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  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 10 मिनट के अंतराल में दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। पहले प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा वर्ग का फाइनल जीतकर गोल्ड दिलाया, इसके तुरंत बाद जैस्मिन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज कर भारत की झोली में सातवां स्वर्ण पदक डाल दिया।

    जैस्मिन ने फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराया, जबकि प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। इन दोनों जीतों के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 27 पहुंच गई, जिसमें 7 गोल्ड शामिल हैं। भारत फिलहाल पदक तालिका में छठे स्थान पर है।

    अब 8 और भारतीय मुक्केबाज गोल्ड की दौड़ में
    भारतीय बॉक्सिंग टीम का अभियान अभी जारी है। दिनभर में आठ भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। इनमें जदुमणि सिंह (55 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90+ किग्रा) शामिल हैं।

    ट्रिपल जंप में भारत को दो और पदक
    एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ जीता।

    प्रीति और जैस्मिन का शानदार रिकॉर्ड
    हरियाणा की प्रीति पवार इससे पहले 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीते हैं।

    वहीं जैस्मिन लांबोरिया, जो वर्तमान में 57 किग्रा वर्ग की विश्व नंबर-1 मुक्केबाज हैं, 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल की भी स्वर्ण विजेता हैं। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था और पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    जूडो में उन्नति क्वार्टर फाइनल में
    जूडो की महिला 63 किग्रा स्पर्धा में उन्नति शर्मा ने राउंड ऑफ-16 में लामुलेला मागागुला को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया।

    आज 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स
    शनिवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 44 स्वर्ण पदक मुकाबले खेले जा रहे हैं। भारत के खिलाड़ी बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी पदक जीतने की चुनौती पेश कर रहे हैं।

    अन्य प्रमुख अपडेट
    – पैरा एथलेटिक्स की पुरुष 1500 मीटर T54 स्पर्धा में रमेश शनमुगम सातवें स्थान पर रहे।
    – महिला 10,000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ को तीन रेड कार्ड मिलने के कारण अयोग्य (डिस्क्वालिफाई) घोषित कर दिया गया।
    – लॉन बॉल्स में भारतीय जोड़ी नवनीत सिंह और दिनेश कुमार का मुकाबला इंग्लैंड से होगा, जबकि नयनमोनी सैकिया महिला सिंगल्स में दक्षिण अफ्रीका की खिलाड़ी के खिलाफ उतरेंगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक


    नई दिल्ली । महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में भारतीय मुक्केबाज प्रीति ने मलावी की डेबरा मिटेंजे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट के जरिए शानदार जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत से ही प्रीति पूरी तरह हावी रहीं और उन्होंने अपने सटीक पंचों से प्रतिद्वंद्वी पर लगातार दबाव बनाए रखा। पहले राउंड में सभी जजों ने उन्हें बढ़त दी जबकि दूसरे राउंड में लगातार प्रभावी आक्रमण के कारण रेफरी को मुकाबला बीच में ही रोकना पड़ा। मुकाबले के दौरान डेबरा मिटेंजे दो बार नॉकडाउन भी हुईं। इस शानदार जीत के साथ प्रीति ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया जहां उनका मुकाबला नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड से होगा। यह मुकाबला सेमीफाइनल में पहुंचने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में भारत के जादूमणि सिंह ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के रहमान को 5-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया। पहले राउंड में मामूली बढ़त लेने के बाद उन्होंने दूसरे राउंड में पूरी तरह दबदबा कायम कर लिया और सभी जजों से पूरे अंक हासिल किए। इससे पहले जादूमणि ने शुरुआती मुकाबले में स्कॉटलैंड के एरॉन कुलेन को भी 5-0 से हराया था। लगातार दूसरी शानदार जीत के बाद उनसे पदक की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

    बॉक्सिंग के अलावा वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम भार उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय दल का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    वहीं पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चनंबम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाया जिसमें स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम का सफल प्रयास शामिल रहा। उनके इस प्रदर्शन ने भारत के पदकों की संख्या में महत्वपूर्ण इजाफा किया।

    भारतीय खिलाड़ियों की इन लगातार सफलताओं से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश की पदक उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। अब सभी की नजरें बॉक्सिंग के आगामी मुकाबलों और अन्य स्पर्धाओं पर टिकी हैं जहां भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर देश के लिए पदक जीतने के इरादे से उतरेंगे।

  • मां थीं बॉक्सिंग के खिलाफ, समाज की बंदिशों को तोड़कर निकहत जरीन बनीं दो बार की विश्व चैंपियन

    मां थीं बॉक्सिंग के खिलाफ, समाज की बंदिशों को तोड़कर निकहत जरीन बनीं दो बार की विश्व चैंपियन


    नई दिल्ली । भारतीय महिला मुक्केबाजी की चमकती सितारा Nikhat Zareen आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। दो बार की विश्व चैंपियन बन चुकी निकहत ने न केवल रिंग में अपने मुक्कों का दम दिखाया, बल्कि उन सामाजिक बाधाओं को भी तोड़ा, जो अक्सर लड़कियों के सपनों के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी हो जाती हैं। उनकी सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

