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  • दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता

    दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता


    ग्वालियर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की वोट बचाओ-देश बचाओ रैली को लेकर ग्वालियर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस रैली में शामिल होने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शनिवार को दिल्ली रवाना होंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि ग्वालियर से हजारों कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इसके लिए 90 कारों और 10 बसों के साथ रेल और हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस ने रास्ते में वाहनों को रोके जाने की आशंका को देखते हुए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग माध्यमों से दिल्ली पहुंचाने की रणनीति तैयार की है।

    कांग्रेस नेताओं के मुताबिक दिल्ली में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए संगठन स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। दोपहर से ही कार्यकर्ताओं के दिल्ली रवाना होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी-4 की बैठक में यात्रा और व्यवस्थाओं को लेकर योजना बनाई गई है। इसमें कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर रामलीला मैदान पहुंच सकें।

    पार्टी आलाकमान की ओर से भी संगठन को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत ग्वालियर में शहर और ग्रामीण कांग्रेस के नेताओं ने संयुक्त रूप से तैयारियों की समीक्षा की। बीते सप्ताह एआईसीसी पर्यवेक्षक चंद्रकांत हांडोरे पूर्व सांसद प्रताप भानु शर्मा और प्रदेश प्रभारी पीसी शर्मा भी ग्वालियर पहुंचे थे। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों को रैली से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

    इस रैली के जरिए कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भाजपा की ओर से कथित वोट चोरी की जा रही है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव व्यवस्था में निष्पक्षता जरूरी है।

    ग्वालियर कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली पहुंचने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाने का फैसला किया है। उनका दावा है कि इतनी बड़ी रैली में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोके जाने की आशंका है। कांग्रेस नेताओं को डर है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों को दिल्ली के बाहरी इलाकों में ही रोकने की कोशिश की जा सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए केवल बसों और कारों पर निर्भर रहने के बजाय रेल मार्ग से भी कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना बनाई गई है।

    इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचेंगे। कांग्रेस का मानना है कि अलग-अलग माध्यमों से रवाना होने पर कार्यकर्ताओं के रामलीला मैदान तक पहुंचने में आसानी होगी। हालांकि रास्ते में रोकने की आशंका पार्टी नेताओं का दावा है और इस संबंध में किसी आधिकारिक प्रतिबंध की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल ग्वालियर कांग्रेस का पूरा जोर दिल्ली की रैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। 90 कारों 10 बसों और रेल तथा हवाई मार्ग से कार्यकर्ताओं के रवाना होने की तैयारी के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि ग्वालियर से कितने कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचते हैं और रामलीला मैदान में होने वाली रैली में पार्टी अपनी कितनी ताकत दिखा पाती है।

  • वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष

    वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज होने जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया ने जन महाभियोग चलाने का ऐलान किया है। इसके तहत 30 अक्टूबर को दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट आयोजित की जाएगी जिसमें विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली और जनसभा आयोजित करने की तैयारी है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन के नेता 30 अक्टूबर को एक साथ आकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता का फैसला सामने रखेंगे। विपक्ष ने इस आयोजन को पब्लिक इम्पीचमेंट यानी जन महाभियोग का नाम दिया है। हालांकि यह संसदीय प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं बल्कि राजनीतिक विरोध का एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम होगा। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाना है।

    विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसी मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को घेरने की रणनीति बनाई है। हालांकि निर्वाचन आयोग विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करता रहा है। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।

    30 अक्टूबर को होने वाली मॉक पार्लियामेंट के आयोजन स्थल को लेकर दिल्ली के अशोक होटल का नाम सामने आया है। हालांकि आयोजन की तैयारियों और स्थान के संबंध में अंतिम जानकारी की पुष्टि होना बाकी है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा और वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से विपक्षी दल एकजुट होकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा प्रमुखता से उठाना चाहता है।

    मॉक पार्लियामेंट के बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की बड़ी रैली प्रस्तावित है। कांग्रेस ने इसे दिल्ली चलो मार्च और वोट चोरी के खिलाफ जनआंदोलन से जोड़कर पेश किया है। केसी वेणुगोपाल के मुताबिक इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख जागरूक नागरिकों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से संपर्क कर नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में दिल्ली में मौजूदगी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

    विपक्ष की इस रणनीति को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली को कितना जनसमर्थन मिलता है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में नए टकराव का केंद्र बनता नजर आ रहा है।

  • प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता

    प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए इस बार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में बढ़ती भागीदारी के पीछे राहुल गांधी की निगरानी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को अहम वजह माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने न केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले सांसदों की मौजूदगी पर नजर रखी बल्कि गैरहाजिर रहने वाले नेताओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से सीधे संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। बैठकों में प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की कोशिश थी कि सांसद केवल सोशल मीडिया पर बयान देने तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर उतरकर भी अपनी भूमिका निभाएं। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के आने और उनके ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    इस पूरी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर चलना था। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया। इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों को भी महत्व देने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।

