उससे कम की पेट्रोल कारों और 1,500 सीसी या कम की डीजल कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% की गई। इसी तरह, 350 सीसी या उससे कम की बाइक पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दी गई।

    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर 40% GST
    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर जीएसटी 40% तय की गई। इसके साथ ही कारों पर सेस को भी खत्म कर दिया गया। इन सुधारों का उद्देश्य देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाना था। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश की ग्रोथ रेट 8.2% दर्ज की गई, जो पिछली कई तिमाहियों में सबसे तेज है।

    टोल प्लाजा पर भी मिली राहत
    साल 2025 में आम लोगों के लिए टोल टैक्स का बोझ भी कम किया गया। सरकार ने एनुअल पास का ऐलान किया, जिसे 15 अगस्त से लागू कर दिया गया। फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3,000 रुपये है। इसके तहत कोई भी वाहन चालक सालभर में 200 टोल प्लाजा पार कर सकता है। इस योजना से एक टोल प्लाजा पार करने की कीमत घटकर केवल 15 रुपये रह जाती है, जिससे हाइवे पर सफर पहले की तुलना में काफी सस्ता हो गया है।
    साल 2025 मिडिल क्लास के लिए राहत और फायदे लेकर आया। इनकम टैक्स में छूट, GST स्लैब्स में कमी और टोल पास सुविधा ने आम आदमी की जेब पर सकारात्मक असर डाला। सरकार के ये कदम आर्थिक दृष्टि से आम जनता को सहारा देने और खर्च में कटौती करने में मददगार साबित हुए हैं।

  • 31 दिसंबर से पहले जरूर कर लें यह काम वरना होगा बड़ा नुकसान

    31 दिसंबर से पहले जरूर कर लें यह काम वरना होगा बड़ा नुकसान

    आयकर दाताओं के लिए दिसंबर का महीना कई जरूरी वित्तीय काम निपटाने का है। इस महीने विलंबित आयकर रिटर्न दाखिल करने, आधार को पैन से लिंक करने की अंतिम तिथियां हैं। यदि ये काम समय पर नहीं किए गए, तो विलंब शुल्क, ब्याज और मोटा जुर्माना पेनल्टी लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने अब तक ये काम नहीं निपटाएं हैं, यह उनके लिए आखिरी मौका है।
    1. आयकर रिटर्न का आखिरी मौका
    अगर किसी वजह से कोई करदाता तय समय में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाया है तो उसके पास एक और मौका है। आयकर की धारा-139(4) के तहत विलंबित और संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
    1. विलंबित रिटर्न
    यह विकल्प उनके लिए हैं, जो करदाता 15 सितंबर की तय समयसीमा में मूल आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए थे। अब वे 31 दिसंबर 2025 तक इसे भर सकते हैं। इसके साथ अधिकतम ₹5,000 रुपये विलंब शुल्क लगेगा। हालांकि, पांच लाख रुपये से कम आय वालों के लिए शुल्क 1,000 रुपये और बकाया कर पर ब्याज लगेगा।

    2. संशोधित रिटर्न
    जिन करदातों ने तय समय पर रिटर्न दाखिल कर दी थी, लेकिन अब वो संशोधन या गलती सुधारना चाहते हैं, वे भी 31 दिसंबर तक अपडेटेड रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल कर सकते हैं। अगर कोई कर देनदारी बनती है तो 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त दंड लग सकता है।

    2. टैक्स ऑडिट मामलों में 10 तक दाखिल करें रिटर्न
    टैक्स ऑडिट वालों के लिए इस साल सरकार ने राहत दी है। आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 10 दिसंबर 2025 कर दी है। यह राहत उन सभी करदाताओं के लिए राहत है, जिनकी रिटर्न में ऑडिट और वित्तीय विवरण शामिल हैं। उन्हें इस विस्तारित तिथि तक फाइलिंग पूरी करनी होगी।

    3. आधार-पैन लिंकिंग का अंतिम मौका
    जिन व्यक्तियों का आधार 1 अक्टूबर 2024 या उससे पहले बना था, उनके लिए इसे पैन से लिंक करना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करनी होगी। लिंक न करने पर पैन निष्क्रिय हो सकता है। इससे बैंकिंग और निवेश से जुड़े लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल करने में दिक्कत हो सकती है। इस जोखिम से बचने के लिए तय तिथि से पहले आधार-पैन को लिंक कर लें।

    ऐसे लिंक करें
    1. आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाएं और ‘लिंक आधार’ विकल्प पर क्लिक करें।

    2. अपना आधार और पैन कार्ड नंबर दर्ज करें।
    3. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और ‘I agree to validate my Aadhaar details with UIDAI’ पर क्लिक करें।

    4. प्रक्रिया पूरी होने पर आपको पैन-आधार के सफलतापूर्वक लिंक होने का संदेश आएगा।

    यह भी तरीका
    एसएमएस के जरिए भी पैन को आधार से लिंक किया जा सकता है। इसके लिए, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से UIDPAN 12 Digit Aadhaar 10 Digit PAN लिखकर 567678 या 56161 पर मैसेज करें।

    15 दिसंबर तक इन्हें निपटाएं
    1. नवंबर महीने में खरीदार से फॉर्म 27सी में मिले डिक्लेरेशन अपलोड करने की तारीख 15 दिसंबर है।

    2. आकलन वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की अंतिम तिथि भी 15 दिसंबर है।

    3. अक्टूबर 2025 में काटे गए कर के लिए टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करने की अंतिम तारीख भी 15 दिसंबर है।