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  • उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को मिलेगी भारतीय नागरिकता, इनमें 153 पाकिस्तानी भी शामिल

    उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को मिलेगी भारतीय नागरिकता, इनमें 153 पाकिस्तानी भी शामिल


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के तहत बड़ी पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने सोमवार को घोषणा की कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट ऐक्ट 2019 (सीएए) के तहत राज्य में रह रहे 159 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अमित शाह के सात मार्च को उत्तराखंड दौरे के दौरान कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जाएगा।

    नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया है। यह कानून विशेष रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके अल्पसंख्यक समुदायों को राहत देने के उद्देश्य से लाया गया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर वर्षों से भारत में रह रहे शरणार्थी परिवारों की समस्याओं का समाधान किया है और उन्हें सम्मानजनक जीवन का अधिकार देने की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

    अमित शाह के कार्यक्रम में सम्मानित होंगे
    एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को उत्तराखंड के दौरे पर आएंगे। हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नागरिकता प्राप्त करने वाले परिवारों को सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए परिवार
    राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, नागरिकता पाने वाले 159 लोगों में से 153 पाकिस्तान और छह अफगानिस्तान से आए हैं। पाकिस्तान से आने वाले अधिकांश परिवार सिंध और बलूचिस्तान प्रांत के निवासी हैं। इन परिवारों के कई रिश्तेदार पहले से ही देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में निवास कर रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि पाकिस्तान स्थित माता हिंगलाज मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार ने भी भारत में शरण ली थी, जिन्हें अब भारतीय नागरिकता दी जा रही है।

  • फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी

    फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी


    नई दिल्ली। /पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजहां फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआजब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि कोली नाम की बांग्लादेशी महिला को मायना सेन के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।पुलिस के मुताबिकसाजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्डवोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंचीतो वहां मायना सेन मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया थाउनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कीजिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ कीतो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही मायना सेन नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।

    पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात कोली से हुई थीजो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

    आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मददजालसाज़ीफर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गयाजहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहांफर्जीदस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि ‘कोली’ नाम की बांग्लादेशी महिला को ‘मायना सेन’ के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।

    पुलिस के मुताबिक, साजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंची, तो वहां ‘मायना सेन’ मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया था, उनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ की, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही ‘मायना सेन’ नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात ‘कोली’ से हुई थी, जो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।

    पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मदद, जालसाज़ी, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।