Tag: IncomeTax

  • 31 जुलाई की समयसीमा से पहले आईटीआर फाइलिंग में तेज़ी, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 4.70 करोड़ रिटर्न दाखिल

    31 जुलाई की समयसीमा से पहले आईटीआर फाइलिंग में तेज़ी, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 4.70 करोड़ रिटर्न दाखिल

    नई दिल्ली ।31 जुलाई की अंतिम तिथि नजदीक आते ही देशभर में आयकर रिटर्न दाखिल करने की रफ्तार तेज हो गई है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बुधवार सुबह 11 बजे तक लगभग 4.70 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में करदाताओं द्वारा अंतिम दिनों में रिटर्न दाखिल किए जाने से स्पष्ट है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले लोग अपनी कर संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटे हुए हैं। आयकर विभाग भी लगातार करदाताओं को समय रहते रिटर्न दाखिल करने के लिए जागरूक कर रहा है, ताकि अंतिम समय में तकनीकी या अन्य परेशानियों से बचा जा सके।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दाखिल किए गए कुल आयकर रिटर्न में से करीब 4.40 करोड़ रिटर्न का सत्यापन पूरा हो चुका है। इसके अलावा लगभग 2.34 करोड़ रिटर्न का प्रोसेसिंग कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इससे संकेत मिलता है कि रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ विभाग उसकी जांच और निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज गति से आगे बढ़ा रहा है, जिससे पात्र करदाताओं को समय पर आवश्यक लाभ मिल सके।

    आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें। विभाग ने विशेष रूप से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म भरने वाले करदाताओं को समय रहते प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक या दस्तावेजों में किसी त्रुटि के कारण अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी करना अधिक उचित रहेगा।

    रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों का मिलान करना भी बेहद जरूरी माना गया है। करदाताओं को फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म 26एएस, बैंक स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है। यदि इन दस्तावेजों और रिटर्न में दर्ज जानकारी के बीच कोई अंतर रह जाता है, तो भविष्य में सत्यापन या प्रोसेसिंग के दौरान परेशानी उत्पन्न हो सकती है। सही और पूर्ण जानकारी देने से रिटर्न का निस्तारण भी अपेक्षाकृत तेजी से होता है।

    31 जुलाई की अंतिम तिथि उन करदाताओं पर लागू होती है जिन्हें अपने खातों का टैक्स ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी, छात्र तथा अन्य सामान्य व्यक्तिगत करदाता शामिल हैं। ऐसे करदाताओं के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है, ताकि विलंब से जुड़ी संभावित जटिलताओं और नियमों के प्रभाव से बचा जा सके।

    आईटीआर-1, जिसे सहज फॉर्म भी कहा जाता है, उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए निर्धारित है जिनकी आय वेतन या पेंशन, एक आवासीय मकान और अन्य साधारण स्रोतों जैसे ब्याज से प्राप्त होती है तथा जिनकी कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है। दूसरी ओर आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए है जिनकी व्यवसाय या पेशे से आय नहीं होती, लेकिन उन्हें पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकानों, विदेशी संपत्तियों, विदेशी आय या अन्य अपेक्षाकृत जटिल स्रोतों से आय प्राप्त होती है। ऐसे करदाताओं को अपनी आय की प्रकृति के अनुसार सही फॉर्म का चयन कर समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है।

  • संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    नई दिल्ली ।देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 576 हो गई, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्षों में इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
    लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि विभिन्न आकलन वर्षों के दौरान इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र रूप से वृद्धि का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार आकलन वर्ष 2022-23 में 301 करदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित की थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 284 रह गई, लेकिन अगले वर्षों में फिर तेजी से बढ़ोतरी हुई। आकलन वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ‘अरबपति’ शब्द की कोई कानूनी या वैधानिक परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल उन आयकर रिटर्न पर आधारित हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़े घोषित आय के आधार पर तैयार किए गए हैं।
    आय असमानता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में आय वितरण की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों का जिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 पर आ गया। सरकार का मानना है कि यह बदलाव आय वितरण में अपेक्षाकृत संतुलन आने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
    सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर वर्ष 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है।
    सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आय असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लक्षित कर प्रोत्साहनों और विकास आधारित निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के प्रयास जारी रहें

  • 'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश

    'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश


    नई दिल्ली ।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के काम को आसान बनाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अपने वैध अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेवाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। उनके अनुसार, प्रभावी प्रशासन वही है जो नियमों का पालन करते हुए लोगों की कठिनाइयों को कम करे।

