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  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ यादगार बन गया। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 21 गोल्ड समेत 85 मेडल अपने नाम किए। खेलों के इस बड़े मंच पर भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐसे मुकाम हासिल किए जो इससे पहले देश के नाम नहीं थे। महिला हॉकी में लंबे इंतजार के बाद गोल्ड मेडल मिला तो वहीं मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और सॉफ्ट टेनिस जैसे खेलों में भी भारत ने पहली बार पदक जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन रहा। सलीमा टेटे की कप्तानी में टीम ने शानदार खेल दिखाया और फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने महिला हॉकी में 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। भारतीय टीम ने इससे पहले 1982 में एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड जीता था। इसके बाद लंबे समय तक देश को इस सफलता का इंतजार करना पड़ा। 2026 में मिली यह जीत भारतीय हॉकी के लिए बेहद खास बन गई।

    मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारत ने इतिहास रचा। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एशियन गेम्स में भारत को इस खेल का पहला पदक दिलाया। सुचिका ने प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि सेमीफाइनल में हार के कारण वह फाइनल तक नहीं पहुंच सकीं लेकिन उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया।

    सॉफ्ट टेनिस में भी भारत ने पहली बार पदक जीता। इस खेल को एशियन गेम्स में शामिल किए जाने के बाद भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने पुरुष वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसी तरह रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल दिलाया।

    स्क्वैश में अनाहत सिंह ने इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स के स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। भले ही वह गोल्ड मेडल जीतने से चूक गईं लेकिन सिल्वर मेडल के साथ उन्होंने नया इतिहास बनाया। पोल वॉल्ट में बरनिका इलांगोवन ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को इस स्पर्धा में एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाया।

    वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू का इंतजार भी खत्म हुआ। उन्होंने एशियन गेम्स के इतिहास में अपना पहला मेडल जीता और सिल्वर अपने नाम किया। वहीं सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर 1982 के बाद भारत को इस स्पर्धा में पहला पदक दिलाया। इन उपलब्धियों ने साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी अब पारंपरिक खेलों के साथ नए खेलों में भी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

  • ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी

    ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार देर रात भारतीय दल ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करते हुए चार और पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलीट शर्मिला ने दिलाई जिन्होंने महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का दूसरा गोल्ड दिलाया। इसके अलावा भारत को दो रजत और एक कांस्य पदक भी मिला जिससे कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। भारत अब दो स्वर्ण पांच रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

    महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल में शर्मिला ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने छह प्रयासों में लगातार बेहतरीन थ्रो किए और तीसरे प्रयास में 9 दशमलव 81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। पूरे मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनके आसपास भी नहीं पहुंच सके।

    इस स्पर्धा में घाना की जिनाबु इसाह ने 8 दशमलव 65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि भारत की शिल्पा कंचुगरकोप्पालु शायला ने 7 दशमलव 26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की।

    एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सर्वेश अनिल कुशारे ने 2 दशमलव 25 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। गोल्ड मेडल की दौड़ बेहद रोमांचक रही क्योंकि सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने समान ऊंचाई पार की। हालांकि प्रयासों की संख्या के आधार पर स्वर्ण पदक जमैका के खिलाड़ी के नाम रहा जबकि सर्वेश को रजत से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का गेम रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम भार उठाया। हालांकि मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अजय बाबू केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।

    भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के खिलाड़ी अब हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार चुनौती पेश कर रहे हैं। पैरा खेलों से लेकर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग तक भारतीय प्रतिभाएं लगातार पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और खेल प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है।