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  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली जब युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में दूसरा पदक जुड़ गया और खेल प्रेमियों को एक और जश्न मनाने का मौका मिला।

    प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 119 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 121 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 121 किलोग्राम का सफल प्रयास उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इसके साथ उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल की मजबूत दावेदारी में ला खड़ा किया।

    क्लीन एंड जर्क राउंड में भी ऋषिकांत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले ही प्रयास में 143 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इसके बाद उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने 149 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त हासिल कर ली।

    गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांत ने अंतिम प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने वजन को कंधों तक सफलतापूर्वक पहुंचा भी दिया लेकिन अंतिम जर्क पूरा नहीं कर सके। इसी के साथ उनका कुल स्कोर 264 किलोग्राम पर रुक गया और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

    ऋषिकांत सिंह का यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने न केवल सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया बल्कि स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का भी शानदार परिचय दिया। शुरुआती दिनों में ही भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

    फिलहाल भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं और देश पदक तालिका में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है जबकि इंग्लैंड और नाइजीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।

  • गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक

    गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने केवल ब्रॉन्ज मेडल ही नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे से करोड़ों लोगों का दिल भी जीत लिया। आर्थिक तंगी, कठिन परिस्थितियों और रोजमर्रा की चुनौतियों से लड़ते हुए उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कभी उनके गांव के लोगों ने भी नहीं की थी। ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचकर जीवनयापन करने वाले झंडू आज देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

    पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मुकाबले के बाद भावुक झंडू ने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। उनका मानना था कि लगातार मेहनत करने वालों को एक दिन सफलता जरूर मिलती है और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

    झंडू ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर चलाने के लिए कभी ई-रिक्शा चलाना पड़ा तो कभी सब्जियां बेचनी पड़ीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को नहीं छोड़ा। दिनभर मेहनत करने के बाद भी अभ्यास जारी रखा और हर चुनौती को अपनी ताकत बनाया। उनका कहना है कि कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनाया।

    प्रतियोगिता में झंडू ने ग्रुप बी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 130.9 अंक हासिल किए और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उन्होंने युगांडा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता, जबकि झंडू केवल 0.1 अंक के बेहद मामूली अंतर से रजत पदक से चूक गए। इसके बावजूद उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इसी के साथ देश का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदकों का खाता खुला।

    झंडू की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया, उनका हौसला बढ़ाया और उन पर विश्वास बनाए रखा।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि उनके सफर का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। अब उनका लक्ष्य देश के लिए और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतना है। झंडू का मानना है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

    झंडू कुमार की यह कहानी साबित करती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, निरंतर मेहनत और अपने सपनों पर अटूट विश्वास से हासिल होती है। उनका संघर्ष आज देशभर के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।