    14 जून 1996 को तेलंगाना के Nizamabad में जन्मीं निकहत जरीन का बचपन सामान्य परिवार में बीता। उनके परिवार में खेलों का माहौल जरूर था, लेकिन बॉक्सिंग को लेकर सभी की सोच एक जैसी नहीं थी। निकहत के चाचा बॉक्सिंग कोच थे और वे उनके भाइयों को प्रशिक्षण देते थे। यहीं से निकहत की रुचि भी इस खेल की ओर बढ़ी। हालांकि, जब उन्होंने खुद बॉक्सर बनने की इच्छा जताई तो परिवार के कई सदस्य इसके पक्ष में नहीं थे। उनकी मां भी नहीं चाहती थीं कि बेटी मुक्केबाजी जैसे कठिन और जोखिम भरे खेल में करियर बनाए। केवल उनके पिता ने उनका साथ दिया और उनके सपनों को पंख देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    महज 13 वर्ष की उम्र में निकहत ने तय कर लिया था कि उन्हें बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बनाना है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम और अनुशासन को अपना हथियार बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने चाचा से प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

    उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम 2011 में देखने को मिला, जब उन्होंने महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। इसके बाद 2014 में यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर उन्होंने अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ी होने का प्रमाण दिया।

    हालांकि सफलता की राह आसान नहीं थी। करियर के महत्वपूर्ण दौर में कंधे की गंभीर चोट ने उन्हें बड़ा झटका दिया। दाहिने कंधे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और लगभग एक वर्ष तक रिंग से दूर रहना पड़ा। कई खिलाड़ियों का करियर ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित हो जाता है, लेकिन निकहत ने हार नहीं मानी। कठिन पुनर्वास प्रक्रिया के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फिर से पदक जीतना शुरू कर दिया।

    साल 2021 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी वापसी का दमदार संकेत दिया। इसके बाद 2022 उनके करियर का स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ। तुर्किये के इस्तांबुल में आयोजित विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इसी वर्ष उन्होंने Commonwealth Games 2022 में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।

    निकहत का विजय अभियान यहीं नहीं रुका। 2023 में उन्होंने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। वह भारतीय दिग्गज मुक्केबाज Mary Kom के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में प्रतिष्ठित Arjuna Award से सम्मानित किया।

    आज निकहत जरीन केवल एक सफल खिलाड़ी नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में स्थायी नहीं बन सकती।

  • बीएफआई के नए नियमों पर भड़के कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट मनोज कुमार

    बीएफआई के नए नियमों पर भड़के कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट मनोज कुमार


    नई दिल्ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके मुक्केबाज मनोज कुमार ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के नए एथलीट मूल्यांकन नियम की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। इस नए सिस्टम के तहत 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2026 एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों का चयन होना है।

    बॉक्सर मूल्यांकन के बारे में फेडरेशन के नए नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज ने मॉनिटरिंग प्रोसेस से पुराने खिलाड़ियों, अर्जुन अवॉर्डी, द्रोणाचार्य अवॉर्डी और ओलंपियन के न होने पर सवाल उठाए।

    मनोज कुमार ने एक्स पर लिखा, “पूरी चयन प्रक्रिया सिर्फ हेड कोच, जज और फेडरेशन तक ही सीमित है। पुराने अर्जुन अवॉर्डी, द्रोणाचार्य अवॉर्डी, ओलंपियन और सीनियर खिलाड़ियों को ऑब्जर्वर या चयन मॉनिटर के तौर पर क्यों शामिल नहीं किया गया?”

    ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह और कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता अखिल कुमार जैसे अनुभवी नामों की मौजूदगी से यह प्रक्रिया और बेहतर हो सकती थी।

    उन्होंने कहा कि जब चयन प्रक्रिया में खिलाड़ियों के लिए पारदर्शिता और भरोसे की बात आती है, तो विजेंदर सिंह और अखिल कुमार जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी जरूर पक्की होनी चाहिए थी।

    बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने पहले 13 से 15 मई तक एनएस एनआईएस पटियाला में होने वाले एलीट नेशनल कैंपर्स के लिए एक बदले हुए मूल्यांकन नियम की घोषणा की थी।

    नए सिस्टम के तहत, मूल्यांकन ‘5-जज स्कोरिंग सिस्टम’ के आधार पर किया जाएगा। ऐसा बेहतर परिणाम के लिए किया गया है।

    मुक्केबाजी प्रतियोगिता के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के हिसाब से हर स्पैरिंग बाउट के खत्म होने के तुरंत बाद स्कोर की घोषणा की जाएगी।

    बीएफआई ने यह भी कहा कि पहले अपनाया गया मार्किंग सिस्टम मौजूदा मूल्यांकन में लागू नहीं होगा।

    बीएफआई ने रविवार को मुक्केबाजों पर स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग टेस्ट किए थे, जिन्हें अब रद्द कर दिया जाएगा। स्पोर्ट्स साइंस टेस्ट, भार प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अटेंडेंस में पहले मिले स्कोर वापस ले लिए जाएंगे और उन्हें रद्द माना जाएगा।

    बीएफआई के सचिव प्रमोद कुमार ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मुक्केबाजों का चयन एनएस एनआईएस में चल रहे एलीट नेशनल कैंपर्स का 13 मई से 15 मई तक किया जाएगा। इसमें मूल्यांकन नए नियम के आधार पर होगा।”