निवेश की शुरुआत करने से पहले सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करना जरूरी है। यदि आपका उद्देश्य पांच दस या उससे अधिक वर्षों में बड़ा फंड तैयार करना है तो निवेश का तरीका अलग हो सकता है। वहीं अगर आपको कुछ ही समय में पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाना जोखिम भरा हो सकता है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है और यहां कम समय में तेजी के साथ गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ही बेहतर तरीके से बाजार के उतार चढ़ाव को संभालने का अवसर मिल सकता है।
नए निवेशकों के लिए सीधे किसी एक शेयर में बड़ी रकम लगाने के बजाय विविधता वाले विकल्पों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई बड़ी कंपनियों में हिस्सा ले सकता है। Nifty 50 जैसे व्यापक इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड बाजार की बड़ी कंपनियों में एक्सपोजर देते हैं और इनमें नियमित निवेश यानी SIP का विकल्प भी उपलब्ध होता है। SIP के जरिए हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करने से निवेश में अनुशासन बना रहता है और बाजार के अलग अलग स्तरों पर निवेश का मौका मिलता है। लंबे समय के लिए नियमित निवेश और धैर्य को महत्वपूर्ण माना जाता है।
जो निवेशक थोड़ा अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं वे अपने पोर्टफोलियो में Flexi Cap या अन्य विविध इक्विटी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में विकास की संभावनाएं अधिक हो सकती हैं लेकिन इनमें उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए केवल पिछले कुछ वर्षों का शानदार रिटर्न देखकर किसी फंड या शेयर में पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले अपने लक्ष्य निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति सीधे शेयर खरीदना चाहता है तो उसे कंपनी के कारोबार मुनाफे कर्ज प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। सिर्फ सोशल मीडिया टिप्स या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागना नुकसानदायक हो सकता है। एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में पूरी पूंजी लगाने के बजाय अलग अलग क्षेत्रों में निवेश करने से जोखिम को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।
निवेश की एक बड़ी गलती यह भी होती है कि लोग बाजार गिरते ही घबरा जाते हैं और बिना योजना के निवेश बेच देते हैं। दूसरी ओर तेजी के दौरान जरूरत से ज्यादा पैसा लगा देते हैं। बेहतर रणनीति यह है कि निवेश को लक्ष्य के अनुसार नियमित रूप से मॉनिटर किया जाए और समय समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा की जाए। SIP शुरू करना अच्छी आदत हो सकती है लेकिन केवल SIP करने से पूरी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। आपातकालीन फंड बीमा और कर्ज प्रबंधन भी मजबूत वित्तीय योजना के जरूरी हिस्से हैं।
कुल मिलाकर शेयर बाजार में निवेश के लिए कोई एक जादुई विकल्प नहीं है। नए निवेशकों के लिए सरल और विविध पोर्टफोलियो से शुरुआत करना समझदारी हो सकती है जबकि अनुभवी निवेशक अपनी रिसर्च और जोखिम क्षमता के अनुसार अलग रणनीति अपना सकते हैं। याद रखें शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और पिछले रिटर्न भविष्य के नतीजों को तय नहीं करते। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति समझें और जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें।