    वित्त मंत्री ने सरकारी भूमि और संपत्तियों के संरक्षण के विषय पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर नई इमारत का निर्माण हुआ है, वह कई दशक पहले विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

    अपने संबोधन में उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक और मंजूरी संबंधी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े सरकारी विभाग को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने में लंबा समय और कई स्तरों की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, तो आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियमों में ढील देने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन करते हुए भी लोगों के कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकार या सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रयास करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जवाबदेही और दक्षता दोनों दिखाई दें।

    उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों के आवास से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में अनेक अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे उनके कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इसके बाद भवन निर्माण, स्वीकृतियां, निविदाएं और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-केंद्रित सोच के साथ आयकर विभाग अधिक प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।

  • घर में रखे कैश और सोना बन सकते हैं मुसीबत, बिना हिसाब संपत्ति पर 86% तक टैक्स का खतरा

    घर में रखे कैश और सोना बन सकते हैं मुसीबत, बिना हिसाब संपत्ति पर 86% तक टैक्स का खतरा


    नई दिल्ली ।
    घर में नकदी या सोना रखना आम बात मानी जाती है, लेकिन अगर इन संपत्तियों का कोई पक्का रिकॉर्ड या आय का स्रोत दर्ज नहीं है, तो यह आपके लिए गंभीर टैक्स जोखिम बन सकता है। आयकर विभाग अब ऐसी संपत्तियों पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और बिना हिसाब वाली आय या संपत्ति पर भारी टैक्स और जुर्माने का प्रावधान लागू किया जा सकता है। कई मामलों में यह भार इतना अधिक हो सकता है कि कुल रकम का बड़ा हिस्सा कर के रूप में वसूला जाए।

    नियमों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसा कैश या संपत्ति पाई जाती है जिसका स्रोत वह साबित कर सकता है, तो उस पर भी भारी टैक्स लग सकता है। वहीं यदि स्रोत साबित नहीं किया जा सका, तो टैक्स और जुर्माने की संयुक्त दर काफी अधिक हो सकती है। यह व्यवस्था अनघोषित आय और काले धन पर नियंत्रण के उद्देश्य से लागू की गई है, ताकि वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे।

    हालांकि घर में कैश रखने की कोई निश्चित कानूनी सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन उस राशि का पूरा हिसाब होना अनिवार्य है। यानी यह जरूरी है कि यह स्पष्ट हो कि वह पैसा किस माध्यम से और किस आय स्रोत से प्राप्त हुआ है। बिना रिकॉर्ड के रखी गई नकदी कर जांच के दायरे में आ सकती है और उस पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

    सोने के मामले में भी नियम अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार कुछ राहत प्रदान करते हैं। शादीशुदा महिलाओं के लिए एक तय सीमा तक सोना रखने की अनुमति दी जाती है, जबकि अविवाहित महिलाओं और पुरुषों के लिए भी अलग-अलग मानक तय हैं। इस सीमा के भीतर रखे गए सोने पर आमतौर पर जब्ती की कार्रवाई नहीं होती, बशर्ते परिस्थितियां सामान्य हों और कोई संदिग्ध गतिविधि न पाई जाए।

    हालांकि इन नियमों का उद्देश्य आम नागरिक को परेशान करना नहीं बल्कि अनघोषित संपत्ति पर नियंत्रण रखना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आय का हर स्रोत कर प्रणाली के दायरे में आए और आर्थिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बने। इसी वजह से टैक्स जांच के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

    इसके साथ ही हाल ही में लागू प्रावधानों के तहत टैक्सपेयर्स को एक सीमित राहत भी दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलता है, तो वह अपने आय विवरण को अपडेटेड रिटर्न के माध्यम से संशोधित कर सकता है। यदि व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी अघोषित आय को सही तरीके से घोषित करता है, तो वह भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बच सकता है, हालांकि उसे अतिरिक्त कर लाभ का पूरा फायदा नहीं मिलता।

    इस तरह के नियमों का सीधा संदेश यह है कि वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। बिना दस्तावेज या रिकॉर्ड के रखी गई संपत्ति भविष्य में कानूनी और आर्थिक दोनों तरह की मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

  • वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार सेंचुरी पर फिदा हुए पैट कमिंस, बताया अपना नया पसंदीदा खिलाड़ी

    वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार सेंचुरी पर फिदा हुए पैट कमिंस, बताया अपना नया पसंदीदा खिलाड़ी

    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वही अहम सवाल खड़ा हो गया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना जाए या नई टैक्स व्यवस्था को अपनाया जाए। दोनों ही सिस्टम अपने-अपने तरीके से अलग फायदे और सीमाएं लेकर आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्ति की आय और वित्तीय योजना पर निर्भर करता है।