    राहुल गांधी की पहल का असर गठबंधन के भीतर समन्वय में भी दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया ताकि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में स्पष्ट होगा लेकिन फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता ने विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र

    CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक बड़ी भीड़ में एकजुट होने से रोकना और किसी भी संभावित हिंसक स्थिति से निपटना था। हालांकि हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर सामने आए दावे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
    रिपोर्ट के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि प्रदर्शन के आयोजक छात्रों और युवाओं को आगे रखकर सेंट्रल दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कई स्थानों पर एक साथ भीड़ जुटने और कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। 37 से अधिक स्थानों पर बैरिकेडिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों की रणनीति यह थी कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद समूह एकजुट होकर बड़ी भीड़ नहीं बना सकें और स्थिति पर समय रहते नियंत्रण रखा जा सके।
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुई झड़पों का अनुभव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दौरान प्रदर्शन की अनुमति सीमित अवधि के लिए होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक वहां डेरा जमाए रखा था। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शन से जुड़े आयोजनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्कता बरती। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों के बीच संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और बर्नर फोन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि इन माध्यमों के इस्तेमाल से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    इस बार दिल्ली पुलिस ने रियल टाइम सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल निगरानी और मैसेजिंग नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर पुलिस कमांड सेंटर को प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही और भीड़ के आकार पर नजर रखने में मदद मिली। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किए गए ताकि किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों और विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के एकजुट होने की संभावना प्रभावित हुई।
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है लेकिन अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। CJP के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी।
  • उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया

    उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी है। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतते रहना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी सफलता प्रधानमंत्री मोदी के मतदाताओं के साथ मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दर्शाती है। उमर अब्दुल्ला ने अपनी और अपनी सरकार के सहयोगियों की ओर से प्रधानमंत्री को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतना आसान नहीं है। यह सफर पहले राज्य स्तर पर और फिर केंद्र स्तर पर जारी रहा है। उन्होंने लगातार जीत के सिलसिले को आधुनिक राजनीति में एक असाधारण उपलब्धि बताया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुनावी सफलता बनाए रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे देश के प्रधानमंत्री बने और अब सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर चुके हैं।

    उमर अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह विरोध पिछले दिनों दिल्ली में हुई गठबंधन की बैठक का नतीजा है। उन्होंने प्रदर्शन को मनगढ़ंत और फर्जी बताए जाने के दावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी सार्वजनिक विरोध और राजनीतिक विवाद पर उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें खोजी पत्रकारिता की रिपोर्टों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया गया है। उन्होंने प्रदर्शन के संदर्भ में कहा कि अगर यह मामला फर्जी होता तो सबसे पहले उस अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाती, जिसकी रिपोर्ट के जरिए यह पूरा मामला सामने आया है। उमर अब्दुल्ला ने इस आधार पर प्रदर्शन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।

    श्रीनगर में कश्मीर घाटी के एक बड़े खेल आयोजन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी जीत हासिल करना आसान नहीं है और लंबे समय तक मतदाताओं के साथ जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

  • कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति

    कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति


    नई दिल्ली। संसद में विपक्ष की संख्या भले ही पहले के मुकाबले कम हो गई हो, लेकिन मॉनसून सत्र में INDIA गठबंधन सरकार को घेरने के लिए ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के साथ ही डीएमके की नाराजगी के बीच विपक्षी गठबंधन ने अपनी आगे की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।

    कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ा है, लेकिन गठबंधन अपनी उपलब्ध ताकत के साथ सरकार की नीतियों का विरोध करेगा। विपक्ष का फोकस आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाब मांगने पर रहेगा।

    खरगे की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
    मॉनसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद सत्र की तैयारियों, विपक्षी दलों के बीच तालमेल और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में संघ और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।

    डीएमके की नाराजगी के बावजूद एकजुटता की उम्मीद
    कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दल लगातार डीएमके के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि तमिलनाडु की राजनीतिक नाराजगी के बावजूद डीएमके गठबंधन के सामूहिक फैसलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी होगा।

    एक समय में एक मुद्दे पर रहेगा विपक्ष का फोकस
    मॉनसून सत्र में विपक्ष सभी मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संसद में कई महत्वपूर्ण विषय उठाए जाने हैं, लेकिन उन्हें क्रमवार तरीके से रखा जाएगा। इससे पूरे सत्र के दौरान सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    इसके अलावा विपक्ष कई मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग भी करेगा। रणनीति यह है कि जनता से जुड़े विषयों को प्रमुखता देकर सरकार से जवाब मांगा जाए और संसद में विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।

  • मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

    मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है।

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा।


    संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है।


    दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीति

    द्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।


    सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीति

    सरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

  • संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान

    संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने वाला है। अब एक ओर जहां दलों की टूट के बाद NDA मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA का संख्याबल कुछ घट गया है। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए अब भी दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है, लेकिन अगर वह लोकसभा में दो और दलों को साध लेता है, तो इसके काफी करीब पहुंच सकता है। इस नंबरगेम को विस्तार से समझते हैं।

