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  • कांग्रेस का केंद्र पर निशाना: राजीव गांधी को याद करते हुए उठाए महंगाई के मुद्दे

    कांग्रेस का केंद्र पर निशाना: राजीव गांधी को याद करते हुए उठाए महंगाई के मुद्दे


    मध्यप्रदेश । देश के पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मध्य प्रदेश के Ujjain में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन पिपली नाका स्थित राजीव गांधी की प्रतिमा पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और पुष्पांजलि अर्पित की गई।

    नेताओं की मौजूदगी, प्रतिमा पर पुष्पांजलि
    इस मौके पर विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष Mahesh Parmar, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी और वरिष्ठ नेता मनोहर बैरागी सहित कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

     IT और पंचायत व्यवस्था पर योगदान का जिक्र
    कार्यक्रम में वक्ताओं ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति की मजबूत नींव रखी। साथ ही पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। नेताओं ने कहा कि राजीव गांधी की सोच आधुनिक भारत की दिशा तय करने वाली रही, खासकर युवाओं और तकनीक के क्षेत्र में।

     महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर हमला
    श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार को महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।

     कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी
    इस कार्यक्रम में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस पार्षद, ब्लॉक अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में राजीव गांधी के योगदान को याद किया और उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया।

    राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संदेशों का मंच भी बन गया, जहां कांग्रेस ने महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा।

  • खरगे के बयान से गरमाई सियासत, पीएम मोदी पर टिप्पणी के बाद दी सफाई, बीजेपी ने घेरा

    खरगे के बयान से गरमाई सियासत, पीएम मोदी पर टिप्पणी के बाद दी सफाई, बीजेपी ने घेरा


    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने मंगलवार को राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने AIADMK और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। इस बयान के सामने आते ही बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया।

    खरगे ने अपने बयान में कहा कि AIADMK, जो अन्नादुरई की विचारधारा का दावा करती है, वह मोदी के साथ कैसे जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती और इस तरह का गठबंधन लोकतंत्र को कमजोर करता है। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तारीफ करते हुए उन्हें बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होने वाला नेता बताया।

    बयान पर सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके मुताबिक, उन्होंने पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ नहीं कहा, बल्कि यह कहना चाहा कि वे राजनीतिक दलों और लोगों को डराने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ED, IT और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

    बीजेपी का पलटवार
    बीजेपी ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री का अपमान करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक पीएम मोदी के खिलाफ कई बार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा चुका है और इसके लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।
  • आप में गहराया विवाद, राघव चड्ढा के बयान से बढ़ा पार्टी में टकराव, अपने ही नेताओं ने उठाए सवाल

    आप में गहराया विवाद, राघव चड्ढा के बयान से बढ़ा पार्टी में टकराव, अपने ही नेताओं ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक टकराव का रूप ले चुके हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो संदेश पार्टी में चर्चा का केंद्र बन गया। राघव ने खुद को जनता की आवाज बताते हुए पार्टी की नीतियों और निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाए। जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके राजनीतिक रुख और भूमिका पर सवाल खड़े किए। इस विवाद ने विरोधी दलों को भी सक्रिय कर दिया है।

    भाजपा का तीखा हमला
    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है और नेतृत्व केवल बाहर से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। राघव चड्ढा का वीडियो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के अंदर संवाद और लोकतंत्र खत्म हो चुके हैं।

    सचदेवा ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है, जो पार्टी की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बन गई है, जहां स्वतंत्र राय रखने वाले नेताओं को किनारे कर दिया जाता है या दबाया जाता है।

    राघव पर आप नेताओं ने उठाए सवाल
    पार्टी ने चड्ढा के बयान पर पलटवार करते हुए इसे सामान्य संगठनात्मक निर्णय बताया। आरोप लगाया गया कि चड्ढा लंबे समय से पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे और जनहित के मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी सरकार को चुनौती देने से बच रहे हैं।

    भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसी भी पार्टी में नेतृत्व और पदों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई सदस्य पार्टी के सामूहिक निर्णयों का समर्थन नहीं करता या व्हिप के खिलाफ जाता है, तो कार्रवाई स्वाभाविक है।

    राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा पार्टी की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव, पंजाब के अधिकारों और गुजरात में कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधी। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी निशाना साधते हुए कहा कि राघव न तो प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछ रहे हैं और न ही बड़े राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में सक्रिय हैं।

