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  • केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए

    केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए


    नई दिल्ली/केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है। असम में 126 सीटों, केरल में 140 सीटों और पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा और नतीजों की घोषणा 4 मई को होगी। इन चुनावों में कुल 1,899 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं और राज्य-केन्द्रीय स्तर पर राजनीतिक संतुलन पर बड़ा असर डालने की संभावना है।

    केरल में इस बार 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में हैं। हालांकि, बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या के कारण कई निर्वाचन क्षेत्र बेहद प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। कुल 27 लाख मतदाता राज्य के 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हुए हैं। मतदाता सुबह से ही अपने मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े नजर आए। केरल में तीन मुख्य गठबंधन- लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के बीच कड़ा मुकाबला है। एलडीएफ लगातार पांचवीं बार सत्ता में बने रहने का लक्ष्य लेकर चुनाव लड़ रहा है, जबकि यूडीएफ और एनडीए उसे चुनौती दे रहे हैं।

    पुडुचेरी में कुल 9.50 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें 24,919 प्रथम बार वोट डालने वाले शामिल हैं। यहां कुल 294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश चार क्षेत्रों- पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम से मिलकर बना है। वर्तमान में ‘ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस’ (AINRC) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, जिसकी कमान मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के हाथों में है और भाजपा का समर्थन उसे प्राप्त है।

    असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिलाएं शामिल हैं। लगभग 2.5 करोड़ पंजीकृत मतदाता इन चुनावों में भाग लेने के लिए योग्य हैं। राज्य ने मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 31,490 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। असम में यह चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार में वापसी की कोशिश कर रही है। यह चुनाव 2023 में हुए परिसीमन के बाद पहला चुनाव है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की संभावना है।

    मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता इस बार भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो लोकतंत्र में नागरिकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाती हैं। इस चुनाव का परिणाम न केवल राज्य सरकारों के भविष्य को तय करेगा बल्कि देश के राजनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डालेगा।

  • भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    नई दिल्ली। भारत और कनाडा के संबंधों में नई रफ्तार देखने को मिली जब विदेश मंत्री S. Jaishankar ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश रिश्तों को सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर खुशी हुई और आगे की साझेदारी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है।

    मुंबई से दिल्ली तक-पहला आधिकारिक दौरा
    प्रधानमंत्री कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के पहले आधिकारिक दौरे पर आए हैं। शुक्रवार को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कारोबारी जगत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों, इनोवेटर्स और एजुकेटर्स से बातचीत कर उन्होंने आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने की बात कही। मुंबई पहुंचते ही उन्होंने भारत को “दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था” बताया और साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की इच्छा जताई।

    मोदी से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
    नई दिल्ली पहुंचने के बाद कार्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलने आए हैं। दोनों देशों को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” बताते हुए उन्होंने ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही। हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच डेलीगेशन-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, जरूरी खनिज, कृषि, शिक्षा, रिसर्च और लोगों के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    पिछली बैठकों की समीक्षा, आगे की राह तय
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में हुई पिछली मुलाकातों के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी दोनों की मौजूदगी संभावित है, जहां क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचार साझा किए जाएंगे।

    यह दौरा ऐसे दौर में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों को संतुलित और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आपसी संवेदनशीलताओं का सम्मान, मजबूत आर्थिक गतिविधियां और लोगों के बीच गहरे संबंध-इन्हीं आधारों पर नई साझेदारी की नींव रखी जा रही है।

    सकारात्मक संदेश के साथ आगे बढ़ते कदम
    कार्नी ने मुंबई से साझा वीडियो में कहा कि भारत के साथ सहयोग कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा। वहीं जयशंकर की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि भारत भी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    दोनों देशों के बीच यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का संकेत मानी जा रही है-जहां ऊर्जा से लेकर एआई तक, कई क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी जा सकती है।