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  • मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    नई दिल्ली । अगस्त 2026 भारतीय कूटनीति के लिए बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण महीना साबित हुआ। नई दिल्ली ने एक साथ मध्य एशिया रूस चीन श्रीलंका फिलिस्तीन और पाकिस्तान से जुड़े अलग अलग कूटनीतिक मोर्चों पर सक्रिय रहकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक क्षेत्र या शक्ति तक सीमित रहने के बजाय बहुआयामी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य एशिया यात्रा से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग वार्ता तक अगस्त में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार सुर्खियों में रही।

    महीने के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रहे। ताशकंद में उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार निवेश रक्षा डिजिटल कनेक्टिविटी ऊर्जा और शिक्षा समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे जहां उन्होंने 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। मध्य एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों के लिहाज से लगातार महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। एससीओ के मंच पर भारत ने सुरक्षा कनेक्टिविटी और अवसर के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए आतंकवाद अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

    अगस्त में भारत रूस संबंधों को भी नई मजबूती मिली। विदेश मंत्री एस जयशंकर 23 और 24 अगस्त को मॉस्को पहुंचे जहां उन्होंने भारत रूस अंतर सरकारी आयोग की बैठक की सह अध्यक्षता की। इस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत में ऊर्जा उर्वरक परमाणु ऊर्जा हाई टेक्नोलॉजी और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात ने भी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत दिया। वैश्विक दबाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत ने साफ किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा।

    भारत चीन संबंधों के मोर्चे पर भी अगस्त अहम रहा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सीमा विवाद अब भी भारत चीन संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है लेकिन लगातार संवाद यह संकेत देता है कि दोनों देश तनाव कम करने और संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    श्रीलंका के साथ भारत की विकास साझेदारी भी अगस्त में चर्चा में रही। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने श्रीलंका का दौरा कर वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और भारत की सहायता से चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच व्यापार सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    वहीं भारत ने फिलिस्तीन के साथ मानवीय और विकास साझेदारी को नया आयाम दिया। वेस्ट बैंक में 200 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना से जुड़े समझौते हुए। इससे यह संकेत मिला कि भारत संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य और मानवीय विकास से जुड़े प्रयासों में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।

    अगस्त में भारत पाकिस्तान संबंधों में भी तनावपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। दोनों देशों के उच्चायोगों के बाहर अस्थायी और अनधिकृत ढांचे हटाने को लेकर पारस्परिक कार्रवाई हुई जिसे भारत ने आनुपातिक प्रतिक्रिया बताया। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक सतर्कता की तस्वीर पेश करता है।

    पूरे अगस्त की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर डालें तो भारत की विदेश नीति का स्पष्ट संदेश सामने आता है। नई दिल्ली एक साथ कई देशों और क्षेत्रों के साथ संवाद कर रही है और अपने आर्थिक सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मध्य एशिया से रूस और चीन तक सक्रिय संपर्क और दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया में विकास साझेदारी भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति को दर्शाती है जिसमें संवाद सहयोग और राष्ट्रीय हितों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • भारत रूस राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में साइकिल रैली का भव्य आयोजन..

    भारत रूस राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में साइकिल रैली का भव्य आयोजन..


    नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच दशकों पुराने राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में एक साइकिल रैली का आयोजन किया गया जिसने दोनों देशों के बीच गहरी होती मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक बार फिर उजागर किया। यह आयोजन एक जनभागीदारी कार्यक्रम के रूप में सामने आया जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य केवल खेल और फिटनेस को बढ़ावा देना ही नहीं था बल्कि भारत और रूस के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना भी था।

    सुबह के समय आयोजित इस साइकिल रैली में प्रतिभागियों ने राजधानी की सड़कों पर साइकिल चलाते हुए एकता और सहयोग का संदेश दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे एक सकारात्मक अनुभव बताया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं बल्कि विभिन्न देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को भी बढ़ाते हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इसे और प्रभावशाली बना दिया।

    आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां दोनों देशों के संबंधों को केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं रखतीं बल्कि इन्हें जन स्तर तक पहुंचाने में मदद करती हैं। उनका मानना है कि सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच जुड़ाव और अधिक मजबूत होता है और यही वास्तविक कूटनीति की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस तरह के आयोजन और बड़े स्तर पर किए जाने की संभावना है जिससे अधिक लोग जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि साइकिल रैली ने उन्हें एक अलग अनुभव दिया और यह केवल एक खेल गतिविधि नहीं बल्कि एक संदेशवाहक आयोजन था जिसमें शांति और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कुछ प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नियमित रूप से साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है और ऐसे आयोजनों से समाज में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ती है।

    आयोजकों के अनुसार लगभग सात सौ लोगों ने इस रैली में भाग लिया जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से आए थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत और रूस के बीच संबंधों को लेकर जनता में भी सकारात्मक भावना मौजूद है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा।

    भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं और समय के साथ इन संबंधों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है। इस तरह के आयोजन न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूती देते हैं बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी गहरा करते हैं। राजधानी में आयोजित यह साइकिल रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है जिसने एकता और मित्रता का मजबूत संदेश दिया है।

  • रूस का साफ संदेश भारत पर किसी दबाव की गुंजाइश नहीं तेल व्यापार और संबंधों में बढ़ती मजबूती

    रूस का साफ संदेश भारत पर किसी दबाव की गुंजाइश नहीं तेल व्यापार और संबंधों में बढ़ती मजबूती


    नई दिल्ली । भारत के तेल बाजार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के बीच रूस ने स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के कथित दबाव को पूरी तरह खारिज कर दिया है भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने एक विशेष बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार्य नहीं है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर मजबूती से कायम है

    राजदूत अलिपोव ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह का दबाव न तो उचित है और न ही टिकाऊ उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस ऐसे किसी भी प्रयास को सख्ती से खारिज करता है और भारत के स्वतंत्र रुख का सम्मान करता है

    तेल आयात को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों पर टिप्पणी करने से इनकार किया लेकिन यह जरूर कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दबाव की राजनीति सही नहीं है उनके अनुसार यह वैश्विक सहयोग और संतुलन को प्रभावित करता है

    रूस और भारत के संबंधों पर बात करते हुए अलिपोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है हाल के वर्षों में भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है और यह साझेदारी आगे भी जारी रहने की संभावना है उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिल रहा है

    मध्य पूर्व में चल रहे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता व्यक्त की और इसे अमेरिकी नीतियों से जोड़ते हुए इसे ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी करार दिया उनके अनुसार इस तरह के हस्तक्षेप से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है

    राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद लगातार जारी है और इस वर्ष नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर मॉस्को उत्साहित है उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर बैठक की परंपरा मजबूत है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं

    कुल मिलाकर रूस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति में ऊर्जा और व्यापार को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत और रूस अपने संबंधों को बाहरी दबाव से परे रखते हुए आगे बढ़ाना चाहते हैं और ऊर्जा सहयोग इस साझेदारी का प्रमुख आधार बना रहेगा

  • भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा

    भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली  भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 30 मार्च, 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) किया। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ रणनीतिक साझेदारी, आपसी हितों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए।

    दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में हुए 23वें सालाना समिट में लिए गए फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की। दिसंबर की इस यात्रा के दौरान, रुडेंको ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की। एफओसी का आखिरी राउंड मार्च 2025 में मॉस्को में हुआ था।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।”

    उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किए।”

    इसके अलावा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मई में भारत आने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।

    इससे पहले 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।

    जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।”

    इससे पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की

  • विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

    विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है।


    भारत-रूस के मजबूत होते रिश्ते

    जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है।


    रूस की ओर से क्या कहा गया

    जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है