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  • हॉकी के रोमांच के लिए तैयार पंजाब, जापान की 18 सदस्यीय टीम भारत पहुंची, जालंधर से मोहाली तक दिखेगा एशियाई टीमों का दम

    हॉकी के रोमांच के लिए तैयार पंजाब, जापान की 18 सदस्यीय टीम भारत पहुंची, जालंधर से मोहाली तक दिखेगा एशियाई टीमों का दम


    नई दिल्ली। पंजाब में पहली बार आयोजित होने जा रही एशियन चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए जापान की 18 सदस्यीय पुरुष हॉकी टीम मोहाली स्थित शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंच गई। यहां खिलाड़ियों का पारंपरिक पंजाबी अंदाज में शानदार स्वागत किया गया। खेल विभाग के अधिकारियों ने भांगड़ा और पारंपरिक मालाओं के साथ जापानी खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। पंजाब की मेहमाननवाजी से खिलाड़ी काफी खुश नजर आए और उन्होंने मेजबानों का आभार जताते हुए टूर्नामेंट में खेलने को लेकर उत्साह जाहिर किया।

    एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जालंधर और मोहाली में किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में एशिया की छह टीमें हिस्सा लेंगी। जापान और मेजबान भारत के अलावा दक्षिण कोरिया चीन मलेशिया और बांग्लादेश की टीमें भी मैदान पर उतरेंगी। इन टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से हॉकी प्रशंसकों को रोमांचक खेल देखने का मौका मिलेगा। प्रतियोगिता में हर टीम की कोशिश बेहतर प्रदर्शन करते हुए खिताब की दौड़ में आगे बढ़ने की होगी।

    जापान की टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संयोजन देखने को मिलेगा। टीम की कप्तानी फुजीशिमा रायकी करेंगे जबकि गोलकीपर की जिम्मेदारी कुरोदा किशो और कितागावा ताकुमी संभालेंगे। टीम में यामाडा शोटा तनाका सेरेन वतनबे जुन मात्सुमोतो काजुमासा नागाई युमा यामाशिता मनाबू नागायोशी केन सैतो हिरो काशिवागी रेन तनाका त्सुबासा ऊका रयोमा कवामुरा युसुके यामानाका मोटोया ओचियाई हारुकी और फुकुदा केंटारो भी शामिल हैं। जापानी खिलाड़ी पंजाब पहुंचने के बाद टूर्नामेंट के लिए अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाएंगे।

    इस बार प्रतियोगिता की मेजबानी पंजाब के लिए खास महत्व रखती है क्योंकि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पहली बार राज्य में आयोजित हो रही है। पंजाब को हॉकी की समृद्ध परंपरा और कई बड़े खिलाड़ियों के योगदान के लिए जाना जाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस टूर्नामेंट की मेजबानी से राज्य को खेल आयोजन के क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टूर्नामेंट को राज्य में आयोजित कराने के लिए प्रयास किए हैं।

    पंजाब सरकार ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली सभी टीमों को बेहतर सुविधाएं सुरक्षा और मेहमाननवाजी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। खिलाड़ियों के ठहरने अभ्यास सत्र और एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है ताकि खिलाड़ियों को प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिल सके।

    टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला 27 अक्टूबर को जालंधर के ओलंपियन सुरजीत हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके बाद प्रतियोगिता के विभिन्न मुकाबले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होंगे। फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम में होगा। जापान की टीम के पहुंचने के साथ ही प्रतियोगिता को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। अब हॉकी प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन सी टीम अपने प्रदर्शन के दम पर खिताब हासिल करती है और मेजबान भारत घरेलू मैदान पर कैसा खेल दिखाता है।

  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ यादगार बन गया। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 21 गोल्ड समेत 85 मेडल अपने नाम किए। खेलों के इस बड़े मंच पर भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐसे मुकाम हासिल किए जो इससे पहले देश के नाम नहीं थे। महिला हॉकी में लंबे इंतजार के बाद गोल्ड मेडल मिला तो वहीं मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और सॉफ्ट टेनिस जैसे खेलों में भी भारत ने पहली बार पदक जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन रहा। सलीमा टेटे की कप्तानी में टीम ने शानदार खेल दिखाया और फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने महिला हॉकी में 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। भारतीय टीम ने इससे पहले 1982 में एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड जीता था। इसके बाद लंबे समय तक देश को इस सफलता का इंतजार करना पड़ा। 2026 में मिली यह जीत भारतीय हॉकी के लिए बेहद खास बन गई।

    मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारत ने इतिहास रचा। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एशियन गेम्स में भारत को इस खेल का पहला पदक दिलाया। सुचिका ने प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि सेमीफाइनल में हार के कारण वह फाइनल तक नहीं पहुंच सकीं लेकिन उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया।