    हालांकि इस साल टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टताओं के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि किस व्यवस्था में ज्यादा लाभ मिलेगा। कई मामलों में देखा जा रहा है कि इस बार लोगों के लिए पिछली तुलना में चुनाव अलग भी हो सकता है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट का लाभ मिलता है। इसमें निवेश पर मिलने वाली कटौती, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन पर ब्याज, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन सुविधाओं के कारण टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है, लेकिन इसके बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

    वहीं दूसरी ओर नई टैक्स व्यवस्था को सरल और सीधा बनाया गया है। इसमें टैक्स स्लैब अलग-अलग आय स्तरों पर लागू होते हैं और दरें तुलनात्मक रूप से कम रखी गई हैं, लेकिन अधिकतर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और फाइलिंग प्रक्रिया को कम जटिल करना है।

    अगर किसी व्यक्ति की आय सीमित है और वह ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग विकल्पों का उपयोग नहीं करता, तो नई टैक्स व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें कम दरों के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी यानी टेक-होम इनकम ज्यादा रहती है।

    इसके विपरीत, जो लोग नियमित रूप से निवेश करते हैं, बीमा पॉलिसी लेते हैं या होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभकारी हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां कई प्रकार के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियां होती हैं, यह विकल्प टैक्स बचत में मदद करता है।

    सरकार द्वारा समय-समय पर दोनों व्यवस्थाओं में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि करदाता अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। कुछ भत्तों और अलाउंस में संशोधन के कारण टैक्स प्लानिंग पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी के साथ निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।

     यह साफ है कि कोई भी एक टैक्स सिस्टम सभी के लिए सबसे बेहतर नहीं हो सकता। सही चुनाव पूरी तरह व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश की आदत और भविष्य की वित्तीय योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।

  • टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वही अहम सवाल खड़ा हो गया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना जाए या नई टैक्स व्यवस्था को अपनाया जाए। दोनों ही सिस्टम अपने-अपने तरीके से अलग फायदे और सीमाएं लेकर आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्ति की आय और वित्तीय योजना पर निर्भर करता है।

    हालांकि इस साल टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टताओं के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि किस व्यवस्था में ज्यादा लाभ मिलेगा। कई मामलों में देखा जा रहा है कि इस बार लोगों के लिए पिछली तुलना में चुनाव अलग भी हो सकता है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट का लाभ मिलता है। इसमें निवेश पर मिलने वाली कटौती, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन पर ब्याज, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन सुविधाओं के कारण टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है, लेकिन इसके बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

    वहीं दूसरी ओर नई टैक्स व्यवस्था को सरल और सीधा बनाया गया है। इसमें टैक्स स्लैब अलग-अलग आय स्तरों पर लागू होते हैं और दरें तुलनात्मक रूप से कम रखी गई हैं, लेकिन अधिकतर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और फाइलिंग प्रक्रिया को कम जटिल करना है।

    अगर किसी व्यक्ति की आय सीमित है और वह ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग विकल्पों का उपयोग नहीं करता, तो नई टैक्स व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें कम दरों के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी यानी टेक-होम इनकम ज्यादा रहती है।

    इसके विपरीत, जो लोग नियमित रूप से निवेश करते हैं, बीमा पॉलिसी लेते हैं या होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभकारी हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां कई प्रकार के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियां होती हैं, यह विकल्प टैक्स बचत में मदद करता है।

    सरकार द्वारा समय-समय पर दोनों व्यवस्थाओं में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि करदाता अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। कुछ भत्तों और अलाउंस में संशोधन के कारण टैक्स प्लानिंग पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी के साथ निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।

     यह साफ है कि कोई भी एक टैक्स सिस्टम सभी के लिए सबसे बेहतर नहीं हो सकता। सही चुनाव पूरी तरह व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश की आदत और भविष्य की वित्तीय योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।

  • coInme Tax Payers और Zero Tax Filers टैक्स देने वालों में 50% बढ़ोतरी जानिए कितने करोड़ लोगों ने दिया टैक्स

    coInme Tax Payers और Zero Tax Filers टैक्स देने वालों में 50% बढ़ोतरी जानिए कितने करोड़ लोगों ने दिया टैक्स


    नई दिल्ली ।देश में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि टैक्स छूट की सीमा में वृद्धि के बावजूद जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या भी बढ़ी है। केंद्र सरकार ने संसद में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसमें बताया गया कि पिछले चार वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में 50.4% और जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या में 20% की बढ़ोतरी हुई है।

