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  • दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    नई दिल्ली ।दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में स्टार्टअप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के क्रियान्वयन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में नीति को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उद्यमियों के अनुकूल बनाने को लेकर सुझाव लिए गए।

    सरकार की योजना दिल्ली में ऐसा स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें युवाओं को अपने कारोबारी विचारों को विकसित करने के साथ शुरुआती स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिल सके। इसके लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में स्टार्टअप से संबंधित बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई कंपनियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके साथ युवाओं के लिए नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसर तैयार करना भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योग जगत से मिले सुझावों को नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी माना जा रहा है।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल के दौरान 10 हजार से अधिक स्टार्टअप को समर्थन और प्रोत्साहन देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से युवाओं के लिए चार लाख से अधिक रोजगार अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलने से रोजगार के साथ नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    बैठक में शामिल स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण में उद्यमियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जिप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश गुप्ता ने कहा कि नए संस्थापकों को मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराने से युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए ऐसी सुविधाओं को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

    एस्ट्रोटॉक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गुप्ता ने भी सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों से सीधे सुझाव लेने की प्रक्रिया की सराहना की। उनके अनुसार, कारोबार से जुड़े लोगों के अनुभवों को नीति निर्माण में शामिल करने से सरकारी योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है। उन्होंने रोजगार सृजन को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए स्टार्टअप क्षेत्र को शुरुआती स्तर पर सहयोग देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कैशकरो और अर्नकरो की सह-संस्थापक स्वाति भार्गवा ने कहा कि नीति निर्माण में वास्तविक उद्यमियों की भागीदारी से उनकी चुनौतियों और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे नीतियों को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिल सकती है।

    दिल्ली सरकार की योजना में शिक्षा संस्थानों को स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ना अहम है। स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर उद्यमिता की जानकारी और अपने विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे नए संस्थापकों के लिए मार्गदर्शन और नेटवर्किंग का आधार भी तैयार होगा।

    10 हजार स्टार्टअप और चार लाख से अधिक रोजगार का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी तंत्र और उद्योग जगत के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा। वित्तीय सहायता, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं को मजबूत करना इस नीति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार की पहल का उद्देश्य आने वाले वर्षों में राजधानी को नवाचार और उद्यमिता के लिए मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है।