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  • स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

    स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी


    मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

    मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।

    दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

    जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।

    आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।

  • डाक सेवा में बड़ा बदलाव, 17 मार्च से शुरू होगी 24 स्पीड पोस्ट सेवा..

    डाक सेवा में बड़ा बदलाव, 17 मार्च से शुरू होगी 24 स्पीड पोस्ट सेवा..


    नई दिल्ली : India Post जल्द ही एक नई एक्सप्रेस डिलीवरी सेवा शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत पार्सल और कंसाइनमेंट को 24 घंटे के भीतर पहुंचाया जाएगा। सरकार ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।

    Ministry of Communications के अनुसार डाक विभाग यानी Department of Posts मंगलवार 17 मार्च से 24 स्पीड पोस्ट सेवा शुरू करेगा। इसका उद्देश्य जरूरी और समयबद्ध पार्सल की अगले दिन गारंटी के साथ डिलीवरी सुनिश्चित करना है।

    इस सेवा का शुभारंभ केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya M. Scindia और संचार राज्य मंत्री Chandrasekhar Pemmasani करेंगे। कार्यक्रम Akashvani Bhavan के रंग भवन ऑडिटोरियम में दोपहर 12:30 बजे आयोजित होगा, जिसमें डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

    मंत्रालय के अनुसार 24 स्पीड पोस्ट सेवा के जरिए प्रमुख महानगरों में अगले दिन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स सेवाओं में सुधार होगा।

    पहले चरण में यह सुविधा छह मेट्रो शहरों-Delhi, Mumbai, Chennai, Kolkata, Bengaluru और Hyderabad-में शुरू की जाएगी।

    इसके साथ ही डाक विभाग 24 स्पीड पोस्ट और 48 स्पीड पोस्ट सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा, जिनमें क्रमशः डी+1 और डी+2 दिनों में डिलीवरी की गारंटी होगी। इन सेवाओं को विशेष प्रोसेसिंग विंडो और प्राथमिकता वाले एयर ट्रांसपोर्ट का समर्थन मिलेगा।

    नई सेवाओं में ओटीपी-आधारित सुरक्षित डिलीवरी, एंड-टू-एंड ट्रैकिंग और एसएमएस के जरिए पार्सल की स्थिति की जानकारी जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।

    व्यावसायिक ग्राहकों के लिए विभाग बाय नाउ पे लेटर (BNPL) सुविधा, बड़ी बुकिंग पर फ्री पिकअप, एपीआई इंटीग्रेशन और सेंट्रलाइज्ड बिलिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।

    मंत्रालय के अनुसार इन सेवाओं में डिलीवरी में देरी होने पर मनी-बैक गारंटी भी शामिल होगी, जिससे इंडिया पोस्ट की प्रीमियम एक्सप्रेस डिलीवरी क्षमता और मजबूत होगी।

    इस महीने की शुरुआत में चंद्रशेखर पेम्मासानी ने संसद में बताया था कि डाक विभाग पार्सल और ई-कॉमर्स सेगमेंट में कई नई पहल कर रहा है ताकि इसे एक प्रमुख सार्वजनिक लॉजिस्टिक्स संगठन के रूप में विकसित किया जा सके।इन पहलों के तहत पार्सल प्रोसेसिंग और डिलीवरी सिस्टम का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे सेवाओं की गति, भरोसेमंदता और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया जा सके।