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  • अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर

    अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर


    वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम जिसके तहत बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर वहां काम करते हैं इस हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस में चर्चा का मुख्य विषय बना। संयुक्त आर्थिक समिति की बैठक में नेताओं और विशेषज्ञों ने मौजूदा लॉटरी आधारित वीजा प्रणाली की समीक्षा की और इसमें सुधार के सुझाव दिए।

    बैठक में प्रमुख मुद्दा यह था कि अमेरिका की बदलती जनसांख्यिकी और कामगारों की कमी को देखते हुए वीजा वितरण प्रणाली को अधिक लचीला और कुशलता आधारित बनाया जाए। कांग्रेस के सदस्य डेविड श्वाइकर्ट ने बताया कि रिटायर होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जबकि काम करने वाले युवा स्थिर हैं। ऐसे में विदेशी कुशल कामगारों की भूमिका अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

    विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा सिस्टम में कर्मचारी अधिकतर एक ही नियोक्ता पर निर्भर रहते हैं जिससे उनके वेतन पर दबाव पड़ता है। डॉ. ल्यूक पार्ड्यू ने सुझाव दिया कि अगर कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता मिले तो उनकी उत्पादकता और वेतन दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने अंक आधारित (पॉइंट) सिस्टम बनाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी।

    डैनियल डी. मार्टिनो ने कहा कि स्थायी निवास में देरी और लॉटरी सिस्टम की खामियां हैं। उन्होंने वीजा आवंटन में वेतन और कौशल आधारित चयन की वकालत की ताकि युवा और कुशल कामगारों को प्राथमिकता मिल सके। डॉ. डगलस होल्ट्ज-ईकिन ने भी कौशल आधारित इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का समर्थन किया और कहा कि सुधार केवल एच-1बी तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    जेरेमी न्युफेल्ड ने बताया कि अन्य देशों के अनुभव से पता चलता है कि सिर्फ पॉइंट सिस्टम पर्याप्त नहीं है। नौकरी का ऑफर मिलने पर अतिरिक्त अंक देने वाला मिश्रित सिस्टम अधिक प्रभावी हो सकता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुशल विदेशी कामगार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाते हैं और लंबे समय में वेतन में सुधार करते हैं।

    प्रतिनिधि लॉयड स्मकर ने पूछा कि क्या इमिग्रेशन बढ़ाने से आर्थिक विकास और राष्ट्रीय कर्ज की समस्या में मदद मिल सकती है। इस पर होल्ट्ज-ईकिन ने सहमति जताई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर भी चर्चा हुई जिसमें पार्ड्यू ने कहा कि एआई नौकरियां कम नहीं करेगा बल्कि नई तरह के कौशल की मांग बढ़ाएगा।

    कांग्रेस सदस्य विक्टोरिया स्पार्ट्ज और अन्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन नीति में मेहनती और कुशल लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सिस्टम को समय के साथ बदलना चाहिए ताकि यह बदलती आर्थिक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करे।

    अंत में श्वाइकर्ट ने कहा कि प्रतिभा आधारित इमिग्रेशन सुधार अमेरिकी आर्थिक विकास उत्पादकता वेतन और स्थिरता के लिए आवश्यक है। एच-1बी वीजा अभी भी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए मुख्य मार्ग है और इस पर किसी भी बदलाव पर भारत भी नजर रखता है।

  • H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    नई दिल्ली
    /अमेरिका में काम करने और अपने परिवार के साथ बसने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। H-1B और H-4 वीजा के लिए इंटरव्यू का इंतजार कर रहे भारतीय आवेदकों की राह में नई अड़चन आ गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इन वीजा कैटेगरी के लिए इंटरव्यू की तारीखें अब आगे बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक कर दी गई हैं। इससे पहले इन्हें फरवरी और मार्च 2026 तक टाल दिया गया था, लेकिन अब देरी और लंबी होती नजर आ रही है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय आवेदकों को अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट्स की ओर से सूचित किया गया है कि पहले से तय कई इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को रद्द या री-शिड्यूल किया जा रहा है। डेक्कन क्रॉनिकल के साथ-साथ अमेरिकी मीडिया संस्थान द अमेरिकन बाज़ार ने भी दावा किया है कि बड़ी संख्या में वीजा अप्लीकेंट्स की इंटरव्यू डेट्स 2026 की आखिरी तिमाही तक खिसका दी गई हैं।इस लगातार हो रही देरी का असर अब सीधे आवेदकों की योजनाओं पर पड़ने लगा है। जनवरी और फरवरी 2026 में इंटरव्यू के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके कई भारतीय अपनी अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दोबारा बुकिंग करने पर शायद पहले की कोई तारीख मिल जाए। हालांकि, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है।

    हाल के हफ्तों में अमेरिकी कांसुलेट्स ने कई आवेदकों को ईमेल और नोटिस के जरिए बताया कि दिसंबर और जनवरी के लिए निर्धारित इंटरव्यू अब फरवरी या मार्च तक टाल दिए गए हैं। कुछ मामलों में यह देरी और ज्यादा बढ़कर 2026 के अंत तक पहुंच गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।बताया जा रहा है कि वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दी गई है। आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच की जा रही है, जिसके चलते प्रोसेसिंग टाइम बढ़ गया है। इसी अतिरिक्त जांच प्रक्रिया को इंटरव्यू में देरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

    इस स्थिति ने खासकर उन भारतीय प्रोफेशनल्स को ज्यादा प्रभावित किया है, जो पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं और अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। H-4 वीजा का इंतजार कर रहे उनके जीवनसाथी और बच्चे महीनों से भारत में फंसे हुए हैं। बार-बार इंटरव्यू टलने से न केवल उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके करियर पर भी खतरा मंडराने लगा है। इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अपॉइंटमेंट्स का एक साथ कैंसिल होना असामान्य है। द अमेरिकन बाज़ार से बातचीत में कई वकीलों ने बताया कि जिन आवेदकों के इंटरव्यू पहले 2026 की शुरुआत में तय थे, उन्हें अब सीधे अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तारीखें दी जा रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी वीजा सिस्टम पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो भारतीय टैलेंट पर काफी हद तक निर्भर हैं। टेक, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में कुशल पेशेवरों की कमी और बढ़ सकती है।फिलहाल H-1B और H-4 वीजा आवेदकों के सामने अनिश्चितता का दौर बना हुआ है। सभी की नजरें अमेरिकी प्रशासन की अगली घोषणा पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इंटरव्यू प्रक्रिया में यह देरी अस्थायी है या आने वाले समय में और बढ़ सकती है।