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  • भारतीयों और चिल्कूर बालाजी मंदिर पर अमेरिकी सीनेटर का विवादित बयान, H-1B वीजा को बताया ‘कार्टेल’

    भारतीयों और चिल्कूर बालाजी मंदिर पर अमेरिकी सीनेटर का विवादित बयान, H-1B वीजा को बताया ‘कार्टेल’

    नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने H-1B वीजा नीति और भारतीयों को लेकर दिए गए बयान से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणी में उन्होंने भारतीय आईटी पेशेवरों, अमेरिकी कंपनियों और वीजा सिस्टम को जोड़ते हुए इसे “वीजा कार्टेल” तक कह दिया। इस टिप्पणी के बाद अमेरिका और भारत दोनों जगह तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    सबसे ज्यादा विवाद उनके उस बयान पर है जिसमें उन्होंने हैदराबाद के प्रसिद्ध चिल्कूर बालाजी मंदिर का जिक्र करते हुए इसे “वीजा मंदिर” और कथित “वीजा कार्टेल” से जोड़ दिया। श्मिट के अनुसार, यह सिस्टम अमेरिकी नौकरियों और वेतन पर असर डाल रहा है, हालांकि उनके इन दावों को लेकर कई विशेषज्ञ और यूजर्स ने सवाल उठाए हैं और इसे भ्रामक बताया है।

    दरअसल, चिल्कूर बालाजी मंदिर लंबे समय से उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो विदेश जाने की इच्छा रखते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन और परिक्रमा करने से मनोकामना पूरी होती है, इसी कारण इसे “वीजा टेंपल” भी कहा जाता है। भक्त यहां वीजा आवेदन से पहले 11 परिक्रमा और सफलता मिलने पर 108 परिक्रमा करते हैं।

    श्मिट ने अपने बयान में H-1B, L-1 और F-1 वीजा सिस्टम पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने अमेरिकी टेक कंपनियों पर “मेरिट के बजाय पक्षपात” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

    हालांकि, इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है और लोग इसे बिना तथ्यों के दिया गया भड़काऊ बयान बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले तथ्यों की जांच बेहद जरूरी है।

    कुल मिलाकर, यह विवाद अब सिर्फ वीजा नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता तक पहुंच गया है।

  • पाठ्यपुस्तकों में भारतीय इतिहास की अनदेखी पर बवाल: दक्षिण अफ्रीका में उठी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग

    पाठ्यपुस्तकों में भारतीय इतिहास की अनदेखी पर बवाल: दक्षिण अफ्रीका में उठी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका में स्कूली शिक्षा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, जहां भारतीय समुदाय के इतिहास और योगदान को लेकर आवाज तेज होती नजर आ रही है। एक प्रमुख हिंदू संगठन ने मांग की है कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में भारतीयों के इतिहास को अधिक प्रमुखता दी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस समुदाय के योगदान से परिचित हो सकें।

    दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा (SAHDS) के अध्यक्ष राम महाराज ने इस मुद्दे पर अधिकारियों को एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भले ही भारतीय समुदाय देश में अल्पसंख्यक है, लेकिन उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका स्पष्ट कहना है कि वर्तमान पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास को जितना स्थान दिया गया है, वह पर्याप्त नहीं है और इसे कम से कम दोगुना किया जाना चाहिए।

    राम महाराज ने अपने पत्र में 1981 में डरबन में आयोजित पहले राष्ट्रीय हिंदू सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास को उचित स्थान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही है, जिसे अब गंभीरता से लागू करने का समय आ गया है।

    संगठन का तर्क है कि पाठ्यपुस्तकों में भारतीय समुदाय की विरासत को सीमित करना केवल एक समुदाय के साथ अन्याय नहीं, बल्कि इतिहास के साथ भी अन्याय है। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के विकास, संस्कृति और सामाजिक संरचना में भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे नजरअंदाज करना सच्चाई को कमजोर करना है।

    इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सभी समुदायों को समान और उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बहुसांस्कृतिक समाज में इतिहास का संतुलित चित्रण जरूरी है, ताकि हर वर्ग को अपनी पहचान और योगदान पर गर्व महसूस हो सके।

  • मलेशिया में UPI, नए कॉन्सुलेट और निवेश… भारतीय समुदाय से क्या-क्या बोले पीएम मोदी

    मलेशिया में UPI, नए कॉन्सुलेट और निवेश… भारतीय समुदाय से क्या-क्या बोले पीएम मोदी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ आज कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का यूपीआई शीघ्र ही मलेशिया में आएगा. इसके साथ ही पीएम मोदी ने नए कॉन्सुलेट खोलने के बाद करते हुए भारत और मलेशिया के बीच संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया
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    पीएम मोदी ने कहा कि मलेशिया में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इंडियन ओरिजिन कम्युनिटी है. ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो इंडियन और मलेशियाई दिलों को जोड़ती हैं.उन्होंने कहा किआप वो जीता-जागता पुल हैं जो हमें जोड़ता है. आपने रोटी कैनाई को मालाबार परोट्टा से जोड़ा है. नारियल, मसाले… स्वाद बहुत जाने-पहचाने लगते हैं, चाहे वो कुआलालंपुर हो या कोच्चि. हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.
    उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि आपकी भाषाओं और मलय के बीच बहुत सारे कॉमन शब्द हैं. मैंने सुना है कि मलेशिया में इंडियन म्यूजिक और फिल्में पॉपुलर हैं. आप सब जानते हैं कि PM अनवर इब्राहिम बहुत अच्छा गाते हैं, लेकिन घर पर कई इंडियन यह नहीं जानते थे. उनके पिछले दौरे पर, वे बहुत खुश हुए थे. इंडिया में उनके एक पुराने हिंदी गाने के वीडियो वायरल हुए थे. यह भी बहुत अच्छी बात है कि उन्हें लेजेंडरी MGR के तमिल गाने बहुत पसंद हैं.

    भारत के लिए आपके दिलों में एक खास जगह
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मुझे पता है कि भारत के लिए आपके दिलों में एक खास जगह है. मुझे 2001 की एक घटना बहुत अच्छे से याद है जब मेरे होम स्टेट गुजरात में भूकंप आया था. आप में से कई लोग मदद के लिए एक साथ आए थे. मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूं.उन्होंने कहा कि उससे भी बहुत पहले, भारत को एक आजाद देश बनाने के लिए आपके हजारों पूर्वजों ने बड़ी कुर्बानियां दी थीं. उनमें से कई के पड़ोसी भारत में थे, लेकिन वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल होने वाले पहले लोगों में से थे. मैं इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सर्विस सेंटर और नेताजी वेलफेयर फाउंडेशन की कोशिशों को भी सलाम करता हूं.

    भारत अब इन्वेस्टमेंट और ट्रेड हब
    पीएम मोदी ने कहा कि पहले, भारत को सिर्फ एक बहुत बड़े मार्केट के तौर पर देखा जाता था. अब हम इन्वेस्टमेंट और ट्रेड का हब हैं. भारत को ग्रोथ के लिए एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर देखा जाता है. चाहे वह UK हो, UAE हो, ऑस्ट्रेलिया हो, न्यूजीलैंड हो, ओमान हो, EU हो, या USA हो. देशों के भारत के साथ ट्रेड डील हैं.

    पीएम मोदी ने कहा कि हमने अभी एक रिकॉर्ड बनाने वाला कल्चरल परफॉर्मेंस देखा है. 800 डांसर एकदम सही तालमेल में. यह परफॉर्मेंस हमारे लोगों को आने वाले कई सालों तक याद रहेगी. मैं सभी परफॉर्मर्स को बधाई देता हूं.पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल, मैं ASEAN समिट के लिए मलेशिया नहीं जा पाया था, लेकिन मैंने अपने दोस्त से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊंगा. जैसा वादा किया था, मैं यहां हूं. 2026 में यह मेरा पहला विदेश दौरा है.