    सॉफ्ट टेनिस में भी भारत ने पहली बार पदक जीता। इस खेल को एशियन गेम्स में शामिल किए जाने के बाद भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने पुरुष वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसी तरह रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल दिलाया।

    स्क्वैश में अनाहत सिंह ने इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स के स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। भले ही वह गोल्ड मेडल जीतने से चूक गईं लेकिन सिल्वर मेडल के साथ उन्होंने नया इतिहास बनाया। पोल वॉल्ट में बरनिका इलांगोवन ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को इस स्पर्धा में एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाया।

    वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू का इंतजार भी खत्म हुआ। उन्होंने एशियन गेम्स के इतिहास में अपना पहला मेडल जीता और सिल्वर अपने नाम किया। वहीं सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर 1982 के बाद भारत को इस स्पर्धा में पहला पदक दिलाया। इन उपलब्धियों ने साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी अब पारंपरिक खेलों के साथ नए खेलों में भी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

  • हॉकी में भारत का जलवा बरकरार: पाकिस्तान को 4-3 से हराकर फिर लहराया तिरंगा

    हॉकी में भारत का जलवा बरकरार: पाकिस्तान को 4-3 से हराकर फिर लहराया तिरंगा


    नई दिल्ली ।एफआईएच प्रो लीग 2025-26 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया मुकाबला एक बार फिर हॉकी प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। लंदन के ली वैली हॉकी एंड टेनिस सेंटर में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 4-3 से शिकस्त दी। कप्तान Harmanpreet Singh की अगुवाई में टीम इंडिया ने न केवल जीत दर्ज की बल्कि पिछले एक दशक से जारी अपने दबदबे को भी बरकरार रखा।

    ओलंपिक चैंपियन Netherlands पर जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम मैदान में उतरी थी। हालांकि मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पहले क्वार्टर के आठवें मिनट में पाकिस्तान के नदीम अहमद ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और लगातार पाकिस्तानी गोलपोस्ट पर दबाव बनाए रखा।

    दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। 22वें मिनट में अभिषेक ने रिबाउंड पर गोल दागकर भारत को बराबरी दिलाई। इसके केवल दो मिनट बाद नीलकांत शर्मा ने शानदार फील्ड गोल करते हुए भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी। हाफटाइम तक भारतीय टीम पूरी तरह लय में दिखाई दी और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाती रही।

    तीसरे क्वार्टर में भी भारत का आक्रमण जारी रहा। 40वें मिनट में सुखजीत सिंह ने बेहतरीन कौशल का प्रदर्शन करते हुए शानदार गोल दागा। उन्होंने गेंद को हवा में उछालकर ऐसा शॉट लगाया जिसे रोक पाना पाकिस्तानी गोलकीपर के लिए संभव नहीं था। इस गोल ने भारत की बढ़त 3-1 कर दी और मैच पर उसकी पकड़ मजबूत हो गई।

    चौथे क्वार्टर में मुकाबला और रोमांचक हो गया। 52वें मिनट में राजिंदर सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार गोल करते हुए भारत को 4-1 की मजबूत बढ़त दिलाई। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के सटीक पास का राजिंदर ने शानदार तरीके से फायदा उठाया। हालांकि पाकिस्तान ने हार नहीं मानी और अबू महमूद तथा मोइन शकील के गोलों की बदौलत स्कोर 4-3 तक पहुंचा दिया। अंतिम मिनटों में पाकिस्तान ने बराबरी की भरपूर कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस ने मजबूती दिखाते हुए जीत सुनिश्चित कर ली।

    इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हाल के वर्षों में भारत हॉकी में पाकिस्तान पर लगातार हावी रहा है। दोनों देशों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों में पाकिस्तान ने कुल 82 और भारत ने 68 जीत दर्ज की हैं लेकिन पिछले दस वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इस दौरान भारत पाकिस्तान के खिलाफ 18 मुकाबलों में अपराजित रहा है जिसमें 16 जीत और दो ड्रॉ शामिल हैं।

    इस जीत के साथ भारतीय टीम ने एफआईएच प्रो लीग अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत की है। 13 मुकाबलों में तीन जीत के साथ भारत सातवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं पाकिस्तान की टीम लगातार 13 हार के साथ तालिका में सबसे नीचे बनी हुई है। अब भारतीय टीम की नजर अगले मुकाबलों पर होगी जहां उसे पाकिस्तान के खिलाफ एक और मैच तथा इंग्लैंड के खिलाफ दो महत्वपूर्ण मुकाबले खेलने हैं।

    यह जीत केवल अंक तालिका के लिहाज से ही नहीं बल्कि मनोबल के स्तर पर भी भारतीय टीम के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। हरमनप्रीत ब्रिगेड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में दबाव को कैसे अवसर में बदला जाता है।