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  • मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर

    मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली।
    भारत में अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। विश्व मौसम संगठन यानी डब्ल्यूएमओ के ताजा अनुमान के मुताबिक प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने की यह स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है। इसका असर भारत के मौसम और कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के कारण सर्दियों की बारिश और तापमान प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही आने वाले महीनों में फसलों की पैदावार और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी नजर रखनी होगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव का वास्तविक आकलन करने के लिए मौसम के ताजा आंकड़ों और अगले मानसून के पूर्वानुमान को समझना जरूरी होगा।
    विश्व मौसम संगठन के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है।

    रिपोर्ट में दिसंबर के आसपास इसके चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। कुछ अनुमानों में तापमान सामान्य से करीब चार डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि ऐसा होता है तो अल नीनो की स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे पहले 2015 में भी इस जलवायु घटना का प्रभाव काफी व्यापक रहा था। नए अनुमान में तापमान के चरम पर पहुंचने का समय नवंबर से बढ़ाकर दिसंबर बताया गया है। ऐसे में आशंका है कि इसका प्रभाव फरवरी 2027 के बाद भी कुछ समय तक बना रह सकता है।

    अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है। भारत में इसका संबंध अक्सर मानसूनी बारिश में बदलाव से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो वर्ष में भारत में सूखा पड़े या बारिश सामान्य से कम हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसका असर अन्य मौसमी परिस्थितियों और समुद्र तथा वायुमंडल के बीच होने वाली गतिविधियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए अगले मानसून की स्थिति को लेकर अभी से किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    इस बीच कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम रही और धान की बुवाई का क्षेत्र करीब 17 लाख हेक्टेयर घटा है। इसके चलते धान उत्पादन में लगभग 70 लाख टन की कमी आने का अनुमान जताया गया है। भारत में चावल प्रमुख खाद्यान्नों में शामिल है और देश में इसकी खपत के मुकाबले उत्पादन आम तौर पर अधिक रहता है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट का वास्तविक असर घरेलू आपूर्ति और बाजार कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि उपलब्धता प्रभावित होती है तो चावल समेत कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि उत्पादन में अनुमानित कमी का मतलब यह नहीं है कि देश में अनाज की तत्काल कमी हो जाएगी।

    मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के अनुसार अल नीनो का मिश्रित प्रभाव मानसून पर देखा गया है और धान की बुवाई में कमी आई है। उनका कहना है कि जितनी गंभीर आशंका जताई जा रही थी उतना प्रतिकूल असर सामने नहीं आया। उन्होंने फरवरी और मार्च तक परिस्थितियां सामान्य होने की उम्मीद जताई है। सर्दियों की बारिश के संबंध में भी कुछ पूर्वानुमानों में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बताई गई है। इससे साफ है कि अल नीनो के प्रभाव का आकलन करते समय सभी मौसमी संकेतों को साथ लेकर चलना होगा।

    जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट में तापमान बढ़ने से भारत की आर्थिक वृद्धि को होने वाले संभावित नुकसान की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी से कृषि उत्पादकता और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे रोजगार और आर्थिक विकास की गति पर दबाव पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और फसल उत्पादन के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे। किसानों के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान जल प्रबंधन और कृषि संबंधी तैयारी इस चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।

  • आज 4 जून को बदलेगा मौसम का मिजाज, 12 राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट, 90 किमी प्रति घंटे तक चलेंगी हवाएं

    आज 4 जून को बदलेगा मौसम का मिजाज, 12 राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट, 90 किमी प्रति घंटे तक चलेंगी हवाएं

    नई दिल्ली । देशभर में भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने आज  4 जून को कई राज्यों में मौसम के बड़े बदलाव की संभावना जताई है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक विभिन्न क्षेत्रों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इसके चलते कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के अनुकूल बनने से उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। राजधानी क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इससे लंबे समय से जारी गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे लू जैसी परिस्थितियों में कमी आएगी।

    उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिनकी गति 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए खुले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

    पंजाब और हरियाणा में मौसम विभाग ने विशेष निगरानी रखते हुए कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। हाल के दिनों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन अब मौसम के बदलते रुख के कारण लोगों को राहत मिलने की संभावना है। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी और तापमान नियंत्रित रहेगा।

    उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी आशंका व्यक्त की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है क्योंकि खराब मौसम के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है।

    दक्षिण भारत में भी मौसम की गतिविधियां तेज हो रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर पहुंचने की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मानसून की प्रगति के साथ तटीय क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों की ओर आगे बढ़ेगा। केरल और कर्नाटक के कई इलाकों में पहले से ही वर्षा का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की संभावना है।

    महाराष्ट्र, कोंकण क्षेत्र और गोवा में भी मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र सहित आसपास के शहरों में हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस में कमी महसूस होगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के दूसरे सप्ताह तक पश्चिमी तट के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा और अधिक बढ़ सकता है।

    देशभर में बदलते मौसम के बीच मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों से दूर रहने और आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। आगामी कुछ दिन कई राज्यों के लिए राहत भरे तो कुछ क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देना आवश्यक होगा।

  • मौसम का मिजाज बदला: कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

    मौसम का मिजाज बदला: कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

    मध्‍य प्रदेश। 21 मई का दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मिले-जुले मौसम का संकेत दे रहा है। कहीं तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर सकती है, तो वहीं कुछ राज्यों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से मौसम सुहावना होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्री-मानसून गतिविधियां अब धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं, जिससे मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है और दोपहर के समय लू जैसे हालात भी महसूस किए जा सकते हैं। वहीं शाम होते-होते कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बादल छाने की संभावना जताई गई है।

    मध्य प्रदेश सहित इन राज्यों में गर्मी का असर जारी
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर रहेगा। खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तापमान चरम पर रह सकता है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्के बादल और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि पूरी तरह राहत की उम्मीद अभी कम ही है।

    दक्षिण और पूर्वी भारत में बारिश की संभावना
    दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी दबाव के कारण कुछ इलाकों में तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है

    आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट
    कई राज्यों में अचानक मौसम बदलने की संभावना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना रह सकता है। किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
     IMD ने कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में अस्थिरता बनी रहेगी, जिससे कभी तेज धूप तो कभी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम
    दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय गर्म हवाएं चल सकती हैं। शाम तक आंशिक बादल छाने की संभावना है। हालांकि बारिश की संभावना फिलहाल सीमित है, लेकिन मौसम में हल्की ठंडक महसूस हो सकती है।

    21 मई का मौसम देशभर में पूरी तरह मिश्रित रहने वाला है। कहीं गर्मी का प्रकोप तो कहीं बारिश की राहत देखने को मिलेगी। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।