Tag: India Bronze Medal

  • आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल

    आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। नागोया में गुरुवार को रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स मुकाबले में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। भारतीय जोड़ी ने नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर 6 मिनट 13.25 सेकेंड का समय दर्ज किया। मुकाबले में दोनों रोअर्स ने शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और लंबे समय तक पदक की मजबूत स्थिति में बने रहे।

    सतनाम सिंह और सलमान खान 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर चल रहे थे। हालांकि आखिरी 500 मीटर में उनकी रफ्तार थोड़ी कम हुई और भारतीय जोड़ी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इसके बावजूद दोनों ने अपनी स्थिति बरकरार रखी और भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया। चीन की यी शुडी और यीदे नी की जोड़ी ने 6 मिनट 9.37 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। उज्बेकिस्तान की पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव की जोड़ी ने 6 मिनट 10.49 सेकेंड के समय के साथ सिल्वर हासिल किया।

    इस पदक के साथ सतनाम सिंह ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार रोइंग में मेडल जीता है। इससे पहले उन्होंने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में पुरुषों के क्वाड्रपल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। अब डबल स्कल्स में सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी ने भारत को एक और पदक दिलाया है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले सलमान खान का रोइंग करियर साल 2018 में शुरू हुआ। वह भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हुए थे। उनके कोचों ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें रोइंग टीम का हिस्सा बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने बटालियन और इंटर सेंटर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। एक समय ऐसा भी आया जब सलमान ने खेल छोड़ने के बारे में सोचा लेकिन कोचों के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्हें आर्मी रोइंग नोड में प्रशिक्षण का मौका मिला।

    साल 2023 में सलमान को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में शामिल किया गया। 2024 एशियन रोइंग कप में गोल्ड जीतने के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोशन मिला।

    वहीं पंजाब के मानसा जिले के पट्टा मालुका गांव के सतनाम सिंह ने रोइंग से पहले नेशनल लेवल पर हैंडबॉल खेला था। 2018 में ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क की सलाह पर उन्होंने रोइंग को अपनाया। इसके बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई। सतनाम 2018 यूथ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में भी खिताब जीत चुके हैं।

    इस मुकाबले में भारत को एक और पदक की उम्मीद थी। पुरुषों के सिंगल स्कल्स फाइनल में बलराज पंवार 6 मिनट 54.80 सेकेंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे। वह 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थे लेकिन अंतिम 500 मीटर में पीछे हो गए। इसके बावजूद सतनाम और सलमान की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रोइंग में भारत को ब्रॉन्ज दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया।

  • 14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल

    14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में मीणा ने भारत के लिए इस खेल का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताकुया कुरोसाका के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम एशियन गेम्स के पदक विजेताओं में दर्ज करा दिया।

    मीणा का यह सफर आसान नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शेरविन नुगुइट के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। निर्णायक गेम में एक समय वह पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। इस वापसी ने उन्हें 4-3 से जीत दिलाई और इसी के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल की इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक भी सुनिश्चित हो गया था। सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी के खिलाफ हार के बाद मीणा का अभियान ब्रॉन्ज मेडल के साथ समाप्त हुआ।

    जय मीणा की सॉफ्ट टेनिस तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में थी और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में दाखिले के बाद उनका ध्यान स्कूल में बने सॉफ्ट टेनिस कोर्ट की तरफ गया। शुरुआत में वह खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे और बाद में बॉल बॉय के तौर पर उनकी मदद करने लगे। इसी दौरान इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने खुद सॉफ्ट टेनिस खेलना शुरू कर दिया।

    स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत करने वाले जय मीणा ने जल्द ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने जापान जाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पुरुष टीम और डबल्स स्पर्धा में भी मध्य प्रदेश के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके बाद जय मीणा की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2025 में वह पुरुष सिंगल्स के नेशनल चैंपियन बने। एशियन गेम्स 2022 में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही पुरुष टीम स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

    वर्ष 2024 में जय मीणा ने आध्या तिवारी के साथ वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में पहला पदक दिलाया। इसके बाद 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

    जय मीणा के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल उनके लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप के एथलीट के रूप में यह उनका तीसरा एशियन गेम्स है। इससे पहले वह जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब नागोया में सॉफ्ट टेनिस का पहला भारतीय एशियन गेम्स पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।