    पार्टी के भीतर फूट और विपक्षी दलों की सक्रियता
    इस विवाद ने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और भाजपा सहित अन्य विपक्षी दल इसे पार्टी में लोकतंत्र की कमी और नेतृत्व की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के लिए यह समय अपने भीतर उठ रहे असंतोष को संभालने और रणनीति तय करने का चुनौतीपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • लंबा कार्यकाल और निर्णायक नेतृत्व: पीएम मोदी पर महंत भक्ति चरण दास महाराज की प्रशंसा

    लंबा कार्यकाल और निर्णायक नेतृत्व: पीएम मोदी पर महंत भक्ति चरण दास महाराज की प्रशंसा


    नई दिल्ली:भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश में चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बनकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के 8931 दिन पूरे कर लिए हैं, जिससे उन्होंने पूर्व रिकॉर्डधारक Pawan Kumar Chamling का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।

    इस उपलब्धि को लेकर संत समाज और विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों ने प्रधानमंत्री की जमकर सराहना की है। महंत भक्ति चरण दास महाराज ने इस मौके पर प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि उनका नेतृत्व स्थिरता, समर्पण और निर्णायकता का प्रतीक है। उन्होंने इस उपलब्धि को केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

    महंत भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार देश की सेवा में समर्पित रहे हैं और बिना थके विकास के कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसे एक संत की तरह सेवा भावना से जोड़ा और कहा कि यह नेतृत्व राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह 8931 दिनों की यात्रा केवल समय का आंकड़ा नहीं, बल्कि निरंतर कार्य और समर्पण का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक सफर भी काफी व्यापक रहा है। वे पहले Gujarat Chief Minister के रूप में लंबे समय तक सेवा कर चुके हैं, जहां उन्होंने विकास और सुशासन के कई मॉडल पेश किए। उनके नेतृत्व में गुजरात को विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में देखा गया।

    इसके बाद जब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तो उन्होंने शासन को केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे परिवर्तन का माध्यम बनाया। डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे कई बड़े कार्यक्रम उनके कार्यकाल में आगे बढ़े।

    संत समाज का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान दिलाने में भी उनका योगदान रहा है। इस कारण देश की सांस्कृतिक छवि और अधिक सुदृढ़ हुई है।

    महंत भक्ति चरण दास महाराज ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आगे भी विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। साथ ही देश अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी संरक्षित रखेगा।

    यह उपलब्धि न केवल एक राजनीतिक मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।

  • राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर

    राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर


    नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के संसद में कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उनके आचरण को संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह (जिनमें चार राजदूत शामिल हैं) और चार वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने उठाया मुद्दा

    इस खुले पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी S. P. Vaid ने किया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय गरिमा से जुड़ा हुआ है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां कानून बनते हैं और जनता की आवाज को मंच मिलता है। ऐसे में यहां हर जनप्रतिनिधि से उच्चतम स्तर के आचरण की अपेक्षा की जाती है।

    12 मार्च की घटना पर जताई आपत्ति

    हस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की एक घटना को लेकर विशेष आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, संसद परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या विरोध पर रोक के बावजूद विपक्ष ने निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध जताया और चाय-बिस्कुट लेते हुए नजर आए। पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय गरिमा के प्रति अनादर भी दर्शाता है।

    ‘लोकतंत्र का मंदिर’ है संसद

    पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ माना जाता है, जहां गंभीर मुद्दों पर बहस और निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में संसद के हर हिस्से-चाहे वह सदन का कक्ष हो, गलियारा हो या सीढ़ियां-सभी स्थानों पर समान मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का व्यवहार संस्थागत मूल्यों को कमजोर करता है और जनता के बीच गलत संदेश भेजता है।

    ‘नाटकीय राजनीति’ का आरोप

    खुले पत्र में Rahul Gandhi पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वे पहले भी संसद के भीतर और बाहर ‘नाटकीय’ तरीके से विरोध जताते रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संवाद का स्तर प्रभावित होता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां संसद की कार्यवाही में बाधा डालती हैं और जनता के समय व संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती हैं।

    लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर

    पत्र के अंत में कहा गया है कि सांसदों को अपने हर कदम के प्रतीकात्मक महत्व को समझना चाहिए। खासकर नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे उदाहरण प्रस्तुत करें। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस व्यवहार को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इसे गंभीरता से लेने की अपील की है।

  • 27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर

    27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर


    नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। पार्टी के भीतर इसको लेकर हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर इस बात पर है कि अगला अध्यक्ष कौन बनेगा। पार्टी द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 22 मार्च को नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन की जांच होगी और 24 मार्च को नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार होते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा। अगर सिर्फ एक ही नामांकन आता है, तो 24 मार्च को ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।

    नीतीश कुमार के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इससे पहले भी वह 29 दिसंबर 2023 को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। हाल ही में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि वह बिहार से दूर नहीं जाएंगे और राज्य के लिए काम करते रहेंगे।

    कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी आई सामने
    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आने के बाद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली थी। कई जगहों पर विरोध की खबरें भी सामने आई थीं। इन दिनों नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटते हैं, तो उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बनाए रखना एक रणनीतिक फैसला हो सकता है। इससे पार्टी में संतुलन बना रहेगा। फिलहाल JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'

    शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'


    नई दिल्ली । AAP सांसद संजय सिंह ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और साथ ही उनका समर्थन जताया। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में किसी संत के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि संत के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की, उनकी चोटी खींचकर पिटाई और सरेआम अपमान जैसी घटनाएं हुईं, जो बिल्कुल अस्वीकार्य हैं।

    संवाद से समाधान की मांग, धरना नहीं

    संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य का धरने पर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने योगी सरकार से कहा कि अगर राज्य सरकार संवाद करने में असमर्थ है, तो केंद्र सरकार का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि आगे आए और इस मुद्दे का हल निकाले। सांसद ने यह भी कहा कि अब तक सरकार ने सिर्फ सुनवाई की है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो निराशाजनक है।

    संगम नोज पर रोक को बताया अपराध

    संजय सिंह ने संगम नोज पर शंकराचार्य के स्नान पर रोक को अपराध बताया। उन्होंने कहा, “एक शंकराचार्य को स्नान से रोकना खुद में अपराध है, और उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांगना उससे भी बड़ा अपराध है। यह घटना बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इसी दौरान संत के शिष्यों को धक्का दिया गया और महाराज को मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा।

    धार्मिक और सामाजिक माहौल पर चिंता

    सांसद संजय सिंह ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि काशी कॉरिडोर में मंदिर और मणिकर्णिका घाट में हुई तोड़फोड़, वृंदावन में बाबा के साथ धक्का-मुक्की और शंकराचार्य के साथ वायरल तस्वीरें, सभी सामाजिक और धार्मिक माहौल के लिए नकारात्मक संकेत हैं।

    यूजीसी बिल और पार्टी की स्थिति

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि यूजीसी बिल को लेकर पार्टी में चर्चा जारी है और आम आदमी पार्टी की आधिकारिक स्थिति जल्द तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी न्याय और संविधान के दायरे में रहकर ही निर्णय लेगी।

  • कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड

    कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड


    नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के संगठन सुधार से जुड़े बयान ने पार्टी में अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। RSS-BJP की कार्यशैली का उदाहरण देकर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मुद्दा खुलकर सियासी बहस में बदल गया।
    अब इस विवाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की एंट्री ने मामला और गरमा दिया है।

    रेवंत रेड्डी ने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की विरासत और सोनिया गांधी के नेतृत्व का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के फैसलों ने यह साबित किया है कि कांग्रेस ने हमेशा योग्यता और अनुभव को महत्व दिया।

    रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि 1991 में तेलंगाना के एक छोटे से गांव से आने वाले पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाना और 2004 व 2009 में प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश की कमान सौंपना सोनिया गांधी का ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय था।

    तेलंगाना सीएम ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया।

    विविधताओं से भरे आधुनिक भारत के निर्माण में कांग्रेस का योगदान हर पन्ने पर दर्ज है। राजनीतिक हलकों में रेवंत रेड्डी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की उस सोशल मीडिया पोस्ट का सीधा जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने RSS और जनसंघ में जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया था।

    गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि RSS-BJP में सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने इस पोस्ट में राहुल गांधी को टैग कर संगठनात्मक सुधार की जरूरत पर इशारा किया था। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की दिशा को लेकर बहस और तेज हो गई है।

