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  • FATF में पाकिस्तान पर भारत का बड़ा दांव ऑपरेशन सिंदूर के साक्ष्यों से ग्रे लिस्ट में भेजने की तैयारी

    FATF में पाकिस्तान पर भारत का बड़ा दांव ऑपरेशन सिंदूर के साक्ष्यों से ग्रे लिस्ट में भेजने की तैयारी


    नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है।

    ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी।

    दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।

  • क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज

    क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज


    नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है।

    ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी।

    दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।

  • चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम

    चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम


    नई दिल्ली। चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने 6 दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अभ्यास 19 से 24 जनवरी तक पूर्वी सियांग जिले के सिगार में आयोजित किया गया, जिसका मकसद इंटर-फोर्स कोऑर्डिनेशन और युद्ध की तैयारी को और मजबूत करना था।

    अग्नि परीक्षा: युद्धक्षेत्र की नई तैयारी
    रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह अभ्यास दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और संयुक्त कौशल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    इस अभ्यास में स्पीयर कोर के स्पीयरहेड गनर्स ने पैदल सेना रेजिमेंट और ITBP कर्मियों के साथ मिलकर इसे संचालित किया। यह अपनी तरह की पहली सहयोगात्मक गोलाबारी (Artillery firing) प्रशिक्षण पहल है।

    तोपखाने की ताकत को समझना, लक्ष्य यही
    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था कि नॉन-आर्टिलरी (non-artillery) कर्मियों को तोपखाने के अभियानों और प्रक्रियाओं से परिचित कराकर युद्धक्षेत्र में तालमेल बढ़ाया जा सके।

    कर्नल रावत ने कहा कि इससे पारंपरिक भूमिकाओं के बीच के अलगाव को तोड़ने में मदद मिलती है और गतिशील युद्ध परिदृश्यों में गोलाबारी के एकीकरण की समझ बढ़ती है।

    आर्टिलरी फायरिंग का प्रशिक्षण
    प्रशिक्षण के दौरान पैदल सेना और ITBP कर्मियों को अनुभवी गनर्स की देखरेख में स्वतंत्र रूप से कई तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
    इस प्रक्रिया से आपसी विश्वास, समन्वय और तत्परता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

    अग्नि परीक्षा का पहला चरण: भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी
    लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह अभ्यास भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए एकीकृत युद्ध क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    इस अभ्यास ने भारतीय सेना की ज्वाइंट कार्यकुशलता, मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
    चीन सीमा के पास यह अभ्यास भारतीय सेना और ITBP की तैयारी, एकता और युद्ध कौशल का एक मजबूत संदेश है। ‘अग्नि परीक्षा’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हर स्तर पर तैयार है।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर लाचुंगपा भारत-चीन सीमा सिक्किम से गिरफ्तार

    अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर लाचुंगपा भारत-चीन सीमा सिक्किम से गिरफ्तार


    भोपाल ।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव के संरक्षण के लिये लगातार समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। इस दिशा में कार्यवाही करते हुए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश एवं वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली ने 10 साल से वांछित, अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर यांगचेन लाचुंगपा को2 दिसम्बर 2025 को भारत-चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास लाचंग, मंगन, जिला उत्तर सिक्किम (सिक्किम) में कई महीनों की कड़ी मेहनत के उपरांत सफलतापूर्वक कार्यवाही करते हुए गिरफ्तार किया है।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम में बाघ एवं पेंगोलिन के अवैध शिकार और बाघ की हड्डियों व पेंगोलिन के स्केल की नेपाल के रास्ते चीन में अवैध तस्करी करने वाले गिरोह के विरुद्ध जुलाई 2015 में प्रकरण दर्ज किया गया था, जिसमें यांगचेन लाचुंगपा वांछित थी। प्रकरण की गंभीरता देखते हुए वन मुख्यालय ने इसे मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स को विवेचना के लिये सौंपा गया था। एसटीएसएफ ने एक संगठित एवं अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यांगचेन लाचुंगपा अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्करी गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जिसका नेटवर्क भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ है। यांगचेन लाचुंगपा के गिरोह के कई देशों में फैले नेटवर्क को देखते हुए भारत सरकार के अनुरोध पर इंटरपोल के द्वारा यांगचेन लाचुंगपा विरुद्ध रेड नोटिस भी जारी किया गया है, जिससे उसे किसी भी देश में सबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया जा सके। यांगचेन लाचुंगपा मूल रूप से चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत की निवासी है एवं भारत में मुख्यतः दिल्ली एवं सिक्किम में रहती थी। यांगचेन को पहली बार सितम्बर 2017 में भी हिरासत में लेकर ट्रांजिट रिमांड के लिये पेश किया गया था, लेकिन न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद फरार हो गई थी।उसकी अग्रिम जमानत को मध्यप्रदेश के उच्च न्यायालय जबलपुर ने भी वर्ष 2019 में खारिज कर दिया था।

    अपराधी यांगचेन लाचुंगपा गिरफ्तारी से बचने लगातार एजेंसियों को चकमा दे रही थी, अंत में 2 दिसम्बर 2025 को उसे मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स एवं केंद्र सरकार की वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली की संयुक्त टीम ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में कम तापमान के क्षेत्र में जाकर योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर लाचुंग, मंगन (सिक्किम) से गिरफ्तार कर न्यायलय गंगटोक के समक्ष पेश कर मध्यप्रदेश शासन का ठोस पक्ष रखने के बाद ट्रांजिट वारंट 3 दिसम्बर 2025 को रात्रि में प्राप्त कर उसे मध्यप्रदेश लाया जा रहा है। इस कार्यवाही में सिक्किम पुलिस का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

    यह देश का पहला मामला है जिसमें शिकारियों, कूरियर बिचौलिये और तस्करों सहित 31 व्यक्तियों के पूरे गिरोह को गिरफ्तार किया गया है।पूर्व में गिरफ्तार सभी आरोपियों को सजा भी मिल चुकी है। आरोपी यांगचेन को न्यायालय नर्मदापुरम में पेश कर रिमांड मांगा जायेगा, जिससे इस गंभीर प्रकरण में अग्रिम विवेचना की जा सके। इस सफलतापूर्वक कार्यवाही में शामिल एसटीएसएफ के दल को उत्कृष्ट कार्य के लिये पुरूस्कृत किया जायेगा।