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  • भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? 1950 का अधूरा सपना आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा

    भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? 1950 का अधूरा सपना आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा


    नई दिल्ली । जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, भारत में फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। करोड़ों भारतीय रातभर जागकर मैच देखते हैं, अपनी पसंदीदा टीमों का समर्थन करते हैं और सोशल मीडिया पर फुटबॉल की चर्चा में डूब जाते हैं। लेकिन हर बार एक सवाल दिलों को कचोटता है आखिर भारत खुद फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा?  दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल भारत आज भी फुटबॉल के सबसे बड़े मंच से दूर है। वर्तमान में भारत फीफा रैंकिंग में काफी पीछे है और एशियाई फुटबॉल में भी उसकी स्थिति मजबूत नहीं मानी जाती। हालात ऐसे हैं कि टीम अगले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जिसने भारतीय फुटबॉल की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया।

    1950: जब भारत वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब थ
    बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत एक बार फीफा वर्ल्ड कप में खेलने के बेहद करीब पहुंच चुका था। 1950 में ब्राजील में आयोजित विश्व कप के लिए भारत को बिना क्वालिफाइंग मैच खेले ही जगह मिल गई थी। एशियाई ग्रुप की अन्य टीमें हट गई थीं, जिसके कारण भारत को सीधी एंट्री मिली। भारत को मजबूत टीमों के साथ ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। वर्षों तक यह माना जाता रहा कि खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं मिलने के कारण भारत ने नाम वापस लिया था। हालांकि वास्तविक कारण आर्थिक कठिनाइयां, यात्रा खर्च और उस समय फुटबॉल प्रशासन की प्राथमिकताएं थीं। उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक को विश्व कप से अधिक महत्व दिया जाता था।

    स्वर्णिम दौर के बाद क्यों आई गिरावट
    भारतीय फुटबॉल का इतिहास गौरवशाली भी रहा है। 1962 के एशियाई खेलों में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उस दौर में भारतीय टीम एशिया की ताकतवर टीमों में गिनी जाती थी। बाद में 1970 एशियाई खेलों में भी भारत ने कांस्य पदक हासिल किया। लेकिन इसके बाद भारतीय फुटबॉल धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने फुटबॉल ढांचे को लगातार मजबूत किया और विश्व फुटबॉल में पहचान बनाई।

    क्या सिर्फ क्रिकेट जिम्मेदार है?
    अक्सर कहा जाता है कि भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता फुटबॉल के विकास में बाधा बनी। इसमें कुछ सच्चाई जरूर है, क्योंकि अधिकांश निवेश, मीडिया कवरेज और प्रायोजक क्रिकेट की ओर केंद्रित रहते हैं। लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कई खेल लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संरचना विकसित की। भारत की सबसे बड़ी समस्या जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था का अभाव, कोचों की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और प्रशासनिक अस्थिरता रही है।

    उम्मीद अभी बाकी है
    2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। इससे एशियाई देशों के लिए क्वालिफिकेशन के अवसर बढ़े हैं। हालांकि सिर्फ अतिरिक्त स्लॉट मिलने से भारत विश्व कप नहीं पहुंच जाएगा।

    भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, आधुनिक अकादमियों का विस्तार करना होगा, हजारों प्रशिक्षित कोच तैयार करने होंगे और लंबी अवधि की स्पष्ट योजना पर काम करना होगा। यदि सही दिशा में लगातार निवेश और प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व कप के सपने को साकार कर सकता है।

  • कोलकाता में लियोनेल मेसी का दौरा 22 मिनट में खत्म, प्रशंसक हुए मायूस, जानिए क्या है वजह?

    कोलकाता में लियोनेल मेसी का दौरा 22 मिनट में खत्म, प्रशंसक हुए मायूस, जानिए क्या है वजह?