  • शिवपाल यादव ने बीजेपी के नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का दिया न्योता, बोले- यहां पूरा सम्मान मिलेगा

    शिवपाल यादव ने बीजेपी के नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का दिया न्योता, बोले- यहां पूरा सम्मान मिलेगा


    नई दिल्‍ली। राजधानी लखनऊ में मंगलवार रात बीजेपी के 40 से अधिक ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। यह बैठक औपचारिक सहभोज के बहाने आयोजित की गई थी, लेकिन इसे पार्टी में असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि विधायकों को अगर उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है, तो उन्हें सपा में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह बैठक उनके अनुसार बीजेपी के भीतर असंतोष को दर्शाती है और यही वजह है कि नाराज विधायकों के लिए सपा एक विकल्प हो सकती है।
    नाराज ब्राह्मण विधायक सपा में आएं, उन्हें मिलेगा पूरा सम्मान 
    शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी में जातिगत भेदभाव मौजूद है। उन्होंने नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि हमारी पार्टी में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। शिवपाल ने आगे कहा कि बीजेपी में असंतोष और नाराजगी के कारण अलग-अलग समूह बैठक कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी सभी को समान रूप से मान-सम्मान देती है। सपा के विधायक अतुल प्रधान ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए बताया कि यह केवल ब्राह्मण समुदाय तक सीमित नहीं है। विभिन्न समुदायों के लोग भी सरकार से असंतुष्ट हैं और नाराजगी व्यक्त करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उनका मानना है कि ब्राह्मण विधायकों की बैठक बीजेपी को चुनौती देने और उन्हें हराने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल

    मंगलवार रात लखनऊ में कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक के आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक हुई जिसे सहभोज के बहाने आयोजित किया गया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में अधिकारियों की मनमानी और ब्राह्मण समाज की अनदेखी को लेकर असंतोष जताया गया। वहीं, इस बैठक को मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सत्ता संतुलन को लेकर सियासी चर्चा को और तेज कर सकती है।

  • बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय

    बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय


    नई दिल्‍ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति दीपू चंद्र दास की कथित ईश निंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस पर सियासत भी गर्मा गई है। बीजेपी ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा यह आरोप लगाते हुए कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चुप हैं और केवल गाजा पर ही बोलती हैं। इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया।

    क्‍या बोले इमरान मसूद?

    इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश में हालात पर सबसे ज्यादा आवाज प्रियंका गांधी ने उठाई है। मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह। वह भारत विरोधी गतिविधियों को रोकने में सक्षम होंगी। हालांकि राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल किए जाने पर मसूद की टोन बदल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे जो प्रियंका गांधी करेंगी। ये दोनों एक ही चेहरे की दो आंखें हैं अलग-अलग नहीं देखना चाहिए। राहुल गांधी हमारे नेता हैं और प्रियंका गांधी के भी। कौन क्या भूमिका निभाएगा यह पार्टी तय करेगी। मैं तो सिर्फ एक छोटा सिपाही हूं। इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वह असम और बंगाल जाते हैं तो केवल चुनाव की बात करते हैं और अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बांग्लादेश से हिंदुओं के पलायन और भारत विरोधी गतिविधियों पर चिंता जताई और कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के हाथ में कमान आने पर पूरी दुनिया उनकी सक्रियता देखेगी।

    इमरान मसूद ने प्रियंका गांधी और शशि थरूर पर दी सफाई

    इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी और शशि थरूर को लेकर सफाई दी। मसूद ने कहा कि उनसे प्रियंका गांधी को लेकर सवाल पूछा गया था और उन्होंने जवाब दिया कि अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री बनतीं तो वह इंदिरा गांधी की तरह स्पष्ट और निर्णायक जवाब देतीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रियंका गांधी केवल पीएम मोदी की तरह भाषण नहीं देतीं बल्कि ठोस कार्रवाई करती। इमरान मसूद ने शशि थरूर को लेकर भी कहा। उन्होंने कहा कि शशि थरूर दिशा भ्रमित हो गए हैं और जिस विचारधारा के समर्थन में उन्होंने चुनाव जीता था उसके खिलाफ बात कर रहे हैं। मसूद ने यह भी कहा कि शशि थरूर जिनकी तारीफ कर रहे हैं वह उनके राज्य में भी मौजूद नहीं हैं।