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  • AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान

    AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी की तेजी से बढ़ती मांग अब डेटा सेंटर उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रही है। देश की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 में करीब 1.6 गीगावाट है और इसके 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस विशाल विस्तार के लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती तैनाती डेटा सेंटर सेक्टर के इस तेज विस्तार की सबसे बड़ी वजह बनने जा रही है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली छमाही में देश के डेटा सेंटर बाजार में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की पहली छमाही के औसत की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को बड़े स्तर पर डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत पड़ रही है। इसी दौरान डेटा सेंटर की आपूर्ति में भी तेजी देखी गई और करीब 85 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई।

    नई क्षमता का बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में केंद्रित रहा। हालांकि पहले से बुक की जा चुकी क्षमता को तेजी से उपलब्ध कराए जाने के कारण बाजार में खाली डेटा सेंटर क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इतनी कम रिक्त क्षमता इस बात का संकेत है कि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पहले से ही बड़ी क्षमता सुरक्षित करने में जुटी हुई हैं।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार की तस्वीर बदल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये कंपनियां नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपनी सेल्फ बिल्ड सुविधाओं के माध्यम से विकसित करने की तैयारी कर रही हैं। अनुमान है कि केवल हाइपरस्केल सेल्फ बिल्ड परियोजनाओं से ही 2029 तक करीब 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इससे भारत के तकनीकी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    बड़े निवेश के कारण हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर तेजी से गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकते हैं। वहीं मुंबई और चेन्नई जैसे पहले से स्थापित बाजार भी अपनी क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में देश के कई शहर वैश्विक क्लाउड और एआई सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।

    डेटा सेंटर उद्योग को सरकारी नीतियों से भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है जिसे 31 मार्च 2047 तक बढ़ाया गया है। इस नीति से 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आने की बात कही गई है। इससे भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक डेटा सेंटर विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर करीब 4 अरब डॉलर मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक जैसे आईटी उपकरणों पर करीब 88 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। भविष्य में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी एक अहम विकल्प बन सकते हैं। 2033 तक इन तकनीकों के विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर परिसरों को ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर एआई की बढ़ती ताकत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और बड़े निवेश का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।