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  • लॉरियल के साथ भारत के ब्यूटी सेक्टर पर बड़ी चर्चा, पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ाने पर दिया जोर

    लॉरियल के साथ भारत के ब्यूटी सेक्टर पर बड़ी चर्चा, पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ाने पर दिया जोर


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को फ्रांस की प्रमुख ब्यूटी और पर्सनल केयर कंपनी L’Oréal Group के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर को और अधिक मजबूत बनाना, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और निर्यात के नए अवसर तलाशना रहा।

    पीयूष गोयल ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए बताया कि उन्होंने लॉरियल के दक्षिण एशिया, प्रशांत, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के अध्यक्ष विस्मय शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। इस दौरान भारत से सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक बाजारों में निर्यात को विस्तार देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि भारत को ब्यूटी और पर्सनल केयर इंडस्ट्री का एक प्रमुख वैश्विक हब बनाया जा सकता है। इसके लिए निवेश को बढ़ावा देने और तकनीक आधारित उत्पादन क्षमता विकसित करने की जरूरत पर सहमति बनी।

    मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि लॉरियल ने हाल ही में हैदराबाद में अपना विश्व का सबसे बड़ा ब्यूटी टेक ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र कंपनी की वैश्विक रणनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारत को एआई आधारित ब्यूटी इनोवेशन के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

    इस परियोजना के तहत लॉरियल ने करीब 383.4 मिलियन डॉलर के शुरुआती निवेश से ब्यूटी टेक और इनोवेशन हब विकसित किया है। कंपनी का लक्ष्य इसे भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ब्यूटी सॉल्यूशंस का वैश्विक केंद्र बनाना है। अनुमान है कि 2030 तक इस पहल से लगभग 2,000 तकनीकी नौकरियां भी पैदा होंगी।

    यह केंद्र न केवल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और डिजिटल सेवाओं के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत की भूमिका वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री में और मजबूत होने की उम्मीद है।

    बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में स्थिर वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल व्यापार 12.67 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है।

    इसके अलावा, वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 4.6 प्रतिशत बढ़कर 863.11 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और टैरिफ विवादों के बावजूद भारत की मजबूत निर्यात क्षमता को दर्शाता है।

    पीयूष गोयल ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में भी इस बात पर जोर दिया कि भारत को नए वैश्विक बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और अधिक से अधिक निर्यातकों को अवसर देने की दिशा में काम करना चाहिए।

    इस तरह लॉरियल के साथ हुई यह बैठक भारत के ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • 4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न

    4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न


    नई दिल्ली।पिछले 25 वर्षों में अगर किसी निवेश ने लगातार और मजबूत रिटर्न दिया है, तो वह सोना रहा है। वर्ष 1999 के अंत में सोने की कीमत लगभग ₹4,400 प्रति 10 ग्राम थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने औसतन 14.3% सालाना रिटर्न दिया, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों से कहीं अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती ने सोने की मांग को बढ़ाया। ब्याज दरों में कमी से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएँ अन्य मुद्राओं के लिए सस्ती पड़ीं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों और मांग पर पड़ा।

    वर्ष 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल सोने की कीमतों में 70% से अधिक की तेजी आई, जबकि चांदी ने 160% तक का उछाल दिखाया। यह प्रदर्शन 1979 के बाद सबसे मजबूत सालाना बढ़त माना जा रहा है। न केवल भारत, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को आकर्षित किया।इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः लगभग 11.5% और 11.7% का औसत सालाना रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसेक्स को चांदी के बराबर रिटर्न देना होता, तो आज इसका स्तर लगभग 1.6 लाख अंक के आसपास होता, जबकि वास्तविकता में यह करीब 85,000 के स्तर पर है।

    चांदी की तेजी के पीछे भी विशेष कारण हैं। सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल EV और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में इसकी बढ़ती मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। द सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के बीच चांदी की सप्लाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे कीमतों में और तेजी आई।भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड से जुड़े विशेषज्ञ विक्रम धवन का कहना है कि सोने को पोर्टफोलियो में शामिल करना संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आज एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन चुका है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। फिर भी मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में ये दोनों धातुएँ निवेशकों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनी हुई हैं।निवेशक इस तथ्य को भी ध्यान में रखें कि सोना और चांदी लंबे समय में पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का बेहतर माध्यम साबित हुए हैं। साथ ही, डिजिटल और म्यूचुअल फंड जैसे आधुनिक निवेश विकल्प ने इसे और भी सुलभ बना दिया है।