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  • भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

    भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। भारतीय कंपनियों के लिए पनामा आने वाले समय में सिर्फ एक निर्यात गंतव्य नहीं बल्कि लैटिन अमेरिका कैरिबियन और अमेरिका के कई बाजारों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण बिजनेस गेटवे बन सकता है। भारत में पनामा के राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल ने मुंबई में आयोजित एक हाई लेवल कारोबारी बातचीत के दौरान भारतीय उद्योग जगत के सामने पनामा की कारोबारी संभावनाओं को रखा। उन्होंने कहा कि पनामा की भौगोलिक स्थिति और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार करने में बड़ी मदद दे सकते हैं।

    राजदूत के मुताबिक पनामा नहर के कारण देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त हासिल है। इसके अलावा मजबूत समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन जैसी सुविधाएं भारतीय कंपनियों के लिए वेयरहाउसिंग डिस्ट्रीब्यूशन मैन्युफैक्चरिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियां पनामा में अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी स्थापित करके आसपास के कई बाजारों को एक साथ कवर कर सकती हैं।

    खास तौर पर फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स ऑटोमोबाइल मोटरसाइकिल इंजीनियरिंग कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अवसरों की बड़ी संभावना बताई गई है। कंपनियां पनामा को रीजनल हेडक्वार्टर या डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के तौर पर विकसित कर सकती हैं। इससे अलग अलग देशों में कारोबार शुरू करने के दौरान आने वाली लॉजिस्टिक्स स्थानीय नियमों डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बाजार की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    मुंबई में हुई इस बातचीत में भारत और पनामा के बीच मौजूदा व्यापार को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल वस्तुओं का व्यापार करीब 600 मिलियन डॉलर का है। उन्होंने कहा कि मजबूत बी2बी संपर्क बाजार की बेहतर जानकारी और संभावनाओं वाले क्षेत्रों में केंद्रित सहयोग के जरिए अगले दो वर्षों में इस व्यापार को दोगुना कर 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि पनामा की रणनीतिक लोकेशन और अमेरिका के साथ उसकी कनेक्टिविटी भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय विस्तार के लिए प्रभावी मंच दे सकती है। वहीं मुंबई में पनामा के कॉन्सल जनरल रॉबर्टो रोड्रिग्ज प्राडा ने भी दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं गिनाईं। उनके मुताबिक पनामा के स्पेशल इकोनॉमिक रिजीम के तहत वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर असेंबली टेस्टिंग फिनिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। ऐसे में भारत और पनामा के बीच कारोबारी रिश्ते आने वाले समय में एक नए क्षेत्रीय विस्तार की नींव रख सकते हैं।

  • ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर

    ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर


    नई दिल्ली। ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 4 इंडिया-बेस्ड कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल होने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित लेनदेन की कुल कीमत करीब 119 मिलियन डॉलर है।

    यह कार्रवाई ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि इसका उद्देश्य उन आर्थिक रास्तों को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल ईरान राजस्व जुटाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।

    सदाशिव ओवरसीज पर 69 मिलियन डॉलर के आयात का आरोप
    अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, इंडिया-बेस्ड सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इनमें कुछ शिपमेंट ऐसी कंपनी से जुड़े बताए गए हैं, जिस पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है।

    इसके अलावा PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 25-25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप लगाया गया है। इन तीनों कंपनियों के कारोबार को मिलाकर कुल रकम करीब 119 मिलियन डॉलर बताई गई है।

    चौथी कंपनी पर पेट्रोकेमिकल शिपमेंट में मदद का आरोप
    अमेरिका ने पोर्टईज पार्टनर्स LLP पर भी कार्रवाई की है। आरोप है कि कंपनी ने ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेप भारत लाने में मदद की। अमेरिका ने कंपनियों के अलावा तीन भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। इनमें PP सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग, पोर्टईज पार्टनर्स से जुड़े इदरीसमिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी शामिल हैं।

    अमेरिका ने देशों को दी चेतावनी
    अमेरिका पहले ही विभिन्न देशों को चेतावनी दे चुका है कि वे ईरान को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए तय समयसीमा का पालन करें। ऐसा नहीं करने पर संबंधित कंपनियों और संस्थाओं को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस अभियान का मकसद ईरान के उन आर्थिक रास्तों को बंद करना है, जिनके जरिए वह राजस्व हासिल करता है और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है।