Tag: Indian government

  • अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू

    अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू


    नई दिल्ली।
    अफ्रीका (Africa) के कुछ हिस्सों में इबोला (Ebola) के प्रकोप के मद्देनजर भारत सरकार (Government of India) अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। खबर है कि विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों से विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए कहा है। इनमें उड़ान के दौरान उद्घोषणाएं करना और प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा प्रपत्र या सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाना शामिल है।


    भारत में क्या है स्थिति

    सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में अब तक इबोला वायरस (Ebola Virus) के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा (JP Nadda) ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी के उपायों की समीक्षा की। नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी प्रवेश बिंदुओं पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया।

    WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है जिसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं।


    यहां के यात्रियों को भरने होंगे फॉर्म

    नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इबोला रोग के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर SOP जारी की है। युगांडा और कांगो के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले स्व-घोषणा प्रपत्रों को अनिवार्य रूप से भरवाना और एकत्र करना होगा।


    सूची में ये एयरलाइन्स

    एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की सूची में हैं। युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं।


    ये लक्षण दिखने पर तुरंत करना होगा सूचित

    एयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह उद्घोषणा करना भी अनिवार्य किया गया है कि इबोला रोग के वर्तमान खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और आव्रजन/चिकित्सा इकाई को सूचित करना चाहिए।

    विमान में संदिग्ध मामलों के लिए, डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए। एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास तीन तह वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो।


    शुरू हुई जांच

    गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने सोमवार को कहा कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप के मद्देनजर अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। पानसेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी कर रहा है। अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम छह बजे से सुबह 10 बजे के बीच युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की गहन जांच की जा रही है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार

    पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में इस समय कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही पेट्रोलियम के शोधित उत्पादों का भी करीब 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। इस तरह कुल मिलाकर देश के पास सात सप्ताह से अधिक की आवश्यकता पूरी करने लायक भंडार है।

    अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार करीब 25 करोड़ बैरल, यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात लगातार जारी है। इसलिए मीडिया में चल रही यह खबर कि देश के पास केवल 25 दिन का कच्चा तेल ही बचा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    गौरतलब है कि भारत वर्तमान में छह महाद्वीपों के लगभग 40 देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में देश की निर्भरता पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है। देश की रिफायनिंग कंपनियों की कुल शोधन क्षमता 25.8 करोड़ टन प्रतिवर्ष है, जो घरेलू मांग से काफी अधिक है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की वार्षिक मांग लगभग 21 से 23 करोड़ टन के बीच रहती है।

    इसके अलावा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण अनिवार्य किए जाने से हर साल लगभग 4.4 करोड़ बैरल, यानी करीब 60 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान पर हुए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इसके चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • ईरान में होने वाला कुछ बड़ा…. भारत सरकार ने लोगों को दी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह

    ईरान में होने वाला कुछ बड़ा…. भारत सरकार ने लोगों को दी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह


    नई दिल्ली।
    तेहरान (Tehran) में बढ़ते सत्ता विरोधी प्रदर्शनों और हालिया वैश्विक घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार (Government of India) ने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा (Iran Non-essential travel) से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया कि भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक इस्लामिक रिपब्लिक ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोग पूरी सावधानी बरतें। किसी भी विरोध-प्रदर्शन या धरना स्थलों से दूर रहें और समाचार के साथ-साथ तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क बनाकर रखें। ईरान में रेजिडेंज वीजा पर रह रहे भारतीय नागरिको को, यदि उन्होंने पहले से ऐसा नहीं किया है तो भारतीय दूतावास में अपना पंजीकरण कराने की सलाह दी जाती है।”

    गौरतलब है कि ईरान में पिछले कुछ समय से खामनेई और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत पहले महंगाई और उससे जुड़े मुद्दों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इनका रुख मानवाधिकार की तरफ बढ़ गया।

    मामला उस वक्त और बिगड़ गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामनेई को धमकी देते हुए कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो अमेरिका उनकी रक्षा के लिए वहां आएगा। इसका जवाब देते हुए खामनेई ने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करता है तो फिर तबाही आएगी। दूसरी तरफ इजरायल ने भी ईरान में जारी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया है। हालांकि ईरान सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि इन प्रदर्शनों से सख्ती के साथ निपटा जाएगा।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील


    अयोध्या । बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का मामला गरमा गया है। इस घटना को लेकर अयोध्या के संत समाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीताराम योग सदन मंदिर के महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को अमानवीय बताया और कहा कि बांग्लादेश के जिहादी लोग हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपना निशाना बना रहे हैं और ये पूरे हिंदू धर्म पर हमला है।

    उन्होंने कहा कि पहले दीपू चंद्र दास को मारा और आग लगा दीफिर एक और हिंदू शख्स को मारा और एक छोटी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। वहां की सरकार जिहादियों की तरह काम करती है और बांग्लादेश को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती है। उन्होंने आगे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इसका असर भारत पर देखने को भी मिलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को बांग्लादेश के बॉर्डर खोल देने चाहिए और वहां फंसे हिंदुओं को बचाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया थावैसे ही बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन चलाना चाहिए।

    अयोध्याधाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास जी महाराज ने भी अपील की है कि केंद्र सरकार सेना और सशस्त्र बल का सहारा लेकर हिंदुओं को बचाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इंसानियत नहीं बची है और मैं पीएम से निवेदन करता हूं कि राफेलतेजस और ब्रह्मोस क्या कर रहे हैं? अभी तक भारत में बांग्लादेश को मिला लेना चाहिए था और कड़ा सबक सिखाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना के सात दिन बाद एक अन्य हिंदू युवक को भी भीड़ ने मार डाला। 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट को गांव की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया।

  • रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा

    रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसमें भारत सरकार ने बताया कि 202 भारतीय नागरिकों को फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध के दौरान रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में यह आंकड़ा प्रस्तुत किया।विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस समय तक कुल 202 भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया और उन्हें भर्ती किया गया। हालांकि भारतीय सरकार ने अपनी कूटनीतिक कार्रवाई के तहत 119 नागरिकों को समय से पहले छुट्टी दिलवाने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी।

    वहीं इस बयान में मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक इस युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। साथ ही सात भारतीय नागरिकों को रूस की सीमा क्षेत्र में लापता बताया गया है। इसके अलावा 50 भारतीय नागरिकों को रूस की सेना से रिहा कराने की कोशिशें जारी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि 10 मृतकों के शवों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि भारतीय सरकार लगातार रूस के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के स्तर पर इस मामले को लेकर बातचीत जारी है।

    वहीं मंत्रालय ने यह भी बताया कि जिन 18 भारतीयों की मौत या लापता होने की खबरें आई हैं उनके डीएनए नमूने रूस के अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं ताकि शवों की पहचान की जा सके और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।यह खुलासा उस समय हुआ है जब रूस ने 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद से 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया था। रूस ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए दुनिया भर से सैनिकों की भर्ती शुरू की जिसमें भारतीय नागरिकों का भी शामिल होना बड़ा मुद्दा बना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक अनुमानित 10 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

    रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जा रहे हैं। इस युद्ध ने पूरी दुनिया में भारी संकट पैदा कर दिया है और रूस ने लगभग चार वर्षों में यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है।भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक पहल जारी रखते हुए इस संघर्ष में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। इसके अलावा सरकार ने नागरिकों को इस युद्ध के बारे में सतर्क रहने और ऐसे संघर्षों में न फंसे रहने की सलाह दी है। भारत सरकार की कोशिशें यह सुनिश्चित करने की हैं कि इस युद्ध में कोई भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से जोखिम में न पड़े और उनके परिवारों को पूरी जानकारी और सहायता समय पर मिल सके।