    टैक्स देने वालों की बढ़ती संख्या

    2020-21 में कुल 6.72 करोड़ रिटर्न फाइल किए गए थे जिनमें से 4.84 करोड़ लोग जीरो टैक्स फाइलर्स थे यानी इन लोगों पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी। वहीं 1.88 करोड़ लोगों ने टैक्स अदा किया। अब 2024-25 तक जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़कर 5.58 करोड़ हो गई है जबकि टैक्स देने वालों की संख्या 2.82 करोड़ तक पहुंच गई है।

    जीरो टैक्स फाइलर्स और टैक्स पेयर की बढ़ती संख्या

    2020-21 में कुल रिटर्न का 72% जीरो टैक्स फाइलर्स ने फाइल किया था जो 2024-25 में घटकर 66% हो गया है। इसके उलट टैक्स देने वालों का हिस्सा 28% से बढ़कर 34% हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स सिस्टम में सुधार जैसे कि AI फेसलेस असेसमेंट और सरल नियमों के चलते अब लोग टैक्स भरने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।

    कोविड के बाद बढ़ी इनकम और टैक्स कलेक्शन

    COVID-19 महामारी के बाद सैलरी बिजनेस और MSMEs से होने वाली इनकम में बढ़ोतरी भी टैक्स कलेक्शन में दिखाई दे रही है। पिछले पांच वर्षों में कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ा है जिससे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और टैक्स देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

    दक्षिणी राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़ी

    विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में जैसे कि तेलंगाना केरल और तमिलनाडु में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। तेलंगाना में पिछले पांच वर्षों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तीन गुना बढ़ गई जबकि केरल में यह ढाई गुना बढ़ी है। तमिलनाडु में यह लगभग 1.25 गुना बढ़ी है।विशेषज्ञों के अनुसार इन राज्यों में युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करते हैं और कम सैलरी होने के बावजूद PAN कार्ड और प्रोविडेंट फंड में योगदान देना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा टैक्स छूट का फायदा उठाने के कारण इन राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।

    हरियाणा और उत्तर भारत में टैक्स देने वालों की बढ़ोतरी

    हरियाणा में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। उत्तर भारत में पिछले पांच वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोग अपनी इनकम को सही तरीके से दर्शाकर टैक्स अदा करने में सहज महसूस कर रहे हैं। इसके कारण टैक्स देने वालों की संख्या में 1 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।हरियाणा इस मामले में पहले स्थान पर है जबकि गुजरात दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश 7वें स्थान पर है। सरकार द्वारा टैक्स छूट की सीमा बढ़ाए जाने और टैक्स सिस्टम को आसान बनाने से अब लोग अपनी इनकम सही तरीके से दिखाने और टैक्स भरने में रुचि दिखा रहे हैं। इस कारण पिछले कुछ वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के संकेत हैं।

  • 31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!

    31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!


    नई दिल्ली। अगर आपके पास पैन कार्ड है और आपने इसे अभी तक आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सभी पैन कार्ड होल्डर्स को चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर, 2025 तक पैन और आधार लिंक न कराने पर 1 जनवरी, 2026 से आपका पैन कार्ड इनएक्टिव हो जाएगा।
    लेट फीस और छूट की जानकारी
    31 दिसंबर, 2025 तक लिंक न कराने वाले लोगों को पैन-आधार लिंक करते समय 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। हालांकि, 1 अक्टूबर, 2024 के बाद आधार से पैन बनवाने वालों को यह लेट फीस नहीं देनी होगी। समय पर लिंक न कराने से TDS/TCS अधिक कट सकता है और अन्य वित्तीय परेशानियां भी हो सकती हैं।
    पैन को आधार से लिंक कैसे करें
    सबसे पहले ऑफिशियल इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं: www.incometax.gov.in
    ‘क्विक लिंक्स’ सेक्शन में जाएं और ‘लिंक आधार ऑप्शन’ पर क्लिक करें।
    अपना पैन कार्ड और आधार नंबर डालें और वैलिडेट पर क्लिक करें।
    अगर पैन पहले से आधार से लिंक है, तो स्क्रीन पर मैसेज दिखेगा।
    अगर लिंक नहीं है, तो आपको NSDL पोर्टल पर 1000 रुपये का चालान जमा करना होगा।
    वैलिडेशन के बाद एक पॉप-अप नोटिफिकेशन मिलेगा, जिसमें लिखा होगा ‘आपकी पेमेंट डिटेल्स वेरिफाई हो गई है’।
    जरूरी डिटेल्स डालने के बाद लिंक आधार ऑप्शन पर क्लिक करें।
    रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मिला 6-डिजिट OTP डालें और रिक्वेस्ट सबमिट करें।
    पैन कार्ड को आधार से लिंक होने में 4-5 वर्किंग डे का समय लग सकता है।
    इस बार की आखिरी डेट 31 दिसंबर, 2025 है। समय रहते पैन और आधार लिंक कर लें, वरना न केवल आपका पैन कार्ड इनएक्टिव होगा बल्कि वित्तीय परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
  • 31 दिसंबर से पहले जरूर कर लें यह काम वरना होगा बड़ा नुकसान

