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  • Iran-US-Israel War: ईरान ने भारत को कहा “शुक्रिया”, मानवीय मदद के लिए सराहा

    Iran-US-Israel War: ईरान ने भारत को कहा “शुक्रिया”, मानवीय मदद के लिए सराहा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष के बीच भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सराहना मिली है। ईरान ने खुलकर भारत का धन्यवाद किया। यह घटना 20 फरवरी 2026 को शुरू हुई जब ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उसे तत्काल मदद की जरूरत थी।

    भारत ने तुरंत दिया मानवीय सहयोग
    ईरानी युद्धपोत ने भारत से कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी। भारत ने बिना किसी देरी के इस मानवीय अनुरोध को स्वीकार कर लिया। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि ईरान ने अपने जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति 20 फरवरी को मांगी थी, जिसे 1 मार्च 2026 को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद 4 मार्च 2026 को IRIS Lavan कोच्चि पोर्ट पर पहुंचा।

    जहाज का क्रू फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित रूप से मौजूद है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि यह कदम केवल मानवीय और दोस्ताना सहयोग के तहत किया गया है।

    ईरान ने जताया आभार
    ईरानी अधिकारियों ने भारत के इस कदम को दोस्ताना और मानवीय सहयोग बताते हुए आभार व्यक्त किया। यह कदम ऐसे समय में आया जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तनाव का माहौल लगातार बढ़ रहा था, खासकर अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के विवाद के चलते।

    भारत की कूटनीतिक नीति
    भारत ने साफ किया है कि वह मौजूदा हालात में शांति, बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने का पक्षधर है। इस कदम से यह संदेश भी गया कि भारत वैश्विक मानवीय मूल्यों और सुरक्षा का समर्थन करता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों में सीधा भागीदारी से बचता है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
    अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक युद्धपोत को समुद्र में निशाना बनाया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। ऐसे समय में भारत की मदद ने ईरान के जहाज और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता और तटस्थ नीति को उजागर करती है।

    कोच्चि पोर्ट का महत्व
    कोच्चि बंदरगाह इस प्रकार के मानवीय और तकनीकी सहयोग के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और पोर्ट अथॉरिटीज़ ने जहाज और उसके क्रू के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई। यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता क्षमताओं को भी दर्शाता है।

    ईरान का भारत को धन्यवाद कहना केवल एक मानवीय सहयोग की घटना नहीं है, बल्कि यह मिडिल ईस्ट में भारत की संतुलित कूटनीति और भरोसेमंद भूमिका को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि शांति और बातचीत के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करना भारत की प्राथमिकता है।

  • एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900

    एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900


    नई दिल्ली। भारत में 11,000 से अधिक पायलट देश की बड़ी घरेलू एयरलाइंस में काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 1,900 महिला पायलट शामिल हैं। यह जानकारी सरकार ने गुरुवार को संसद में दी। भारतीय विमानन कंपनियों में कुल 11,394 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 1,871 महिला पायलट शामिल हैं।

    एयरलाइनवार पायलट आंकड़े
    देश की प्रमुख एयरलाइनों में पायलटों की संख्या इस प्रकार है:

    इंडिगो: सबसे बड़ी एयरलाइन, 5,200 पायलट, जिनमें 970 महिला पायलट शामिल।

    एयर इंडिया: 3,123 पायलट, जिनमें 508 महिला पायलट।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 1,820 पायलट, 234 महिलाएं।

    अकासा एयर: 761 पायलट, 76 महिलाएं।

    स्पाइसजेट: 375 पायलट, 58 महिलाएं।

    एलायंस एयर: 115 पायलट, 25 महिलाएं।

    सरकार ने यह भी बताया कि विदेशी पायलटों की तादाद कुछ एयरलाइनों में है। एलायंस एयर में 15, एयर इंडिया एक्सप्रेस में 48 और इंडिगो में 29 विदेशी पायलट कार्यरत हैं।

    पायलट-से-विमान अनुपात
    विभिन्न एयरलाइनों में पायलट-से-विमान अनुपात अलग है:

    स्पाइसजेट: 9.4 पायलट प्रति विमान

    अकासा एयर: 9.33

    एयर इंडिया: 9.1

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 8.8

    इंडिगो: 7.6

    एलायंस एयर: सबसे कम, 6 पायलट प्रति विमान

    इससे एयरलाइनों में फ्लाइट ऑपरेशन के लिए पायलट उपलब्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    महिला पायलटों का बढ़ता योगदान
    महिला पायलटों की संख्या भारतीय विमानन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों में महिला पायलट अब टीम की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बन चुकी हैं। यह न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

    भारतीय विमानन क्षेत्र में विदेशी पायलट
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ एयरलाइनों ने विदेशी पायलटों को काम पर रखा है। यह कदम तकनीकी विशेषज्ञता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैश्विक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    नियमों में कड़ाई का प्रस्ताव
    इस बीच, डीजीसीए ने भारत से आने-जाने वाली विदेशी एयरलाइनों के लिए नियमों को कड़ा करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण, स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए कानूनी जवाबदेही, और औपचारिक यात्री शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना शामिल है। इसका उद्देश्य एयरलाइन संचालन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाना है।

    संसद में दिए गए आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत की प्रमुख एयरलाइंस में पायलटों की संख्या और उनका वितरण संतुलित है। महिला पायलटों की बढ़ती संख्या और पायलट-से-विमान अनुपात की जानकारी एयरलाइनों के सुरक्षित और सतत संचालन के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। साथ ही, डीजीसीए के नए नियमों से यात्रियों और पायलट दोनों के लिए सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।