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  • भारत-ईयू एफटीए से यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के दवा बाजार के द्वार खुले

    भारत-ईयू एफटीए से यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के दवा बाजार के द्वार खुले

    नई दिल्ली | भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारतीय दवा और मेडिकल उपकरण उद्योग को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत भारत को यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के फार्मा और मेडिकल डिवाइस बाजार तक सीधी पहुंच मिली है। सरकार का कहना है कि इससे भारत की वैश्विक फार्मा ताकत और मजबूत होगी।

    भारतीय दवा उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

    रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, यह एफटीए भारतीय दवा कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने, नई नौकरियां पैदा करने और भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
    मंत्रालय ने कहा कि इससे भारत की पहचान ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में और सुदृढ़ होगी।

    रोजगार और एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा

    मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते से—

    कुशल और औद्योगिक रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की भागीदारी मजबूत होगी

    भारत का वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव और गहरा होगा

    जेपी नड्डा बोले— नए अवसरों के दरवाजे खुले

    केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह एफटीए दवा और मेडिकल उपकरण उद्योग के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है।

    उन्होंने कहा,

    “यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार तक पहुंच और भारतीय मेडिकल उपकरणों पर कम टैरिफ से इस सेक्टर की तेजी से वृद्धि होगी।”

    नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वास्थ्य और निर्माण क्षेत्र में एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

    ‘मेड इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    इस एफटीए से—

    ‘मेड इन इंडिया’ मेडिकल उपकरणों पर टैरिफ कम होगा

    रसायन, उर्वरक, दवाएं, कॉस्मेटिक, साबुन और डिटर्जेंट जैसे क्षेत्रों में तेज विकास होगा

    उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और एमएसएमई क्लस्टर विकसित होंगे

    राज्यों और निर्यात केंद्रों को फायदा

    यह समझौता गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के औद्योगिक केंद्रों के लिए भी नए अवसर लाएगा।
    समुद्री तटीय निर्यात केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार, प्रोसेसिंग और निर्यात आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

    रणनीतिक साझेदारी की दिशा में अहम कदम

    मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए साझा मूल्यों को मजबूत करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत व यूरोप दोनों के लिए समावेशी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विकास की नींव रखता है।

    भारत-ईयू एफटीए से भारतीय दवा उद्योग को यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिली है।
    इस समझौते से रोजगार, एमएसएमई, निर्यात और ‘मेड इन इंडिया’ को बड़ी ताकत मिलने की उम्मीद है।

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।