    31 दिसंबर से पहले जरूर कर लें यह काम वरना होगा बड़ा नुकसान

    आयकर दाताओं के लिए दिसंबर का महीना कई जरूरी वित्तीय काम निपटाने का है। इस महीने विलंबित आयकर रिटर्न दाखिल करने, आधार को पैन से लिंक करने की अंतिम तिथियां हैं। यदि ये काम समय पर नहीं किए गए, तो विलंब शुल्क, ब्याज और मोटा जुर्माना पेनल्टी लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने अब तक ये काम नहीं निपटाएं हैं, यह उनके लिए आखिरी मौका है।
    1. आयकर रिटर्न का आखिरी मौका
    अगर किसी वजह से कोई करदाता तय समय में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाया है तो उसके पास एक और मौका है। आयकर की धारा-139(4) के तहत विलंबित और संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
    1. विलंबित रिटर्न
    यह विकल्प उनके लिए हैं, जो करदाता 15 सितंबर की तय समयसीमा में मूल आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए थे। अब वे 31 दिसंबर 2025 तक इसे भर सकते हैं। इसके साथ अधिकतम ₹5,000 रुपये विलंब शुल्क लगेगा। हालांकि, पांच लाख रुपये से कम आय वालों के लिए शुल्क 1,000 रुपये और बकाया कर पर ब्याज लगेगा।

    2. संशोधित रिटर्न
    जिन करदातों ने तय समय पर रिटर्न दाखिल कर दी थी, लेकिन अब वो संशोधन या गलती सुधारना चाहते हैं, वे भी 31 दिसंबर तक अपडेटेड रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल कर सकते हैं। अगर कोई कर देनदारी बनती है तो 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त दंड लग सकता है।

    2. टैक्स ऑडिट मामलों में 10 तक दाखिल करें रिटर्न
    टैक्स ऑडिट वालों के लिए इस साल सरकार ने राहत दी है। आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 10 दिसंबर 2025 कर दी है। यह राहत उन सभी करदाताओं के लिए राहत है, जिनकी रिटर्न में ऑडिट और वित्तीय विवरण शामिल हैं। उन्हें इस विस्तारित तिथि तक फाइलिंग पूरी करनी होगी।

    3. आधार-पैन लिंकिंग का अंतिम मौका
    जिन व्यक्तियों का आधार 1 अक्टूबर 2024 या उससे पहले बना था, उनके लिए इसे पैन से लिंक करना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करनी होगी। लिंक न करने पर पैन निष्क्रिय हो सकता है। इससे बैंकिंग और निवेश से जुड़े लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल करने में दिक्कत हो सकती है। इस जोखिम से बचने के लिए तय तिथि से पहले आधार-पैन को लिंक कर लें।

    ऐसे लिंक करें
    1. आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाएं और ‘लिंक आधार’ विकल्प पर क्लिक करें।

    2. अपना आधार और पैन कार्ड नंबर दर्ज करें।
    3. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और ‘I agree to validate my Aadhaar details with UIDAI’ पर क्लिक करें।

    4. प्रक्रिया पूरी होने पर आपको पैन-आधार के सफलतापूर्वक लिंक होने का संदेश आएगा।

    यह भी तरीका
    एसएमएस के जरिए भी पैन को आधार से लिंक किया जा सकता है। इसके लिए, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से UIDPAN 12 Digit Aadhaar 10 Digit PAN लिखकर 567678 या 56161 पर मैसेज करें।

    15 दिसंबर तक इन्हें निपटाएं
    1. नवंबर महीने में खरीदार से फॉर्म 27सी में मिले डिक्लेरेशन अपलोड करने की तारीख 15 दिसंबर है।

    2. आकलन वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की अंतिम तिथि भी 15 दिसंबर है।

    3. अक्टूबर 2025 में काटे गए कर के लिए टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करने की अंतिम तारीख भी 15 दिसंबर है।