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  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन इस संभावित यात्रा की तैयारियों पर काम कर रहा है और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में मार्को रुबियो ने कहा कि वह स्वयं भी इस वर्ष के अंत से पहले भारत आने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों की समीक्षा करना और दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी होती हैं तो अगले वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद लगातार जारी है। उनके अनुसार भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं तथा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    उन्होंने हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। रुबियो के अनुसार दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही और इससे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। बातचीत अंतिम चरण में है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा निवेश और व्यापार के नए अवसर खोलेगा।

    रुबियो ने क्वाड देशों के सहयोग को भी भविष्य की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा उभरती प्रौद्योगिकी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी चारों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

    राष्ट्रपति ट्रंप का पिछला भारत दौरा फरवरी 2020 में हुआ था जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहमदाबाद में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं हुई थीं। उस यात्रा के बाद भी दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद जारी रहा और रक्षा तकनीक ऊर्जा व्यापार तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत होता गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा तय समय पर होता है तो यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं होगी बल्कि भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। व्यापार समझौते से लेकर रक्षा सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों तक कई महत्वपूर्ण विषय इस यात्रा के केंद्र में रहने की संभावना है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी नए दौर में प्रवेश करने को तैयार, ट्रेड एग्रीमेंट पर तेज हुई बातचीत

    भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी नए दौर में प्रवेश करने को तैयार, ट्रेड एग्रीमेंट पर तेज हुई बातचीत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाल ही में फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिली है। अब इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह नई दिल्ली पहुंच रहे हैं जहां वे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।

    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापार क्षेत्रीय सुरक्षा और गहरी आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई थी। उनके अनुसार दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जाए तथा व्यापारिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा दिया जाए।

    इसी कड़ी में अब दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों का मानना है कि समझौता लगभग तैयार है और अब केवल कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति बनना बाकी है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वे नई दिल्ली में जैमीसन ग्रीर के स्वागत के लिए उत्साहित हैं और व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार जैमीसन ग्रीर भारत दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका संयुक्त बयान और अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यह दौरा फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई व्यापक व्यापार वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

    हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति बनने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा फार्मास्यूटिकल्स रक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता लागू होने के बाद निवेश बढ़ेगा व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे।

    भारत दौरे के बाद जैमीसन ग्रीर उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे जहां वे वहां के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। हालांकि फिलहाल सबसे अधिक ध्यान नई दिल्ली में होने वाली उन बैठकों पर है जिनसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित नहीं मानतीं बल्कि इसे रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले कदम के रूप में देख रही हैं। यही कारण है कि नई दिल्ली में होने वाली ये बैठकें वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक हलकों में भी विशेष महत्व रखती हैं।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, व्यापार समझौते पर अंतिम सहमति की ओर बढ़ीं दोनों सरकारें

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, व्यापार समझौते पर अंतिम सहमति की ओर बढ़ीं दोनों सरकारें


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अगले महीने लागू होने वाली महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले दोनों देश व्यापार वार्ताओं को निर्णायक दिशा देने में जुट गए हैं। इसी क्रम में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह नई दिल्ली पहुंच रहे हैं जहां वह केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।

    भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस दौरे की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि नई दिल्ली में जैमीसन ग्रीर का स्वागत करने के लिए वह उत्साहित हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं।

    ग्रीर और गोयल के बीच होने वाली यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों देशों की कोशिश है कि अगले महीने लागू होने वाली अहम टैरिफ समयसीमा से पहले समझौते के प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बना ली जाए। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में एक व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार समझौते का आधार तैयार करेगा।

    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि अमेरिका के उनके समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और लंबित मुद्दों को तेजी से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी स्पष्ट किया था कि आगामी वार्ता का प्रमुख उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते के लिए रास्ता तैयार करना है।

    यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका द्वारा अपने व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन ने यह अतिरिक्त शुल्क इस वर्ष की शुरुआत में लागू किया था। अब इसकी अवधि समाप्त होने के बाद नई टैरिफ व्यवस्था लागू हो सकती है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों इस समयसीमा से पहले व्यापारिक मुद्दों पर स्पष्टता लाने के इच्छुक हैं।

    इससे पहले 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच विस्तृत चर्चा हुई थी। उन बैठकों में भी बाजार पहुंच निवेश व्यापारिक नियमों और शुल्क संबंधी कई विषयों पर विचार-विमर्श किया गया था। अब मंत्रिस्तरीय स्तर पर होने वाली यह बैठक उन चर्चाओं को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अवसर मानी जा रही है।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा रक्षा फार्मास्यूटिकल्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देश व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापार समझौते का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है तो यह दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति देने के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक संदेश देगा।

  • भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर

    भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अमेरिका के 20वें व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह भारत पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को अंतिम रूप देने के करीब बताए जा रहे हैं। नई दिल्ली में ग्रीर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार समझौते से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ग्रीर के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से यह संकेत भी दिया कि आने वाले दिनों में व्यापार संबंधों को नई दिशा देने वाले फैसले सामने आ सकते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार ग्रीर भारत दौरे के बाद उज्बेकिस्तान जाएंगे लेकिन उससे पहले उनका पूरा ध्यान भारत के साथ व्यापारिक बातचीत को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह दौरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में शुरू की गई व्यापक व्यापार वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों नेताओं ने उस समय आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया था। इसके बाद से दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न स्तरों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस विषय पर गहन चर्चा हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने तब संकेत दिया था कि समझौते से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और शेष विषयों पर तेजी से काम किया जा रहा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक कई लंबित मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बाजार पहुंच शुल्क व्यवस्था निवेश सहयोग और व्यापारिक नियमों से जुड़े विषय वार्ता के केंद्र में रहने वाले हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक दशक में व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा फार्मास्यूटिकल्स सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही रक्षा नई तकनीक महत्वपूर्ण खनिज शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत हुई है।

    हालांकि कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी बने हुए हैं। अमेरिका लंबे समय से भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग करता रहा है जबकि भारत घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाने पर जोर देता है। इसके बावजूद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि एक व्यापक और संतुलित व्यापार समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों निवेशकों और उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका की साझेदारी और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (BTA) को लेकर आज 20 अप्रैल से वॉशिंगटन डीसी में अहम दौर की बातचीत शुरू हो रही है। तीन दिन तक चलने वाली इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। उनके साथ कस्टम और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

    टैरिफ बदलाव से बिगड़ा समीकरण

    यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव आया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों के आयात पर 10% का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया।

    पहले प्रस्तावित डील के तहत अमेरिका भारत के उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत था, लेकिन नए नियम के बाद सभी देशों पर समान शुल्क लगने से भारत को मिलने वाला खास फायदा कम हो गया। यही वजह है कि अब दोनों देशों को डील की शर्तों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

    सेक्शन 301 भी बड़ा मुद्दा

    बातचीत में सेक्शन 301 के तहत अमेरिका द्वारा शुरू की गई जांच भी अहम मुद्दा रहेगी। अमेरिका का आरोप है कि भारत कुछ क्षेत्रों में अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाता है, जबकि भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें खत्म करने की मांग की है।

    किन सेक्टर पर होगी चर्चा?

    प्रस्तावित डील में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने का संकेत दिया था। इनमें शामिल हैं:

    सोयाबीन तेल
    ड्राई फ्रूट्स
    फल
    वाइन और स्पिरिट्स
    पशु आहार

    इसके बदले भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर तक आयात बढ़ाने की इच्छा जताई है।

    कृषि सेक्टर बना सबसे बड़ा अड़ंगा

    अमेरिका की ओर से बाजार पहुंच (Market Access) सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा है कि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने निर्यात के लिए बेहतर अवसर चाहता है।

    खासतौर पर कृषि क्षेत्र—जहां टैरिफ ज्यादा हैं—विवाद का केंद्र बन गया है।

    सेब पर टैरिफ बना विवाद की जड़

    अमेरिका ने भारत में सेब पर 50% टैरिफ को बड़ा मुद्दा बताया है। इसका असर साफ दिखा है:

    2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी: 53%
    अब घटकर: करीब 8.5%

    इस दौरान ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

    क्यों फंसा पेंच?

    अमेरिकी टैरिफ नीति में अचानक बदलाव
    सेक्शन 301 की जांच
    कृषि और खासकर सेब जैसे उत्पादों पर ऊंचा शुल्क
    भारत को मिलने वाला पहले का तुलनात्मक लाभ खत्म होना

    अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह नया दौर दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक लाभ वाली ट्रेड डील का रास्ता साफ कर पाएगा या नहीं।

  • टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा

    टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से टैरिफ (Tariff) को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को करारा झटका लगने के बाद भारत (India) के साथ व्यापार समझौते (Trade Agreements) को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित बैठक को भी नए सिरे से तय करने का फैसला किया गया है। भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन में अपने मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को नए सिरे से तय करने का फैसला किया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    फिर से तय की जाएगी तारीख

    भारतीय दल 23 फरवरी से तीन दिन की बैठक शुरू करने वाला था। वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के लिए मुख्य वार्ताकार हैं। एक सूत्र ने कहा, ”भारत-अमेरिका व्यापार करार के लिए भारतीय वार्ताकारों की अमेरिका यात्रा के संदर्भ में दोनों पक्षों का मानना है कि अब यह बैठक तब होनी चाहिए जबकि दोनों पक्ष ताजा घटनाक्रमों और उसके प्रभाव का आकलन कर लें। इसके लिए दोनों पक्षों को समय चाहिए। अब इस बैठक की तारीख दोनों पक्षों की सुविधा के हिसाब से नए सिरे से तय की जाएगी।’

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पहले के बड़े शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो जाता है। ट्रंप ने शुक्रवार को भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था। हालांकि, शनिवार को उन्होंने शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की।

    ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनके आर्थिक एजेंडा को एक बड़ा झटका देते हुए अमेरिकी शीर्ष अदालत ने उनके द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक अधिकार कानून (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। बाद में, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इससे भारत पर कुल शुल्क दर 50 प्रतिशत हो गई थी।


    15 फीसदी किया टैरिफ

    भारत और अमेरिका इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार करार को अंतिम रूप देने के लिए रूपरेखा पर सहमत हुए। इसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। साथ ही रूस से तेल खरीद के लिए लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त शुल्क को भी हटाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फिर से इन शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। अगर यह शुल्क अधिसूचित होता है, तो यह अमेरिका में मौजूदा एमएफएन या आयात शुल्क के अलावा होगा।

    उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लगता है, तो 15 प्रतिशत और जोड़कर यह 20 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है कि 150 दिन के समय के बाद भारत जैसे देशों पर अमेरिकी शुल्क क्या होगा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में, दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर था।

  • वैश्विक टैरिफ बढ़ोतरी के साए में भारत अमेरिका व्यापार वार्ता स्थगित, हालात की समीक्षा के बाद होगा अगला दौर

    वैश्विक टैरिफ बढ़ोतरी के साए में भारत अमेरिका व्यापार वार्ता स्थगित, हालात की समीक्षा के बाद होगा अगला दौर


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर होने वाली अहम बैठक को फिलहाल रीशेड्यूल कर दिया गया है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने बदलते वैश्विक व्यापारिक हालात और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक बैठक को टालने का निर्णय लिया है।

    दरअसल दोनों देशों के मुख्य ट्रेड नेगोशिएटर्स की अगुवाई वाली टीमों के बीच तीन दिन की बैठक 23 फरवरी से अमेरिका में प्रस्तावित थी। इस बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते के कई अहम बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना था। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों को अवैध करार दिए जाने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और दोनों पक्षों ने पहले कानूनी और नीतिगत प्रभावों का अध्ययन करने का फैसला किया।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि भारतीय टीम का प्रस्तावित वॉशिंगटन दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। दोनों देश पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों की विस्तार से समीक्षा करेंगे। इसके बाद आपसी सहमति से नई तारीख तय की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि निर्णय दोनों पक्षों की सुविधा और रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    गौरतलब है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि कार्यपालिका ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाकर अपने संवैधानिक अधिकार का अतिक्रमण किया। इस फैसले के बाद ट्रंप के कई टैरिफ अमान्य हो गए हालांकि सभी नहीं।

    कोर्ट के इस निर्णय के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए पहले लगाए गए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैसले को शर्मनाक बताते हुए कहा कि कई देश दशकों से अमेरिका के साथ असंतुलित व्यापार कर रहे हैं और उनके पास वैकल्पिक योजना भी तैयार है।

    इन घटनाक्रमों ने वैश्विक व्यापारिक माहौल को अस्थिर बना दिया है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौता ऐसे समय में हो रहा था जब दोनों देश आपसी व्यापार को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश में हैं। भारत की ओर से बाजार पहुंच, शुल्क संरचना और निवेश से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता की अपेक्षा है जबकि अमेरिका भी संतुलित व्यापारिक ढांचे पर जोर दे रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और टैरिफ बढ़ोतरी से उत्पन्न अनिश्चितता के बीच दोनों देशों का सावधानीपूर्वक कदम उठाना रणनीतिक रूप से उचित है। पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी उसके बाद ही किसी औपचारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना सुरक्षित माना जा रहा है।

    फिलहाल दोनों पक्ष हालात पर नजर बनाए हुए हैं और नई तारीख जल्द तय होने की संभावना जताई जा रही है। यह स्पष्ट है कि वैश्विक टैरिफ नीति और कानूनी पेचीदगियां भारत अमेरिका व्यापार संबंधों की गति और दिशा दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

  • यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया

    यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया



    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान उस समय सियासी भूचाल आ गया जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के भीतर अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह समिट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल थे।

    क्या हुआ था?
    प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, 8‑10 प्रदर्शनकारी अचानक मुख्य सभागार के समीप पहुंच गए, टी‑शर्ट उतारकर नारेबाजी करने लगे और कथित तौर पर भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और कार्यक्रम बाधित हुए बिना आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रतिनिधि को शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

    मायावती की कड़ी प्रतिक्रिया
    घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस प्रदर्शन को “अत्यंत अशोभनीय और निंदनीय” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का व्यवहार देश की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
    मायावती ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति सभ्य और मर्यादित तरीके से होनी चाहिए।

    BJP का हमला
    सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह का प्रदर्शन भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
    BJP का कहना है कि जब दुनिया AI और तकनीकी प्रगति में भारत की भूमिका की सराहना कर रही है, तब ऐसे विरोध देश को बदनाम करने वाले हैं।

    कांग्रेस का पक्ष
    वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से कहा गया कि युवा कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपनी आवाज उठाई। पार्टी नेताओं ने सरकार से असहमति को देशविरोधी बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है।

    सियासी असर और आगे की राह
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में और गर्मी ला सकता है।

    सत्तापक्ष इसे “राष्ट्रीय गरिमा” का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेर सकता है।

    विपक्ष इसे “लोकतांत्रिक अधिकार” और “नीतिगत असहमति” का मामला बताकर राजनीतिक बहस को नई दिशा दे सकता है।

    दिल्ली AI समिट में हुआ यह प्रदर्शन केवल कुछ मिनटों की घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन गया है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी छवि, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति का टकराव—दोनों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना रखता है।

  • राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र

    राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।

    सीतारमण का पलटवार: कांग्रेस ने भारत को बेचा
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत को बेचने का असली जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने याद दिलाया कि बाली में जाकर कांग्रेस ने सौदा किया था और किसानों के हक से समझौता किया। मोदी सरकार ने 2014 में विश्व व्यापार संगठन में जाकर इसे सुधारा।

