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  • नेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग ने पकड़ा जोर, सीमा वाले जिलों में प्रदर्शन की खबरों से बढ़ी चिंता

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग ने पकड़ा जोर, सीमा वाले जिलों में प्रदर्शन की खबरों से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । नेपाल को दोबारा वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। काठमांडो से शुरू हुई यह बहस अब भारत की सीमा से लगे नेपाल के कई जिलों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि देश की संवैधानिक पहचान को लेकर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा शुरू करनी चाहिए। संगठनों की ओर से सरकार से तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक बुलाने और हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर आगे की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय करने की मांग की गई है।

    हिंदू संगठनों के अनुसार काठमांडो के अलावा मोरंग सुनसरी सप्तरी सिरहा बारा पर्सा और रौतहट जैसे भारत सीमा से जुड़े इलाकों में भी इस मांग को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। संयुक्त हिंदू मोर्चा की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुंग को ज्ञापन सौंपकर नेपाल की संवैधानिक पहचान पर पुनर्विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई है। नेपाल हिंदू स्वयंसेवक संघ की पशुपति शिक्षा प्रचार समिति से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी सरकार के सामने इस मांग को लगातार उठाए जाने की बात कही है।

    हाल में सरकार और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में धार्मिक सौहार्द सुरक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान संगठनों ने तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग भी रखी। हालांकि नेपाली अधिकारियों ने इस बैठक को किसी औपचारिक समझौते का रूप नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि संगठनों को अपनी मांगें सरकार के सामने रखने का अवसर दिया गया था और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।

    नेपाल की संवैधानिक पहचान का सवाल नया नहीं है। वर्ष 2007 के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था। इसके बाद से अलग अलग समय पर देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठती रही है। अब एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा तथा दोनों देशों के गहरे सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को देखते हुए इस बहस का प्रभाव सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है।

    भारत की सीमा से सटे इलाकों में भी इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच चर्चा बढ़ने की बात सामने आ रही है। रुपईडीहा से नेपालगंज तक बाजारों और चौक चौराहों पर नेपाल की धार्मिक पहचान को लेकर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर किसी भी मांग के साथ सामाजिक सौहार्द और शांति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल सीमा क्षेत्र में सामान्य जनजीवन जारी है।

    विशेषज्ञों और स्थानीय संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि हिंदू राष्ट्र की मांग व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप लेती है तो इसका असर केवल नेपाल की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत नेपाल के सामाजिक संबंधों और दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। खुली सीमा और दोनों देशों के बीच लगातार होने वाले आवागमन को देखते हुए सीमा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

    फिलहाल नेपाल सरकार की ओर से हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर किसी निर्णायक राजनीतिक प्रक्रिया की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठनों की मांग किस तरह आगे बढ़ती है और क्या यह मुद्दा नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बनता है। साथ ही भारत नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घटनाक्रम पर किस तरह नजर रखती हैं यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।

  • भारत-नेपाल सीमा पर ₹100 के सामान पर टैक्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सरकार के आदेश पर लगाई रोक

    भारत-नेपाल सीमा पर ₹100 के सामान पर टैक्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सरकार के आदेश पर लगाई रोक

    काठमांडू। भारत-नेपाल सीमा पर रोजमर्रा के सामान की खरीदारी करने वाले आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार के उस विवादित फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूली जा रही थी।

    सीमा पर बढ़ी सख्ती से लोगों को हुई परेशानी
    सरकार के इस नियम के लागू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कस्टम चौकियों पर हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ यात्रा करने वाले लोगों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। चिप्स, बिस्कुट, केले और अन्य छोटे-मोटे सामानों पर भी कस्टम विभाग की सख्ती देखी जा रही थी। ₹100 की सीमा तय होने के कारण आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच कई बार कहासुनी और विवाद की स्थिति भी बन गई थी।

    अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दी थी चुनौती
    इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और बिक्रम शाह ने नेपाल की सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई, जिसमें न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और न्यायाधीश टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

    सुप्रीम कोर्ट का अहम अंतरिम आदेश
    न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अर्थ मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर इस तरह की सख्ती उचित नहीं है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक बॉर्डर पर आम लोगों से दैनिक उपयोग के सामान पर कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा और स्थिति पूर्ववत सामान्य रखी जाएगी।

    व्यापारियों और यात्रियों को राहत
    इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। व्यापारियों का कहना है कि इस आदेश से अनावश्यक जांच-पड़ताल, विवाद और परेशानियों में कमी आएगी, जिससे सीमा पर व्यापार और आवाजाही पहले की तरह सुचारु हो सकेगी।

  • नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट

    नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट




    नई दिल्ली। नेपाल ने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोरंग जिले की जोगबनी सीमा चौकी पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। नेपाल प्रशासन का कहना है कि बढ़ती अवैध घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए जांच अभियान तेज किया गया है।

    मोरंग जिला सुरक्षा समिति के फैसले के बाद सीमा पर आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने साफ किया कि यह फैसला किसी द्विपक्षीय समझौते के तहत नहीं बल्कि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर अवैध घुसपैठिए और अपराधी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के बाद रोहिंग्या मुसलमान नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। नेपाली मीडिया ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सीमा से लगे इलाकों में लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट मोड में हैं।

    नेपाल प्रशासन ने खासतौर पर ट्रेनों के आने के समय अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, क्योंकि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। जानकारी के मुताबिक एक साथ 500 से 1000 लोगों की आवाजाही होने पर पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि सीमा पार फरार अपराधियों की आवाजाही रोकना भी इस अभियान का बड़ा उद्देश्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल के कई फरार कैदियों के भारत में छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पकड़ने के लिए सीमा निगरानी मजबूत की गई है। फिलहाल यह फैसला जिला स्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा लागू किया गया है और इसे नेपाल की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।