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  • भारतीय गेंदबाजों का कहर, अफगानिस्तान के 5 विकेट गिरे; मैच पर टीम इंडिया की मजबूत पकड़

    भारतीय गेंदबाजों का कहर, अफगानिस्तान के 5 विकेट गिरे; मैच पर टीम इंडिया की मजबूत पकड़



    नई दिल्ली। मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में मेजबान टीम ने दूसरे दिन के खेल के बाद अपना पलड़ा पूरी तरह भारी कर लिया है। भारतीय बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन के बाद गेंदबाजों ने भी बेहतरीन खेल दिखाते हुए अफगानिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक अफगानिस्तान ने अपनी पहली पारी में 113 रन पर पांच विकेट गंवा दिए हैं और वह अब भी भारत के स्कोर से 459 रन पीछे है।

    भारत ने दूसरे दिन अपनी पहली पारी 564 रन पर 8 विकेट के स्कोर पर घोषित की। इस विशाल स्कोर की नींव शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने रखी। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई। हालांकि जायसवाल ज्यादा देर टिक नहीं सके और 24 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद केएल राहुल और साई सुदर्शन ने दूसरे विकेट के लिए 139 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    साई सुदर्शन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 81 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने मोर्चा संभाला और राहुल के साथ मिलकर टीम का स्कोर आगे बढ़ाया। राहुल ने अपने अनुभव का शानदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ा और 100 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उनके आउट होने के बाद भी भारतीय बल्लेबाजी का आक्रमण जारी रहा।

    कप्तान शुभमन गिल और ऋषभ पंत ने चौथे विकेट के लिए 169 रन की बेहतरीन साझेदारी की। गिल ने कप्तानी पारी खेलते हुए 126 रन बनाए, जिसमें 16 चौके शामिल रहे। वहीं ऋषभ पंत ने अपने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 81 रन का योगदान दिया। निचले क्रम में वॉशिंगटन सुंदर ने नाबाद 52 रन बनाकर टीम को 564 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    अफगानिस्तान की ओर से गेंदबाजी में मोहम्मद सलीम सैफी सबसे सफल रहे। उन्होंने 27 ओवर में 140 रन देकर 6 विकेट हासिल किए। उनके अलावा जियाउर रहमान और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी को एक-एक सफलता मिली।

    विशाल लक्ष्य के जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने 28 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया, जब अब्दुल मलिक 16 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद भी भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रखने में सफल रहे। रहमानुल्लाह गुरबाज, सेदिकुल्लाह अटल और अफसर जजई भी बड़ी पारी नहीं खेल सके।

    हालांकि रहमत शाह ने एक छोर संभालकर अफगानिस्तान की पारी को कुछ हद तक स्थिरता देने की कोशिश की। उन्होंने कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की और दिन का खेल समाप्त होने तक 43 रन बनाकर नाबाद लौटे। अफगानिस्तान को अब तीसरे दिन बड़ी साझेदारियों की जरूरत होगी ताकि वह फॉलोऑन के खतरे से बच सके।

    भारतीय गेंदबाजी में पदार्पण कर रहे मानव सुथार ने सबसे अधिक प्रभावित किया। उन्होंने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 15.5 ओवर में केवल 21 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा ने दो विकेट लेकर अफगानिस्तान के शीर्ष क्रम को झटके दिए।

    दूसरे दिन के खेल के बाद भारत पूरी तरह नियंत्रण की स्थिति में दिखाई दे रहा है। यदि तीसरे दिन भी भारतीय गेंदबाज इसी लय में रहे तो मेजबान टीम जल्द ही मैच को एकतरफा बनाते हुए जीत की दिशा में निर्णायक बढ़त हासिल कर सकती है।

  • डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

    डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं।

    दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है।

    इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं।

    आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है।

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