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  • PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

    PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को विशेष स्थान मिलता रहा है। विदेश दौरों के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं को दिए गए उनके उपहार न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हैं, बल्कि देश के हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाते हैं।

    इंडोनेशियाई संसद की स्पीकर पुआन महारानी को प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा की प्रसिद्ध इकट (बंधा) कला से तैयार रेशमी वस्त्र भेंट किया। संबलपुर, नुआपटना और बरगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार यह हैंडलूम कला अपनी जटिल टाई-एंड-डाई तकनीक, आकर्षक डिजाइनों और जीवंत रंगों के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां के गवर्नर-जनरल को बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। प्राकृतिक रंगों से तैयार इस लोक कला में मोर, वृक्ष और प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण है, जो समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देता है।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की पत्नी को कश्मीर की पारंपरिक कढ़ाई से सजी शुद्ध ऊन की स्टोल भेंट की गई। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित महीन फूलों की कढ़ाई वाली यह स्टोल कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज को दो विशेष उपहार भी दिए। पहला, जनजातीय ढोकरा कला से निर्मित धातु की नाव, जिसे प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। आदिवासी जीवन को दर्शाने वाली यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का संदेश देती है।

    दूसरे उपहार के रूप में उन्हें इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल है। यह भारतीय कॉफी उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पारंपरिक लकड़ी नक्काशी कला से तैयार हस्तनिर्मित जालीदार हाथी भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई यह कलाकृति भारतीय शिल्पकारों की बारीक कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। यह भारत की प्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो भारतीय कारीगरों की सूक्ष्म शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को प्रधानमंत्री मोदी ने दो खास उपहार दिए। पहला, हिमालयी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) टोपी, जबकि दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक, जिसे न्यूजीलैंड में आयोजित एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में भेंट किया गया।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) मूर्ति भी भेंट की। ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता क्रिस हिपकिंस को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की गई। धातु के तारों, मोतियों, सीक्विन और अन्य सजावटी तत्वों से सजी यह कलाकृति भारतीय कढ़ाई कला की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक स्मृति चिह्न नहीं हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, लोक कलाओं और देश के कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।

  • दिवाली हुई ग्लोबल: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल, भारत में जश्न-PM मोदी बोले, दुनिया में बढ़ेगी दिवाली की लोकप्रियता

    दिवाली हुई ग्लोबल: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल, भारत में जश्न-PM मोदी बोले, दुनिया में बढ़ेगी दिवाली की लोकप्रियता


    नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े और पवित्र त्योहारों में से एक दिवाली को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐतिहासिक मान्यता मिल गई है। यूनेस्को ने बुधवार को दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल करने की घोषणा की। यह फैसला नई दिल्ली के लाल किले में हो रही 20वीं अंतरसरकारी समिति की बैठक में लिया गया, जिसमें 78 देशों के नामांकन पर विचार किया जा रहा है।

    PM मोदी ने जताई खुशी

    यूनेस्को के इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय समुदाय के लिए यह गर्व का क्षण है। उन्होंने एक्स पर लिखा-
    “दीपावली हमारी संस्कृति और मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। इसे वैश्विक विरासत सूची में शामिल किए जाने से इस उत्सव की लोकप्रियता और बढ़ेगी। यह त्योहार सत्य, प्रकाश और मानवता की विजय का संदेश देता है।”

    भारत पहली बार कर रहा है समिति की मेजबानी

    यह पहला अवसर है जब भारत यूनेस्को की ICH समिति की बैठक की मेजबानी कर रहा है। लाल किले पर आयोजित इस सत्र में हजारों वर्षों पुरानी भारतीय परंपराओं को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। दिवाली को सूची में शामिल किए जाने की घोषणा होते ही “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने इसे बताया ऐतिहासिक सम्मान

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा-
    “यह सिर्फ त्योहार नहीं, भारतीय समाज की भावनात्मक धरोहर है। मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों से लेकर हाथों से सजावट तैयार करने वाले कारीगरों तक-लाखों लोग इस परंपरा से जुड़े हैं। यूनेस्को का टैग हमें इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी देता है।”

    दिल्ली में मनाया जाएगा विशेष उत्सव

    दिवाली को वैश्विक विरासत सूची में जगह मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने शहर को रोशनी से सजाने, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने और विशेष दीप-प्रज्वलन समारोह की तैयारी की है। कई ऐतिहासिक इमारतों को शानदार लाइटिंग से सजाया गया है।

    क्यों है दिवाली इतनी खास?

    दिवाली भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में रहने वाले करोड़ों लोगों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है।

    हिंदू, सिख, जैन और कई अन्य समुदाय इसे अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाते हैं।

    यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है।

    उत्तर भारत में इसे भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है।

    अमावस्या की रात घरों में दीये जलाना, रंगोली बनाना, लक्ष्मी पूजा, मिठाइयाँ बांटना और नई खरीदारी करना इस उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    भारत की ये परंपराएँ पहले से सूची में शामिल हैं

    दिवाली के साथ भारत की कुल 15 सांस्कृतिक परंपराएँ अब यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची का हिस्सा हैं। इनमें शामिल हैं-

    रामलीला

    योग

    कुंभ मेला

    कोलकाता की दुर्गा पूजा

    गुजरात का गरबा

    वैदिक मंत्रोच्चार परंपरा

    यूनेस्को की सूची में दिवाली का शामिल होना सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक शक्ति का प्रमाण है। यह त्योहार अब दुनिया भर में भारतीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता का और मजबूत प्रतीक बन जाएगा।