Tag: India Defence

  • अर्जेंटीना ने रिटायर किए पुराने A-4 जेट, तेजस छोड़ अमेरिकी F-16 पर जताया भरोसा

    अर्जेंटीना ने रिटायर किए पुराने A-4 जेट, तेजस छोड़ अमेरिकी F-16 पर जताया भरोसा



    नई दिल्ली। अर्जेंटीना ने अपने पुराने A-4AR/OA-4AR फाइटिंगहॉक लड़ाकू विमानों को आधिकारिक तौर पर सेवा से रिटायर कर दिया है। इन विमानों ने करीब छह दशक तक अर्जेंटीना की वायुसेना में अहम भूमिका निभाई। अब उनकी जगह अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान लेने जा रहे हैं। खास बात यह है कि अर्जेंटीना पहले भारत के स्वदेशी तेजस फाइटर जेट को खरीदने पर विचार कर रहा था, लेकिन आखिरकार उसने अमेरिकी F-16 को चुना।

    अर्जेंटीनाई वायुसेना ने सैन लुइस प्रांत के विला रेनॉल्ड्स एयर बेस पर आयोजित कार्यक्रम में फाइटिंगहॉक बेड़े को विदाई दी। यह एयर बेस अर्जेंटीना की 5वीं एयर ब्रिगेड का मुख्य केंद्र था, जहां A-4 विमान तैनात थे। वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि पुराने विमानों की ऑपरेशनल लागत लगातार बढ़ रही थी और उनका रखरखाव भी मुश्किल होता जा रहा था। इसी वजह से उन्हें सेवा से हटाने का फैसला लिया गया।

    A-4 फाइटिंगहॉक दरअसल पुराने अमेरिकी A-4 स्काईहॉक का अपग्रेडेड वर्जन था, जिसे खास तौर पर अर्जेंटीना के लिए तैयार किया गया था। लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पुराने विमानों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया था। इनमें F-16 के शुरुआती मॉडल में इस्तेमाल होने वाला AN/APG-66 रडार लगाया गया था। इसके अलावा विमान AIM-9M साइडवाइंडर मिसाइलों से लैस थे और इनमें आधुनिक कॉकपिट, मल्टीफंक्शन डिस्प्ले और एडवांस नेविगेशन सिस्टम भी दिया गया था।

    अर्जेंटीना को इन विमानों की डिलीवरी 1990 के दशक में शुरू हुई थी। कुल 32 A-4AR और चार OA-4AR विमान वायुसेना में शामिल किए गए थे। हालांकि समय के साथ इनकी तकनीक पुरानी पड़ने लगी और रखरखाव महंगा होता गया। ऐसे में अर्जेंटीना ने अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए नए लड़ाकू विमान की तलाश शुरू की।

    भारत का तेजस लड़ाकू विमान इस दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा था। दोनों देशों के बीच इसे लेकर कई दौर की बातचीत भी हुई थी। लेकिन तेजस में इस्तेमाल होने वाले कुछ ब्रिटिश मूल के पार्ट्स अर्जेंटीना के लिए बड़ी बाधा बन गए। दरअसल, फॉकलैंड युद्ध के बाद से ब्रिटेन ने अर्जेंटीना को अपने रक्षा उपकरणों और पार्ट्स की बिक्री पर रोक लगा रखी है। तेजस में ब्रिटिश तकनीक से जुड़े कई पार्ट्स होने के कारण अर्जेंटीना यह विमान नहीं खरीद सका।

    आखिरकार अर्जेंटीना ने अमेरिकी F-16 फाइटर जेट खरीदने का फैसला किया। इसे उसकी वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं भारत के लिए यह मौका हाथ से निकलने जैसा रहा, क्योंकि तेजस को पहला बड़ा विदेशी ग्राहक मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी।

  • आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर भारत की तेज रफ्तार और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती

    आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर भारत की तेज रफ्तार और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती


    नई दिल्ली :
    भारत ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और अब देश नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर के युग के लिए खुद को तैयार कर रहा है इसका उद्देश्य सीधे टकराव के बजाय तकनीक और उन्नत सिस्टम के जरिए दुश्मन के हमलों को पहले ही निष्क्रिय करना है इसी रणनीति के तहत सरकार ने लगभग ₹2.19 लाख करोड़ की लागत वाली कई प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है जो आने वाले समय में देश की सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएंगी

    इस पूरी रणनीति के केंद्र में ‘अनंत शस्त्र’ QRSAM सिस्टम है जो क्विक रिएक्शन के जरिए कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और मिसाइल जैसे खतरों को तेजी से नष्ट करने में सक्षम होगा आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन और सटीक हमले तेजी से बढ़ रहे हैं वहां यह सिस्टम भारतीय वायु रक्षा को बेहद मजबूत बनाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दुश्मन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी क्योंकि यह सिस्टम तेजी से प्रतिक्रिया देकर हमलों को शुरुआती चरण में ही खत्म करने की क्षमता रखता है

    इसके साथ ही भारत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली LRSAM प्रणाली पर भी काम कर रहा है जिसे रूस की S-400 प्रणाली के समकक्ष माना जा रहा है यह सिस्टम दुश्मन के विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से ही निष्क्रिय कर सकता है जिससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी इस दिशा में हो रहे निवेश का उद्देश्य विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करना और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना है

    हवाई ताकत के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA अब डिजाइन चरण से आगे बढ़कर विकास के चरण में पहुंच चुका है यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट होगा जिसमें दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता होगी साथ ही स्वदेशी इंजन पर भी काम चल रहा है जिससे भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल होगी आने वाले समय में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भी काम किया जाएगा जिन्हें भविष्य के युद्धों के लिए ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ माना जा रहा है

    सिर्फ वायु शक्ति ही नहीं बल्कि समुद्री और साइबर सुरक्षा पर भी भारत का ध्यान केंद्रित है नौसेना के लिए एंटी ड्रोन और टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के संचार और रडार सिस्टम को जाम करने में सक्षम होंगे इससे भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा और मजबूत होगी

    इसके अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन DRDO आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर भी बड़ा निवेश कर रहा है ताकि साइबर हमलों को रोका जा सके और स्वायत्त हथियारों का बेहतर उपयोग हो सके मिसाइल सिस्टम में भी ‘अस्त्र’ ‘नाग’ और ‘ध्रुवास्त्र’ के नए संस्करणों पर काम चल रहा है जिससे उनकी मारक क्षमता और सटीकता और अधिक बढ़ेगी

    इस पूरी रणनीति के पीछे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हाल के आतंकी हमलों जैसे घटनाक्रमों का भी बड़ा प्रभाव माना जा रहा है इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने रक्षा बजट में लगातार वृद्धि कर रहा है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा को और मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा