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  • भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा

    भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि अमेरिका द्वारा सेक्शन 301 के तहत लागू किए गए अंतिम टैरिफ उपायों में भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के साथ लगातार संवाद और सक्रिय भागीदारी का ही परिणाम है कि भारत को प्रस्तावित शुल्क की तुलना में राहत मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों को कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की थी। यह कार्रवाई उन देशों और अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की समीक्षा के बाद की गई जिनकी जांच कथित फोर्स्ड लेबर से जुड़े आयात नियमों के संदर्भ में की गई थी। इस प्रक्रिया में भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं।

    सरकार के अनुसार शुरुआती प्रस्ताव में भारत से आयातित उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई थी लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। सरकार का मानना है कि यह कमी भारत की सक्रिय कूटनीतिक और व्यापारिक पहल का परिणाम है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि भारत ने लिखित प्रस्तुतियों व्यक्तिगत स्तर पर विचार विमर्श और सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से लगातार अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा। जेनेरिक दवाएं स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा। इसके अलावा स्टील एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे वे उत्पाद जो पहले से सेक्शन 232 के तहत अलग व्यवस्था में आते हैं उन पर भी यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं किया जाएगा।

    इन छूटों के कारण अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त सेक्शन 301 शुल्क से मुक्त रहेगा। शेष लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू होगा लेकिन सरकार का कहना है कि अन्य कई देशों की तुलना में भारत पर कुल टैरिफ का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए बातचीत लगातार जारी है। विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद चल रहा है। सरकार का मानना है कि भविष्य में यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में और बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से कम टैरिफ श्रेणी में रखा जाना भारतीय निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे कई क्षेत्रों में लागत का दबाव कम रहेगा और भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में सक्षम होंगी। साथ ही यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और व्यापारिक विश्वास का भी संकेत माना जा रहा है।

  • ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी

    ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारतीय निर्यात को हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता अब यूरोप की ओर से दिखाई दे रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अंतिम चरण में है और अगर यह समझौता 27 जनवरी को औपचारिक रूप से हो गया तो यह भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत साबित होगी।

    ट्रंप के टैरिफ से कितना हुआ नुकसान?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्त में भारत पर 25-25% टैरिफ लगाए थे। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू हो गया, जिससे भारतीय निर्यात क्षेत्र को लगभग 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

    अब एक डील से 10 गुना फायदा
    भारत ने इस नुकसान को कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठाया और अब एक ही डील से न सिर्फ यह नुकसान भरपाई हो जाएगी, बल्कि उस नुकसान से 10 गुना ज्यादा कमाई का रास्ता खुल सकता है।
    27 जनवरी को होने वाले EU-India FTA से भारत एक साथ 27 यूरोपीय देशों के बाजार में बिना शुल्‍क के कारोबार करने का अवसर पाएगा।

    ‘मदर ऑफ आल डील’ क्यों कहा जा रहा है?
    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ आल डील’ कहा है। क्योंकि इस एक समझौते से भारत को यूरोप के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा, जो भारतीय निर्यात को एक बड़ा बाजार प्रदान करेगा।
    इस समय यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है।

    भारतीय निर्यात को कितना फायदा होगा?
    अगर EU-India FTA लागू होता है, तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्लस लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
    एमके ग्लोबल की शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के पूरा होने पर वित्त वर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
    वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 17.3% थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22-23% तक बढ़ने का अनुमान है।

    यूरोप को भी फायदा होगा
    यह डील सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार के लिए भी फायदेमंद होगी।
    हालांकि अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.8% है, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा था।
    वित्त वर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था।

    इस डील के बाद भारत का यूरोप के साथ व्यापार और बढ़ेगा और यूरोप का घाटा भी बढ़ सकता है।
    फिर भी यूरोप ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्लाई का विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। इसलिए यूरोप में भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल की खरीद पहले से बढ़ रही है, और FTA के बाद इसमें और तेजी आने की संभावना है।

    किस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा?
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे अधिक लाभ होने का अनुमान है।
    वर्तमान वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8% पर आ गई है।
    लेकिन इस डील के बाद भारत के साथ यूरोप का व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना है।

    EU-India FTA के लागू होने से भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और यह ट्रंप के टैरिफ के नुकसान की भरपाई के साथ 10 गुना अधिक लाभ का मार्ग खोल सकता है।
    यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई दिशा दे सकती है और भारत को विश्व व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करेगी।