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  • ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी

    ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद दुनिया भर में अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    अदालत ने क्यों रद्द किए टैरिफ?
    अमेरिकी संघीय अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत मिली सीमित शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था। ट्रंप ने फरवरी में 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लागू किए थे, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। लेकिन अदालत ने इन्हें कानून के दायरे से बाहर माना।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति में लगातार हो रहे कानूनी बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय हैं। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन मौजूदा हालात में इस समझौते पर जल्दबाजी भारत के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि जब तक अमेरिका अपनी व्यापार नीति को स्थिर और भरोसेमंद नहीं बनाता, तब तक भारत को किसी बड़े व्यापारिक समझौते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

    अमेरिका क्या चाहता है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क कम करे या खत्म करे, जबकि खुद अमेरिका अपने “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (MFN) टैरिफ में बड़ी कटौती करने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में भारत को व्यापारिक संतुलन बनाए रखने में सावधानी बरतनी होगी।

    क्या पूरी दुनिया पर तुरंत असर पड़ेगा?
    फिलहाल अदालत का फैसला केवल उन पक्षों पर लागू हुआ है जिन्होंने यह मामला दायर किया था। हालांकि माना जा रहा है कि इस फैसले का असर आगे चलकर अमेरिका की पूरी व्यापार नीति पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन अब फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर सकता है। साथ ही धारा 301 और धारा 232 जैसे अन्य सख्त कानूनों के जरिए व्यापारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश भी की जा सकती है।

    WTO और वैश्विक व्यापार को राहत
    विश्व व्यापार संगठन (WTO) से जुड़े विशेषज्ञों ने अदालत के फैसले को वैश्विक व्यापार नियमों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की व्यापार प्रणाली फिर पुराने MFN ढांचे की ओर लौट सकती है।

    भारत के लिए क्या है रणनीति?
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। अमेरिका की घरेलू व्यापार नीतियों में स्थिरता आने तक किसी दीर्घकालिक समझौते से बचना भारत के हित में हो सकता है। कई अन्य देश भी अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील: दवाइयां, डायमंड्स, मसाले पर 0% टैरिफ, किसानों और डेयरी को पूरी सुरक्षा

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: दवाइयां, डायमंड्स, मसाले पर 0% टैरिफ, किसानों और डेयरी को पूरी सुरक्षा


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विस्तार से जानकारी दी कि किन उत्पादों पर अमेरिका ने 0% टैरिफ लागू किया है। वहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी कृषि और डेयरी उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी है, ताकि किसानों और घरेलू उत्पादन की सुरक्षा बनी रहे।

    गोयल ने बताया कि अमेरिका ने भारत के लिए जिन वस्तुओं पर 0% टैरिफ लागू किया है, उनमें शामिल हैं:
    जेम्स और डायमंड्स, सोने-चांदी की आभूषण सामग्री
    दवाइयां, फार्मा प्रोडक्ट्स, स्मार्टफोन
    मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, केस्यू नट्स
    केला, आम, चीनी, पाइनएपल, मशरूम, सब्जियों के रूट्स
    एयरक्राफ्ट और मशीनरी पार्ट्स, एल्यूमिनियम और जिंक ऑक्साइड, मिनरल्स, नेचुरल रबर
    प्रोसेस्ड फल जैसे अमरूद का जेम्स

    उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत ने मीट, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्‍का, चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरनाथ फल, ग्रीन टी, कोका, चना, एनीमल सीड्स, नॉन-एल्कोहलिक उत्पाद, इथेनॉल और तंबाकू जैसी कृषि और डेयरी वस्तुओं पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी।

    पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते से अमेरिका का 30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कम टैरिफ पर खुल गया है। अमेरिकी टैरिफ अब भारत के लिए पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत कम है—जैसे चीन पर 35%, वियतनाम 20%, और इंडोनेशिया 19% टैरिफ है, जबकि अमेरिका ने इसे भारत के लिए 18% कर दिया है।

    गोयल ने कहा कि आज का दिन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फरवरी 2025 से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच सालाना 500 बिलियन डॉलर का व्यापार हासिल करना था। इस समझौते से देश के निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और अमेरिका भारत के लिए सबसे पसंदीदा निर्यात राष्ट्र बन जाएगा।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील में रूस का तेल नहीं बनेगा बाधा, सरकार ने दिया ये स्‍पष्‍ट जवाब

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील में रूस का तेल नहीं बनेगा बाधा, सरकार ने दिया ये स्‍पष्‍ट जवाब


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर रूस से तेल खरीद का मुद्दा चर्चा में है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या रूस से तेल की खरीद भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कोई पेच खड़ा कर सकती है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। मंत्रालय ने किसी भी तरह का सीधे-सीधे “हां” या “ना” वाला जवाब देने से परहेज़ किया। वाणिज्य मंत्रालय भी इस मामले में सवालों को विदेश मंत्रालय के पाले में डाल देता है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि इस विषय में जवाब विदेश मंत्रालय देगा। उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का ब्योरा देते हुए बताया कि इसमें घरेलू उत्पादकों और कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपजों को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसमें मीट, पोल्ट्री, सोयामील, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी और मिलेट्स जैसी वस्तुएं शामिल हैं, ताकि किसानों और घरेलू उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क हटा दिया है, जो रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगाया गया था। अमेरिका ने यह कदम भारत के प्रयासों और अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग विस्तार के फैसले के बाद उठाया। अमेरिका का कहना है कि भारत ने रूस से तेल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात को बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद करेगा।विदेश मंत्रालय ने बार-बार दोहराया कि भारत के सभी कदम ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं और आगे भी इसी उद्देश्य के तहत रणनीति बनाई जाएगी।