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  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी उपलब्धि, 104 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड हुए डिजिटल

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी उपलब्धि, 104 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड हुए डिजिटल


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, अब तक 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को 93 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) से जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही यह मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क में शामिल हो गया है।

    सरकार के अनुसार, सितंबर 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य पूरे देश में ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, प्रभावी और एक-दूसरे से जुड़ी हो सकें। इस व्यवस्था के जरिए मरीज अपने मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं। अस्पतालों में कागजी प्रक्रिया कम होती है, पंजीकरण और इलाज में लगने वाला समय घटता है तथा मरीज, डॉक्टर, अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।

    मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) के रूप में एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई जाती है। मरीज की सहमति के आधार पर यह आईडी उसके मेडिकल रिकॉर्ड को अस्पतालों, लैब, बीमा कंपनियों और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से सुरक्षित तरीके से जोड़ती है।

    सरकार ने हाल ही में आरोग्य सेतु 2.0 को भी इस मिशन के तहत डिजिटल हेल्थ एप के रूप में लॉन्च किया है। इसके जरिए नागरिक ABHA अकाउंट बना सकते हैं, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड देख और प्रबंधित कर सकते हैं, टेली-कंसल्टेशन ले सकते हैं, अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आसपास उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा वियरेबल डिवाइस के जरिए स्वास्थ्य की निगरानी की सुविधा भी उपलब्ध है।

    फैक्टशीट के मुताबिक, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण की प्रक्रिया को काफी आसान और तेज बना दिया है। 18 जून तक देशभर में 23.21 करोड़ से अधिक ABHA लिंक्ड डिजिटल टोकन जारी किए जा चुके हैं।

    सरकार ने बताया कि 18 जून तक इस योजना के तहत अस्पतालों को 107 करोड़ रुपये से अधिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, लैब और फार्मेसी को 2.95 करोड़ रुपये से ज्यादा तथा डिजिटल हेल्थ समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को 26 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है।

    इसके अलावा 2,200 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को ई-सुश्रुत क्लिनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। सी-डैक द्वारा विकसित यह हल्का हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों को मरीजों के रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने में मदद कर रहा है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर, तेज तथा पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।

  • इलाज के लिए दुनिया की पहली पसंद बन रहा भारत, मेडिकल टूरिज्म में तेज़ी से बढ़ोतरी का अनुमान

    इलाज के लिए दुनिया की पहली पसंद बन रहा भारत, मेडिकल टूरिज्म में तेज़ी से बढ़ोतरी का अनुमान

    नई दिल्ली। भारत का हेल्थकेयर सेक्टर एक नए आर्थिक और वैश्विक विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के हालिया आकलन के अनुसार देश का मेडिकल टूरिज्म यानी मेडिकल वैल्यू ट्रैवल सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़ी छलांग लगाने वाला है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह बाजार लगभग 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग दोगुना होगा।

    यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ती लागत, इलाज के लिए लंबा इंतजार और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता प्रभाव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। दुनिया के कई देशों के मरीज अब बेहतर और किफायती इलाज की तलाश में अन्य देशों की ओर रुख कर रहे हैं, और भारत इस सूची में तेजी से प्रमुख विकल्प बनता जा रहा है।

    भारत में मेडिकल टूरिज्म का विकास दो प्रमुख क्षेत्रों के माध्यम से हो रहा है। पहला, आधुनिक चिकित्सा पर आधारित गंभीर बीमारियों का इलाज, और दूसरा, योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक पद्धतियों पर आधारित वेलनेस टूरिज्म। इन दोनों क्षेत्रों का संयोजन भारत को एक संतुलित और व्यापक स्वास्थ्य गंतव्य बनाता है, जहां इलाज के साथ-साथ स्वास्थ्य सुधार और जीवनशैली संतुलन पर भी ध्यान दिया जाता है।

    भारत की इस बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण देश की मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना भी है। यहां के कई अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मान्यता प्राप्त हैं और मरीज सुरक्षा तथा इलाज की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ सिस्टम, वीजा सुविधाओं में सुधार और विभिन्न चिकित्सा केंद्रों के विकास ने भी इस सेक्टर को गति दी है।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में लाखों विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा सेवाओं का लाभ लेने के लिए आया था। यह दर्शाता है कि भारत केवल पर्यटन नहीं, बल्कि इलाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण वैश्विक गंतव्य बनता जा रहा है। विभिन्न देशों से आने वाले मरीजों में बांग्लादेश, अफ्रीकी और मध्य एशियाई देशों की भागीदारी अधिक देखी गई है।

    वैश्विक स्तर पर भी मेडिकल टूरिज्म का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान के अनुसार 2030 तक यह उद्योग कई सौ अरब डॉलर के स्तर को पार कर सकता है, जिसमें भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की किफायती स्वास्थ्य सेवाएं, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक तकनीक इसे अन्य देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।

    सरकार की योजनाओं में भी इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित किए जाने की योजना है, जहां आधुनिक चिकित्सा, शोध और पारंपरिक उपचार सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इसका उद्देश्य विदेशी मरीजों को एकीकृत और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।