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  • इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी


    नई दिल्ली। 17 फरवरी 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित केसबुक का विमोचन किया गया। यह पहल इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूएन वीमेन की संयुक्त पहल है जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसका समर्थन किया। इस केसबुक में ग्लोबल साउथ के 23 चुनिंदा एआई समाधानों को शामिल किया गया है जो महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण में ठोस प्रभाव दिखाते हैं।

    विमोचन समारोह में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक और यूएन वीमेन की एशिया पैसिफिक क्षेत्रीय निदेशक सुश्री क्रिस्टीन अरब उपस्थित थीं।

    इस केसबुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली। 20 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जनएआई एक्सपो में यूएन वीमेन के स्टॉल का दौरा किया। इस अवसर पर महासचिव ने वी एसटीईएम परियोजना के तहत ग्रामीण युवाओं को एसटीईएम करियर में प्रशिक्षित करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह परियोजना मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों यूरोपीय संघ माइक्रोन नोकिया और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है।

    महिलाओं ने बताया कि वे एआई का उपयोग करके नए कौशल सीख रही हैं शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही हैं और रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। केसबुक की एक प्रति यूएन वीमेन की एआई कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने महासचिव को भेंट की। अवर महासचिव और प्रौद्योगिकी मामलों पर महासचिव के दूत अमनदीप सिंह गिल भी उपस्थित थे।

    यह केसबुक 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 आवेदनों में से चयनित 23 एआई समाधानों को शामिल करती है। चयन प्रक्रिया बहु स्तरीय मूल्यांकन पर आधारित थी जिसमें उपयोगिता लैंगिक प्रभाव और साक्ष्य आधारित परिणामों को परखा गया। इसमें स्वास्थ्य आर्थिक सशक्तिकरण डिजिटल सुरक्षा जलवायु लचीलापन न्याय शिक्षा और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

    केसबुक नीति निर्माताओं शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं के लिए व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई सिस्टम नैतिक समावेशी और महिलाओं की वास्तविकताओं के प्रति उत्तरदायी हों। यह प्रकाशन भारत के लोकतांत्रिक एआई प्रसार दृष्टिकोण और इंडियाएआई मिशन के लिंग संवेदनशील सिद्धांतों को भी सुदृढ़ करता है।

    इस पहल में भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की प्रभावी साझेदारी दिखाई देती है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रणनीतिक दिशा प्रदान की यूएन वीमेन ने वैश्विक समन्वय और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच हुआ। इसका उद्देश्य जिम्मेदार समावेशी और प्रभावशाली एआई को प्रोत्साहित करना था जिससे भारत वैश्विक एआई शासन ढांचे के सह निर्माता के रूप में स्थापित हो सके।

  • इंडियाएआई मिशन का असर, सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर इलाज

    इंडियाएआई मिशन का असर, सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर इलाज


    नई दिल्ली। भारत ने अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को रणनीतिक रूप से शामिल किया है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना, बीमारी की जल्द पहचान सुनिश्चित करना और दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर इलाज पहुंचाना है।

    आधिकारिक बयान में बताया गया कि एआई टूल्स का उपयोग अब कई प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किया जा रहा है। National TB Elimination Programme के तहत एआई आधारित स्क्रीनिंग और विश्लेषण से टीबी के गंभीर मामलों में 27 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इसी तरह National Diabetic Retinopathy Screening Programme में एआई की मदद से गैर-विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मी भी शुरुआती जांच कर पा रहे हैं।

    बीमारी निगरानी प्रणाली में एआई के इस्तेमाल से अब तक 4,500 से अधिक संभावित प्रकोपों के अलर्ट समय रहते मिल चुके हैं, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी। इससे संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिली है।

    डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म eSanjeevani ने इस बदलाव को और मजबूती दी है। इस ऑनलाइन परामर्श सेवा के जरिए अब तक 28.2 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सलाह मिल चुकी है। एआई आधारित टूल्स डॉक्टरों को बीमारी की पहचान और उपचार निर्णय में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

    सरकार ने कुपोषण की निगरानी के लिए भी एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग शुरू किया है। इससे बच्चों और माताओं में पोषण संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है।

    अब भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं रहा। कैंसर के उपचार, आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण और National One Health Programme के तहत मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित दृष्टिकोण में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

    इसी कड़ी में 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ के पहले अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जहां नीति, शोध, उद्योग और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

    मार्च 2024 में प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने IndiaAI Mission को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य एआई के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देना है।
    इसी मिशन के तहत ‘इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव’ भी चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश की प्रमुख समस्याओं के समाधान हेतु स्वदेशी एआई समाधान विकसित करना है। बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं इस पहल का एक महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही हैं।

    सरकार का दावा है कि एआई के इस्तेमाल से दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुधर रही है, उपचार की लागत घट रही है और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंच रही हैं। यदि यह पहल इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र डिजिटल और तकनीकी दृष्टि से और अधिक सशक्त हो सकता है।