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  • भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड

    भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड


    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लंदन में आयोजित यूके-इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में ‘भारत-ब्रिटेन संबंधों को बेहतर बनाने में उत्कृष्ट नेतृत्व’ के विशेष सम्मान से नवाजा गया।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद 300 से अधिक नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों की साझेदारी का सबसे बेहतरीन दौर अभी आना बाकी है।

    उन्होंने बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। उनके अनुसार यह समझौता व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा तथा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने सरकार, उद्योग, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया है।

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है। यह विकास यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और उभरते क्षेत्रों में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने समारोह में सम्मानित अन्य विजेताओं को भी बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके प्रयासों से भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, मजबूत होते कारोबारी संबंध और लोगों के बीच गहरे होते संपर्क भविष्य में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि “भारत-ब्रिटेन साझेदारी की सबसे बेहतरीन पारी अभी बाकी है।” यह संदेश दोनों देशों के बीच भविष्य में और व्यापक आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

  • भारत-यूके आर्थिक रिश्तों में मजबूती की नई पहल, सीईटीए बनेगा विकास का मुख्य आधार

    भारत-यूके आर्थिक रिश्तों में मजबूती की नई पहल, सीईटीए बनेगा विकास का मुख्य आधार


    नई दिल्ली।
    भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण संवाद सामने आया है। दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में हुई वर्चुअल बातचीत में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस बातचीत का केंद्र व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता यानी सीईटीए रहा, जिसे दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों के भविष्य के लिए एक अहम आधार माना जा रहा है।

    इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देश मिलकर व्यापारिक अवसरों को और अधिक विस्तृत करें, ताकि आपसी आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर पहुंचाया जा सके। बातचीत के दौरान यह भी माना गया कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में स्थिर और मजबूत साझेदारियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, और भारत-यूके संबंध इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकते हैं।

    सीईटीए समझौते के तहत दोनों देशों ने पहले ही व्यापार बढ़ाने के लिए एक साझा रोडमैप तैयार किया है। इसका उद्देश्य न केवल वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाना है, बल्कि निवेश के नए अवसरों को भी प्रोत्साहित करना है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि समझौते के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि वास्तविक आर्थिक लाभ तेजी से सामने आ सके।

    भारत की आर्थिक नीति पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक साझेदारियों की ओर तेजी से बढ़ी है। सरकार का ध्यान ऐसे समझौतों पर रहा है जो न केवल व्यापार को बढ़ावा दें, बल्कि देश की औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की क्षमता को भी मजबूत करें। इसी रणनीति के तहत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं, जिससे भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क और अधिक विस्तृत हुआ है।

    इस नई पहल के तहत भारत और ब्रिटेन दोनों ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को कई गुना बढ़ाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद और नीतिगत समन्वय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह साझेदारी केवल आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे तकनीकी सहयोग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होने की संभावना है।

    हालिया बातचीत में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के बीच भारत और ब्रिटेन एक-दूसरे के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार बन सकते हैं। मजबूत व्यापारिक ढांचा न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगा, बल्कि दोनों देशों की विकास गति को भी तेज करेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए जैसे समझौते आने वाले समय में वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इससे न केवल बड़े उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान हो सकेगी।

    इस प्रकार, भारत और ब्रिटेन के बीच यह ताजा संवाद केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।