Tag: Indian Army Operation

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य चक्र से हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।

    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।

    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई।सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।

    यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है। सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के और इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर मिला शौर्य चक्र, हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
    शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।
    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन का स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।
    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है।
    सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
    पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है।सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव केऔर इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।
  • PAK के पहले CDF बनने पर आसिम मुनीर ने दी भारत को चेतावनी: अगला जवाब और भी सख्त होगा

    PAK के पहले CDF बनने पर आसिम मुनीर ने दी भारत को चेतावनी: अगला जवाब और भी सख्त होगा


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan) के पहले CDF यानी चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (Chief of Defence Forces) नियुक्त होने के बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Field Marshal Asim Munir) ने भारत (India) का जिक्र कर दिया। अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अगला जवाब और भी सख्त होगा। मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तानी क्षेत्र में प्रवेश कर कार्रवाई की थी, जिसके बाद दोनों मुल्कों के बीच करीब 4 दिन संघर्ष चला। हालांकि, बाद में पाकिस्तान की ओर से अनुरोध किए जाने के बाद सीजफायर का ऐलान किया गया था।

    मुनीर ने कहा, ‘भारत को किसी भी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान का जवाब और भी तेज और ज्यादा सख्त होगा।’ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। भारत ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ऐक्शन लिया था।

    मिला गार्ड ऑफ ऑनर
    देश के पहले सीडीएफ के रूप में नियुक्त होने पर मुनीर को सम्मानित करने के लिए जीएचक्यू (मुख्यालय) में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण करने के बाद मुनीर ने सशस्त्र बलों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि किसी भी आक्रमण की स्थिति में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ‘बहुत अधिक तीव्र और गंभीर’ होगी।

    मुनीर ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण राष्ट्र है, लेकिन आगाह किया कि किसी को भी इस्लामाबाद की क्षेत्रीय अखंडता या संप्रभुता को परखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    अफगानिस्तान से तनाव पर क्या कहा
    पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर मुनीर ने कहा कि काबुल में अफगान तालिबान शासन को एक स्पष्ट संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘(अफगान) तालिबान के पास फितना अल-खवारिज (TTP) और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’ सरकार ने पिछले वर्ष प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को ‘फितना अल-खवारिज’ के रूप में अधिसूचित किया था, जो कि इस्लामी इतिहास के एक ऐसे समूह का संदर्भ है जो हिंसा में शामिल था।

    फील्ड मार्शल मुनीर ने पहले सीडीएफ के रूप में कार्यभार संभाला है। सरकार ने मुनीर की नई भूमिका में नियुक्ति के लिए पांच साल के कार्यकाल को लेकर पिछले सप्ताह अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही वह सेना प्रमुख के रूप में भी कार्य करेंगे। सीडीएफ का गठन पिछले महीने 27वें संविधान संशोधन और उसके बाद पाकिस्तान सेना, वायुसेना और नौसेना (संशोधन) विधेयक 2025 में किए गए बदलावों के बाद किया गया।