    नई दिल्‍ली । दिग्गज फुटबॉलर(Legendary footballer) लियोनेल मेसी(Lionel Messi) का कोलकाता दौरा, जिसके लिए फैन्स लंबे समय से इंतजार कर रहे थे वह महज 22 मिनट में ही खत्म हो गया और शनिवार को साल्ट लेक स्टेडियम के भीतर अफरा-तफरी का माहौल हो गया. अपने GOAT टूर के तहत शहर की दूसरी यात्रा पर आए मेसी से यह उम्मीद की जा रही थी कि यह भारत (India)में फुटबॉल के लिए एक यादगार दिन होगा. लेकिन हुआ इसका बिलकुल उल्टा.

    फीफा वर्ल्ड कप विजेता मेसी के आगमन को लेकर प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह था. शनिवार तड़के ही बड़ी संख्या में फैंस उन्हें देखने के लिए स्टेडियम पहुंच गए थे. लेकिन दोपहर होते-होते पूरा आयोजन बिखर गया. अब आइए जानते हैं कि आखिर ये अव्यवस्था हुई कैसे

    50 हजार से ज्यादा फैन्स पहुंचे
    करीब 50,000 दर्शक साल्ट लेक स्टेडियम में उमड़ पड़े थे, जिनमें से कई ने 4,000 रुपये से ज्यादा कीमत के टिकट खरीदे थे. वे बेबस होकर यह दृश्य देखते रह गए कि फुटबॉल के इस महान खिलाड़ी को राजनेताओं, वीवीआईपी लोगों, भारी सुरक्षा व्यवस्था और सेल्फी लेने में ज्यादा दिलचस्पी रखने वाले लोगों की भीड़ ने चारों ओर से घेर लिया.

    स्टेडियम के गेट सुबह 8 बजे खोल दिए गए थे और मेसी 11:30 बजे अपने इंटर मियामी टीम के साथी लुईस सुआरेज़ और रोड्रिगो डी पॉल के साथ मैदान में उतरे. जैसे ही उन्होंने प्रवेश किया, हजारों प्रशंसकों की गगनभेदी तालियों से उनका स्वागत हुआ.

    वीआईपी लोगों ने ही घेर लिया
    सूत्रों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में मेसी खुद को राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, वीआईपी और उनके काफिलों से घिरा हुआ पाया, जिससे एक मानवीय घेरा बन गया. दर्शकों को उस खिलाड़ी की झलक तक नहीं मिल पा रही थी, जिसे देखने वे आए थे.

    हैरान और हल्की मुस्कान के साथ मेसी ने मैदान का एक धीमा चक्कर लगाने की कोशिश की और कुछ पूर्व खिलाड़ियों को ऑटोग्राफ भी दिए, लेकिन अव्यवस्था और बढ़ती चली गई.

    पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने बार-बार भीड़ से पीछे हटने की अपील की. तनाव भरी आवाज़ में उन्होंने कहा, “कृपया उन्हें अकेला छोड़ दें. कृपया मैदान खाली करें.”

    हालांकि, उनकी अपीलों को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया गया. आखिरकार, उनके एक घंटे के तय कार्यक्रम से काफी पहले ही सुरक्षा कारणों से उन्हें स्टेडियम से बाहर ले जाया गया और आयोजन रद्द करने का फैसला लिया गया. इसके बाद हालात और बिगड़ गए. स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई, सजावट और संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पूरा परिसर अस्त-व्यस्त हो गया.

    गांगुली चाहते थे मेसी और रुकें
    एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में शामिल सौरव गांगुली ने मेसी को ज्यादा देर रुकने के लिए मनाने की कोशिश की. आयोजन रद्द होने के बाद आयोजक, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास और राज्य पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार को मेसी की टीम से बातचीत करते और उन्हें कार्यक्रम जारी रखने के लिए मनाने की कोशिश करते देखा गया.

    इसी दौरान गांगुली को यह कहते हुए सुना गया, “अगर आप थोड़ी देर और रुकें तो अच्छा होगा.”

    अब मेसी शनिवार को ही हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ एक संक्षिप्त फुटबॉल सत्र (किकअबाउट) में हिस्सा लेंगे.