    अगर लोकसभा में सभी 540 मौजूदा सांसद उपस्थित होते हैं और वोट देते हैं, तो दो तिहाई बहुमत के लिए 360 मतों की जरूरत होगी। जब अप्रैल में संविधान संशोधन बिल लाया गया, तब सदन में 548 लोकसभा सांसदों ने वोट डाले थे। इनमें से 298 समर्थन और 230 खिलाफ थे। जबकि, 11 सांसद अनुपस्थित थे। इसके चलते दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 352 पर आ गया था।


    दल टूटने के बाद नंबर कहां पहुंचे

    तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया था। ये दल एनडीए को समर्थन दे रहा है और सदन में अलग बैठने का अनुरोध किया है। वहीं, शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने NDA में शामिल शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है। इसके चलते गठबंधन 319 पर पहुंच गया है। हालांकि, अब तक 360 बहुमत का आंकड़ा दूर है।


    विपक्ष की ताकत समझें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद 225 पर पहुंचे INDIA गठबंधन को हाल में हुईं पार्टियों में टूट से बड़ा झटका लगा है। 26 सांसदों के जाने के बाद विपक्ष का लोकसभा में आंकड़ा घटकर 199 पर आ गया है। वहीं, 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने भी खुद को इस गठबंधन से दूर कर लिया है। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके में दूरी बढ़ गई है।

    INDIA अलायंस में सबसे बड़ा दल 98 सांसदों के साथ कांग्रेस है। वहीं, इसके बाद 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी है। इस लिस्ट में टूट से पहले टीएमसी तीसरे नंबर पर थी। वहीं, शिवसेना यूबीटी चौथे स्थान पर थी, लेकिन अब आंकड़ा बदल गया है।


    कैसे आंकड़ा पा सकता है एनडीए

    इस मुहिम में 5 निर्दलीय सांसदों की भूमिका अहम हो जाती है। दरअसल, अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद जेल में हैं। अब अगर एनडीए 4 सांसदों वाली YSRCP का समर्थन हासिल करता है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी और डीएमके से कुछ बात बनती है, तो एनडीए को फायदा हो सकता है।

    आसान भाषा में समझें, तो शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं और डीएमके के पास 22 सदस्य हैं। अगर ये दोनों दल वोटिंग से दूर रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 330 पर आ जाएगा। वहीं, निर्दलीय और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की मदद से एनडी 9 वोट और जुटा लेगा, लेकिन इसके बाद भी 2 मतों की और दरकार होगी।

  • इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा

    इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा


    नई दिल्ली।
    हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बाद ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। सोमवार को नई दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक में वीसीके (VCK) और वामपंथी दलों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर जोरदार हमला बोला है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर हुई डीएमके की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उसने गठबंधन में कांग्रेस के मौजूद रहने पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

    डीएमके की दो टूक- ‘कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं’
    डीएमके के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा तभी बनेगी, जब कांग्रेस इस गुट का हिस्सा नहीं होगी। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम चुनाव प्रणाली ‘SIR’ के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।” नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस द्वारा डीएमके से नाता तोड़ने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा और सहयोगियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।


    राहुल गांधी पर वामदलों का सीधा हमला

    केरल में कांग्रेस और वामदलों के बीच की तल्खी बैठक के दौरान खुलकर सामने आ गई। सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार और डी. राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल चुनाव के दौरान लेफ्ट को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया था।

    वामपंथी नेताओं ने डीएमके के गठबंधन से अलग होने के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया और कई आरोप लगाए। जैसे- कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव खत्म होने के ठीक बाद अचानक टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ पार्टी (डीएमके) को उकसाने का काम किया है। कांग्रेस के इसी रवैये के कारण डीएमके ने गठबंधन छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया।


    कांग्रेस की रणनीति से बिखर रहा है विपक्ष: वीसीके

    बैठक के दौरान वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पार्टी के हालिया फैसलों ने कई सहयोगी दलों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने गठबंधन के भविष्य पर चिंता जताते हुए कुछ अहम बिंदु रखे: जैसे- केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की जो रणनीति रही है, उसने गठबंधन के उन प्रमुख स्तंभों को कमजोर किया है जो अब तक मजबूती से खड़े थे। कांग्रेस के इस रवैये से मुख्य रूप से डीएमके, टीएमसी (TMC) और सीपीएम (CPM) जैसी अहम पार्टियों को नुकसान पहुंचा है। वीसीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकजुटता के बड़े लक्ष्य को देखते हुए कांग्रेस की यह रणनीति न तो वांछनीय है और न ही किसी भी तरह से फायदेमंद।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल माकपा के राज्यसभा सदस्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का विषय उठाया। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केरल में वाम नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए।

    सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नीति के तहत पार्टी की ओर से चुनाव में एक विषय उठाया गया था। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी कहा कि अब इन बातों को भूलकर आगे बढ़ना है और मिलकर भाजपा का मुकाबला करना है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि गठबंधन के घटक दलों को एक दूसरे की आलोचना से बचना चाहिए।


    क्या रहा बैठक का नतीजा?

    विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।

    सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है।

    बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।