    सीतारमण ने बजट पर सवाल उठाने वाले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के GST आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि बंगाल में पेट्रोल दिल्ली से 10रुपए ज्यादा महंगा है, जिसे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों में आर्थिक विकास सबसे नीचे है और वहां उद्योग नहीं टिकते।

    राहुल के अडाणी और अमेरिका केस वाले आरोप
    राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया और कहा कि यह मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल से सबूत पेश करने को कहा और संसद में विशेषाधिकार नोटिस देने की बात कही।

    सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और MSME के लिए सहायक नीतियों पर है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाया गया है।

    ओवैसी ने तेल और विदेश नीति पर सवाल उठाया
    एआईएमआईएमके असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी “गोरी चमड़ी वाले” को यह तय करने का अधिकार नहीं कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने ऑपरेशन इंसाफ, हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी को भारत लाने की मांग भी की।

  • अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी भारतीय दवाओं की पकड़ एक्सपर्ट

    अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी भारतीय दवाओं की पकड़ एक्सपर्ट


    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर जहां कई सेक्टरों में संशय और आशंकाएं बनी हुई हैं वहीं फार्मा सेक्टर को लेकर तस्वीर काफी सकारात्मक नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेड डील के बाद भारतीय फार्मा इंडस्ट्री की पकड़ अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी। कम लेबर कॉस्ट उन्नत निर्माण क्षमता और किफायती दवाओं के कारण भारत पहले से ही अमेरिका के लिए एक अहम फार्मा सप्लायर बना हुआ है और आने वाले समय में यह निर्भरता और गहरी हो सकती है।

    जोटा हेल्थकेयर के चेयरमैन केतन जोटा ने इस विषय पर कहा कि अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा एफडीए अप्रूव्ड दवा निर्माण प्लांट भारत में स्थित हैं। यह अपने आप में भारतीय फार्मा सेक्टर की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाएं लाइफ सेविंग मेडिसिन और क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं निर्यात की जाती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में भारत की भूमिका बेहद अहम बन चुकी है।

    केतन जोटा के अनुसार प्रस्तावित ट्रेड डील भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि टैरिफ के मामलों में अमेरिका का रुख आमतौर पर सख्त रहा है और वह शायद ही कभी झुकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कूटनीतिक स्तर पर संतुलित और लाभकारी समझौता संभव हुआ है। यह डील दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है जिससे व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत से अमेरिका को मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियों से जुड़ी दवाओं का निर्यात किया जाता है। इसमें डायबिटीज ब्लड प्रेशर थायराइड और अन्य लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। अमेरिकी बाजार में इन दवाओं की मांग लगातार बनी रहती है क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं की लागत काफी अधिक है और भारतीय जेनरिक दवाएं किफायती विकल्प के रूप में देखी जाती हैं।

    केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि यूरोपीय संघ के साथ हुई ट्रेड डील से भी भारतीय फार्मा सेक्टर को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत कई दवाओं के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को शून्य प्रतिशत कर दिया गया है। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में और प्रतिस्पर्धी बनने का मौका मिलेगा। साथ ही इस डील से टेक्नोलॉजी और व्यापार का ट्रांसफर भी भारत में होगा जिससे दवा निर्माण प्रक्रिया और उन्नत होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सीधा असर भारत में दवा उत्पादन की लागत पर पड़ेगा। बड़े पैमाने पर उत्पादन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दवाओं की लागत और कम होगी। इसका फायदा केवल एक्सपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि घरेलू बाजार में भी मरीजों को सस्ती और प्रभावी दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

    इस तरह भारत अमेरिका ट्रेड डील और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। इससे भारत की वैश्विक साख मजबूत होगी एक्सपोर्ट में इजाफा होगा और देश के भीतर हेल्थकेयर सिस्टम को भी मजबूती मिलेगी। फार्मा सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर सकता है।