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  • मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी

    मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान बेहतर भविष्य और धार्मिक सेवा का सपना लेकर ओमान गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी एक दर्दनाक संघर्ष में बदल गई। मस्जिद में इमामत कराने का वादा करने वाले एजेंट ने उन्हें विदेश तो भेज दिया, लेकिन वहां उनसे धार्मिक कार्य की जगह 30 से 40 कमरों वाले सरकारी कार्यालय में टॉयलेट साफ कराने, बर्तन धुलवाने और सफाई का काम कराया गया। कई दिनों तक भूखे रहकर 14 से 15 घंटे मजदूरी करने को मजबूर फैजान आखिरकार भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से करीब ढाई महीने बाद अपने घर लौट सके।

    फैजान ने बताया कि जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात एक एजेंट से हुई थी। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि ओमान की एक मस्जिद में उन्हें इमाम के रूप में नियुक्त किया जाएगा। शुरुआत में 20 हजार रुपए लिए गए और बाद में मेडिकल व अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कुल मिलाकर करीब दो लाख रुपए वसूल लिए गए। परिवार ने बड़ी मुश्किल से यह रकम जुटाई और 4 मई 2026 को फैजान ओमान के मस्कट पहुंच गए।

    मस्कट पहुंचने के बाद उन्हें दो-तीन दिन कंपनी के पास रखा गया, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आ गई। जिस धार्मिक सेवा के लिए उन्हें भेजा गया था, उसकी जगह उन्हें एक मंत्रालय के कार्यालय में सफाई कर्मचारी बना दिया गया। रोजाना दर्जनों कमरों, टॉयलेट, बाथरूम और बर्तनों की सफाई कराई जाती थी। लंबे समय तक लगातार 14 से 15 घंटे काम लेने के बावजूद न तो उन्हें वेतन दिया गया और न ही भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई।

    फैजान के मुताबिक जब भी उन्होंने वेतन या खाने के लिए पैसे मांगे तो कंपनी हर बार टालती रही। धीरे-धीरे उनके पास मौजूद सारी रकम खत्म हो गई। कई बार लगातार चार-चार दिन तक उन्हें बिना भोजन के रहना पड़ा। ऐसे कठिन समय में कंपनी ने कोई मदद नहीं की, बल्कि वहां रहने वाले कुछ भारतीय नागरिक उनके सहारा बने। मस्कट में रहने वाले नवाब भाई ने उन्हें खाने के लिए पैसे दिए, जबकि मोहम्मद खलील अहमद ने लगभग डेढ़ महीने तक अपने घर में रखकर भोजन और रहने की व्यवस्था की।

    मदद की उम्मीद में फैजान लगातार उस एजेंट से संपर्क करते रहे जिसने उन्हें विदेश भेजा था। शुरुआत में एजेंट हर बार एक-दो दिन इंतजार करने की बात कहकर उन्हें टालता रहा, लेकिन बाद में उसने उनका नंबर ही ब्लॉक कर दिया। जब फैजान ने कंपनी से भारत लौटने की इच्छा जताई तो उनसे 650 ओमानी रियाल जमा कराने की शर्त रख दी गई। इसी दौरान कंपनी ने उनका पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।

    18 जुलाई को यह मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र को शिकायत भेजी। शिकायत मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने दस्तावेजों की प्रक्रिया शुरू कराई और लेबर कोर्ट से एग्जिट परमिट दिलवाया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जुलाई को उनकी वापसी की मंजूरी मिली। 28 जुलाई की रात फैजान मुंबई पहुंचे और 30 जुलाई को अपने गृह गांव दीवानगंज लौट आए।

    सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने अब तक विदेशों में फंसे 1500 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी में मदद की है। उनका कहना है कि यदि पीड़ित समय रहते सही दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएं तो भारतीय दूतावास अधिकांश मामलों में प्रभावी कार्रवाई करता है। फैजान की आपबीती विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने और केवल अधिकृत माध्यमों से ही विदेश जाने की अहम सीख भी देती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें


    नई दिल्ली । भारत ने ईरान में मौजूद सुरक्षा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ कहा है कि परिस्थितियों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। ऐसे में भारतीय नागरिक अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर जरूरी यात्राओं से बचें और केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही वहां जाने का निर्णय लें।

    दूतावास ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के लिए ईरान की यात्रा बेहद जरूरी है वे पूरी सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। भारतीय मिशन लगातार वहां की बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा करने से बचें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही निर्णय लें।

    दूतावास ने कहा कि सुरक्षा हालात में सुधार के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौजूदा एडवाइजरी को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

    भारतीय नागरिकों से यह भी कहा गया है कि यदि वे ईरान में रह रहे हैं तो अपने संपर्क विवरण भारतीय दूतावास के पास अवश्य दर्ज कराएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे तुरंत संपर्क किया जा सके। दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

    यह एडवाइजरी ऐसे समय जारी की गई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। हालांकि क्षेत्र में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय स्थिति बदल सकती है। इसी वजह से भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

    भारतीय दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि वह ईरान में रह रहे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में दूतावास द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।

    आपातकालीन संपर्क नंबर

    +989128109115

    +989128109109

    +989128109102

    +989932179359

  • बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र

    बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र


    नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों के बीच नए दौर की शुरुआत के संकेत देते हुए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में औपचारिक जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने बीजिंग में चीन के सहायक विदेश मंत्री और प्रोटोकॉल विभाग के महानिदेशक होंग लेई को अपने साख पत्रों (क्रेडेंशियल्स) की प्रति सौंपी।

    इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में राजनयिक परंपराओं के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा है कि दुरईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन कई संवेदनशील मुद्दों के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास में आयोजित हुआ विशेष समारोह
    गुरुवार को बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने भी हिस्सा लिया।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीक कार्रवाई और दृढ़ संकल्प को याद किया गया। साथ ही पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

    अनुभवी राजनयिक हैं विक्रम दुरईस्वामी
    विक्रम दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और उन्हें विदेश नीति व अंतरराष्ट्रीय संबंधों का लंबा अनुभव है। चीन में नियुक्ति से पहले वह ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

    बीजिंग पहुंचने पर उनका चीनी अधिकारियों और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि दुरईस्वामी की कूटनीतिक समझ आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दे सकती है।