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  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान


    नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही।

    डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मर

    शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारी

    बाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।
    निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला।

    वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असर

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे।

    अमेरिकी बाजारों में कमजोरी

    इसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले।

    कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।

  • इंडिगो शेयर को झटका, ग्लोबल फर्म ने डाउनग्रेड कर बदला नजरिया..

    इंडिगो शेयर को झटका, ग्लोबल फर्म ने डाउनग्रेड कर बदला नजरिया..

    नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो को लेकर वित्तीय बाजार में एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जहां एक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी की रेटिंग और अनुमानित लक्ष्य मूल्य दोनों में कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है और शेयर पर दबाव साफ नजर आने लगा है।

    ब्रोकरेज फर्म ने पहले जहां कंपनी को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ रखा था, वहीं अब उसे न्यूट्रल श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके साथ ही टारगेट प्राइस को भी पहले के मुकाबले नीचे संशोधित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में शेयर में तेज उछाल की उम्मीदें कम हो सकती हैं।

    इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और विमानन उद्योग पर पड़ रहा लागत का दबाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों के परिचालन खर्च को काफी बढ़ा दिया है, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है।

    हालांकि इंडिगो को अपने बड़े नेटवर्क और मजबूत ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से उद्योग में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति वाली कंपनियों में गिना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसके भविष्य के अनुमान को प्रभावित किया है। बढ़ती लागत और अस्थिर वैश्विक माहौल ने कंपनी की ग्रोथ संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

    घरेलू स्तर पर सरकार की ओर से ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत पूरी तरह पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति अब भी एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई है।

    शेयर बाजार में भी इंडिगो के स्टॉक ने पिछले कुछ समय में उतार-चढ़ाव का सामना किया है। कभी हल्की बढ़त तो कभी गिरावट के चलते निवेशकों के लिए यह स्टॉक अस्थिर बना हुआ है। लंबी अवधि के प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल है।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।