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  • 16 करोड़ के साथ माइकल की बायोपिक मैदान में, अक्षय और रणवीर की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा

    16 करोड़ के साथ माइकल की बायोपिक मैदान में, अक्षय और रणवीर की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमाई बाजार इस समय विभिन्न शैलियों की फिल्मों के संगम का गवाह बन रहा है, जहाँ दर्शकों के पास अंतरराष्ट्रीय बायोपिक से लेकर घरेलू ब्लॉकबस्टर तक के कई विकल्प मौजूद हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह माइकल जैक्सन के जीवन पर आधारित फिल्म ‘माइकल’ ने अपने शुरुआती चार दिनों के सफर में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 16 करोड़ रुपये का शुद्ध कारोबार करने में सफलता प्राप्त की है।

    जाफर जैक्सन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने सप्ताहांत के दौरान अपनी पकड़ मजबूत की और रविवार को अकेले 5.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। हालांकि इस फिल्म को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग रही है, लेकिन संगीत प्रेमी बड़े पर्दे पर इस दिग्गज कलाकार की कहानी देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं।

    दूसरी तरफ, अभिनेता अक्षय कुमार की हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी धाक जमानी शुरू कर दी है। फिल्म ने अपने रिलीज के दसवें दिन 12.50 करोड़ रुपये का शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया है कि दर्शकों को डराने और हंसाने का यह फॉर्मूला आज भी उतना ही कारगर है। इस प्रदर्शन के साथ ही फिल्म की कुल घरेलू कमाई अब 113.40 करोड़ रुपये हो गई है।

    वैश्विक स्तर पर भी फिल्म ने अपनी चमक बिखेरी है और करीब 179 करोड़ रुपये का कुल ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। ‘भूत बंगला’ की इस सफलता ने इसे साल की सबसे भरोसेमंद फिल्मों की कतार में खड़ा कर दिया है।

    वहीं, बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर ‘धुरंधर 2’ (द रिवेंज) एक ऐतिहासिक सफर पर है। करीब 40 दिनों से सिनेमाघरों में अपना जलवा बिखेर रही यह फिल्म अब 1,130.59 करोड़ रुपये का भारतीय नेट कलेक्शन कर चुकी है। वैश्विक मंच पर इस फिल्म की सफलता और भी बड़ी है, जहाँ इसने 1,777.52 करोड़ रुपये का विशालकाय ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया है।

    फिल्म ने अपने 39वें दिन भी 3.40 करोड़ रुपये का व्यवसाय कर यह दिखा दिया है कि इसकी लोकप्रियता अभी कम नहीं हुई है।

    व्यापारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह भारतीय सिनेमा के लिए एक सुखद संकेत है कि एक ही समय में तीन अलग-अलग मिजाज की फिल्में शानदार कमाई कर रही हैं। जहाँ ‘माइकल’ एक वैश्विक हस्ती के संघर्ष की कहानी है, वहीं ‘भूत बंगला’ विशुद्ध मनोरंजन का साधन बनी हुई है और ‘धुरंधर 2’ भारतीय स्पाई यूनिवर्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान कर रही है।

    आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई फिल्मों के आने के बाद इन मौजूदा फिल्मों की रफ्तार पर क्या प्रभाव पड़ता है, लेकिन फिलहाल बॉक्स ऑफिस की यह हलचल फिल्म उद्योग के लिए उत्साहजनक परिणाम लेकर आई है।

  • सेट पर गालियां और आंखों में आंसू: जब आर्थिक तंगी के कारण नीना गुप्ता ने झेला अपमान का घूँट

    सेट पर गालियां और आंखों में आंसू: जब आर्थिक तंगी के कारण नीना गुप्ता ने झेला अपमान का घूँट


    नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत में आज नीना गुप्ता एक ऐसा नाम हैं, जिनकी अदाकारी और बेबाकी का लोहा हर कोई मानता है। लेकिन “बधाई हो” जैसी फिल्मों से मिली इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे संघर्ष की एक ऐसी काली परत छिपी है, जिसे याद कर आज भी उनकी आँखें नम हो जाती हैं। हाल ही में नीना गुप्ता ने अपने शुरुआती दिनों के उन जख्मों को कुरेदा है, जो यह बताते हैं कि ग्लैमर की इस दुनिया के पीछे का सच कितना कड़वा और दमघोंटू हो सकता है।

    नीना गुप्ता ने उस दौर को याद किया जब वह फिल्म इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें एक निर्देशक की ऐसी बदसलूकी का सामना करना पड़ा, जिसकी कल्पना भी आज के दौर में करना मुश्किल है। सेट पर सबके सामने, बिना किसी ठोस वजह के, एक निर्देशक ने उन्हें न केवल अपमानित किया बल्कि भद्दी गालियां भी दीं। नीना बताती हैं कि उस वक्त उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे, मन विद्रोह करना चाहता था, लेकिन हाथ आर्थिक तंगी की बेड़ियों में जकड़े हुए थे। वह कहती हैं, “मेरे पास उस समय चुपचाप सब कुछ सहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था क्योंकि मुझे काम की सख्त जरूरत थी और घर चलाने के लिए पैसे चाहिए थे।”

    यह केवल अपमान की बात नहीं थी, बल्कि अपनी कला के साथ समझौता करने की भी मजबूरी थी। नीना गुप्ता ने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने कई ऐसी फिल्में कीं, जिन्हें करने का उनका बिल्कुल मन नहीं था। कई बार तो हालात ऐसे थे कि उन्हें एक ‘गैंग’ के साधारण सदस्य जैसे महत्वहीन रोल निभाने पड़े। वह बताती हैं कि कई बार वह फिल्म साइन तो कर लेती थीं, लेकिन घर जाकर भगवान से यह दुआ मांगती थीं कि “हे भगवान, बस यह फिल्म कभी रिलीज न हो।” यह एक कलाकार की सबसे बड़ी विडंबना थी, जहाँ उसे अपने ही काम के छिपने की प्रार्थना करनी पड़ती थी।

    उस समय की इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए नीना ने स्पष्ट किया कि तब विरोध करने का मतलब था करियर का अंत। अगर कोई अभिनेत्री सेट पर हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाती थी, तो उसे “मुश्किल” कलाकार करार देकर काम देना बंद कर दिया जाता था। जिम्मेदारियों और जरूरतों के बोझ तले दबी नीना ने उस समय खुद को संभाला और अपमान का कड़वा घूँट पीकर भी अपना काम पूरा किया।

    लेकिन जैसा कि कहा जाता है, समय का पहिया हमेशा एक सा नहीं रहता। नीना गुप्ता की कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने साठ की उम्र के करीब पहुँचकर इंस्टाग्राम पर अपनी एक फोटो डाली और खुलेआम काम मांगा। उनकी उस ईमानदारी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और फिर “बधाई हो” ने उनकी किस्मत बदल दी। आज नीना गुप्ता न केवल एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि उन तमाम कलाकारों के लिए प्रेरणा हैं जो संघर्ष के दौर से गुजर रहे हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि सफलता की चमक पाने के लिए कभी-कभी अपमान के अंधेरे रास्तों से भी गुजरना पड़ता है, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों, तो देर से ही सही, सम्मान का सूरज जरूर उगता है।