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  • आईटी, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं का दम, मई में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ तेज, रोजगार सृजन में भी बढ़ोतरी

    आईटी, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं का दम, मई में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ तेज, रोजगार सृजन में भी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत और उत्साह देने वाली खबर सामने आई है। देश के सेवा क्षेत्र ने मई 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। मजबूत मांग, नए ग्राहकों की बढ़ती संख्या और विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी गतिविधियों के विस्तार ने सर्विस सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान की है। ताजा आर्थिक संकेतकों से स्पष्ट है कि भारत का सेवा क्षेत्र घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर बढ़ती मांग का लाभ उठा रहा है।

    मई के दौरान सर्विसेज पीएमआई 59.8 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के मुकाबले अधिक है और नवंबर के बाद का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। आर्थिक गतिविधियों को मापने वाले इस सूचकांक में 50 से ऊपर का स्तर विस्तार का संकेत देता है। ऐसे में 59.8 का आंकड़ा यह दर्शाता है कि सेवा क्षेत्र में विकास की गति लगातार मजबूत बनी हुई है और कारोबार में सकारात्मक माहौल कायम है।

    विशेषज्ञों के अनुसार माल ढुलाई, डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स, सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को प्रमुख रूप से समर्थन दिया है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग का असर भी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर साफ दिखाई दिया। कंपनियों को नए ग्राहकों और नए प्रोजेक्ट्स से लगातार ऑर्डर प्राप्त हुए, जिससे कारोबारी विश्वास को मजबूती मिली।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी भारतीय सेवा क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिले हैं। विदेशी ग्राहकों की मांग में सुधार दर्ज किया गया, जिससे निर्यात आधारित सेवाओं को बल मिला। विभिन्न देशों से प्राप्त नए ऑर्डरों ने भारतीय कंपनियों को अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाने का अवसर दिया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    सेवा क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार का प्रभाव रोजगार बाजार पर भी दिखाई दिया। कई कंपनियों ने बढ़ते कार्यभार को देखते हुए नए कर्मचारियों की भर्ती की। रोजगार सृजन की गति पिछले एक वर्ष के दौरान सबसे मजबूत स्तरों में से एक रही। हालांकि अधिकांश कंपनियों ने अपने मौजूदा कार्यबल को बनाए रखा, फिर भी नई भर्तियों में बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देती है।

    दूसरी ओर लागत संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। खाद्य सामग्री, ईंधन, गैस, श्रम और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है। हालांकि लागत में वृद्धि के बावजूद कंपनियां अपनी कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने में सफल रही हैं। महंगाई के दबाव में कुछ नरमी आने से सेवा प्रदाताओं पर मूल्य बढ़ाने का दबाव भी पहले की तुलना में कम हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भी सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत रह सकता है। कारोबारी संस्थानों का दृष्टिकोण फिलहाल आशावादी बना हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार आगे भी जारी रहेगा।

    सेवा क्षेत्र की मजबूती का असर समग्र अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दिया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के संयुक्त प्रदर्शन को दर्शाने वाला कंपोजिट पीएमआई भी मई में बेहतर स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के मजबूत पथ पर आगे बढ़ रही है।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सेवा क्षेत्र से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। नए कारोबार में लगातार बढ़ोतरी और डिजिटल, आईटी, ई-कॉमर्स तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के चलते मई में भारत के सेवा क्षेत्र का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 58.8 था। यह वृद्धि देश के सेवा आधारित उद्योगों में मजबूत विस्तार और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को दर्शाती है।

    एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, माल ढुलाई, डिजिटल सेवाओं, मनोरंजन, ई-कॉमर्स और आईटी सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कंपनियों के नए ऑर्डरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के चलते सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को तेज किया और उत्पादन क्षमता में विस्तार किया।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए कारोबार में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी सुधार हुआ है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने मई में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग में बढ़ोतरी के चलते कंपनियां विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल अधिकांश कंपनियों ने अपने स्टाफ स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन एक छोटे हिस्से ने नई भर्तियां की हैं।

    अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन मई में इसमें हल्की कमी देखी गई है। यह पिछले चार महीनों में सबसे निचला स्तर है। लागत दबाव में कमी आने से कंपनियों पर सेवाओं की कीमत बढ़ाने का दबाव भी कम हुआ है। इसी कारण मई में सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की गति भी जनवरी के बाद सबसे धीमी रही।

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मई में सेवा क्षेत्र में विस्तार का मुख्य कारण नए ऑर्डरों की लगातार बढ़ती संख्या रही। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी सेवाओं की मांग में सुधार देखने को मिला है। अप्रैल में आई गिरावट के बाद निर्यात आधारित सेवाओं में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई, जिससे कुल कारोबार को मजबूती मिली।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत की सेवाओं की मांग कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत रही, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। हालांकि, विदेशी मांग की वृद्धि दर कुल घरेलू बिक्री की तुलना में थोड़ी कम रही और यह 2025 के औसत से नीचे रही, फिर भी इसमें स्थिरता बनी रही।

    कुल मिलाकर, सेवा क्षेत्र में इस तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आईटी और डिजिटल सेवाओं की मजबूत मांग, ई-कॉमर्स का विस्तार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सेवाओं की जरूरत भारत के सेवा उद्योग को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार और निवेश दोनों में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।